गुरु के महत्व से रुबरु करवा गया नाटक चक्कर ही चक्कर
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कुरुक्षेत्र 30 मई। हरियाणा कला परिषद द्वारा कला कीर्ति भवन में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में नाटक चक्कर ही चक्कर का मंचन किया गया। कला सृष्टि मंच कुरुक्षेत्र के कलाकारों द्वारा वरिष्ठ रंगकर्मी बृज शर्मा के निर्देशन में मंचित नाटक में गुरु के महत्व और जिम्मेदारी को बखूबी बताया गया। इस मौके पर सूचना जनसम्पर्क विभाग के प्रोजेक्ट निदेशक डा. पवन आर्य, डा. मंजू तोमर, समाजसेवी व प्रेरणा संस्थान के संरक्षक डॉ. जयभगवान सिंगला, पैनोरमा के निदेशक डा. सुरेश सोनी, सौरभ चौधरी विशेष रूप से उपस्थित रहे। मंच का संचालन विकास शर्मा द्वारा किया गया। कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर की गई। नाटक चक्कर ही चक्कर में दिखाया गया कि आज के बदलते परिवेश में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए एक मार्गदर्शक, दूरदर्शी और नैतिक मूल्यों से परिपूर्ण गुरु का होना अनिवार्य है। समाज में गुरु के सही स्वरूप और उनके उत्तरदायित्वों को रेखांकित करते हुए कलाकारों ने एक महाविद्यालय के दृश्य को दिखाया। जिसमें एक छात्रा के साथ छेड़छाड होने पर महाविद्यालय का मैनेजमेंट और प्राचार्य अपने दायित्व को पूरा न करते हुए छात्रा को ही दबाने का प्रयास करते हैं। जिससे महाविद्यालय का प्रोफेसर अरविंद आत्मग्लानि से भर जाता है। छात्रा की सहायता न करके मैनेजमेंट के कहे अनुसार उसे अपना निर्णय लेना पड़ता है। इस दुविधा में अरविंद को अपने काॅलेज के समय में किये गए नाटक एक ओर द्रोणाचार्य स्मरण होता है, जिसमें द्रोणाचार्य भी एकलव्य की निपुणता की परवाह किये बिना सत्तापक्ष के अर्जुन के कारण एकलव्य का अगूंठा मांग लेता है। इस प्रकार गुरु के महत्व को दर्शाते नाटक ने समाज के सामने कईं प्रश्न खड़े कर दिये। नाटक में अरविंद की भूमिका स्वयं बृज शर्मा ने निभाई। द्रोण की भूमिका में दीपक कौशिक, एकलव्य विकास शर्मा, प्राचार्य शिवकुमार किरमच बने। अन्य भूमिकाओं में सुरेखा मखीजा, रेनू खुग्गर, अन्नपूर्णा शर्मा, दीपक शर्मा, आशी क्षेत्रपाल, नीरज आश्री, रमा शर्मा डा. जय भगवान सिंगला, सत्यभूषण, साक्षी गौतम, आशा सिंगला, सुदेश मदान, नमिता कौशिक, जयश्री, विभा अग्रवाल, मानवी, शुचिस्मिता शर्मा, सरिता, चेतना, मंजू सिंगला, अमरजीत सिंह व अरदास आदि ने सहयोग दिया। अंत में डा. पवन आर्य ने सभी को सम्बोंधित करते हुए कहा कि वर्तमान की भागदौड़ भरी जिंदगी में कला के लिए समय निकालना अत्यंत कठिन है। किंतु शहर के प्रतिष्ठित लोगों द्वारा अपनी दिनचर्या के साथ-साथ रंगमंच को समय देना अत्यंत सराहनीय है। इस मौके पर डा. चितरंजन दास सिंह कौशल, सुनील शर्मा, राजेश सिंगला आदि उपस्थित रहे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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