करनाल, 25 मई। कृषि उप निदेशक डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि लगातार गिरते हुए भू-जल स्तर को सुधारने व फसल विविधीकरण को बढ़ाने के लिए विभाग की तरफ से जिला के किसानों से धान की फसल लगाने की बजाय वैकल्पिक फसलों की बिजाई करने की अपील की गई है। विभाग द्वारा वैकल्पिक फसलों जैसे- मक्का, कपास, खरीफ दालें (अरहर, मूंग, मोठ, उड़द, ग्वार, सोयाबीन), खरीफ तिलहन (तिल, अरण्डी, मूंगफली), चारा फसलें, खरीफ प्याज, सब्जियां यहां तक की खेत का खाली रखना व कृषि वानिकी, पोपलर व सफेदा लगाने पर विभाग द्वारा एकमुश्त किसान के सीधे खाते में भौतिक सत्यापन उपरांत 8000/-रु प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके साथ-साथ दलहन तिलहन व कॉटन उगाने वाले किसानों को 2000/-रु प्रति एकड़ अतिरिक्त बोनस दिया जायेगा।

उन्होंने बताया कि जिन किसानों ने पिछले खरीफ सीजन के दौरान मेरा पानी मेरी विरासत के तहत फसल विविधीकरण अपनाया था, वे इस साल भी लाभ के पात्र हैं। अगर वे उसी खेत में मंजूर वैकल्पिक फसलें उगाना जारी रखते हैं, लेकिन उन्होंने पिछले चार सालों के दौरान उस खेत में धान उगाया हो। जो किसान पिछले साल से खरीफ धान के खेतों को इस साल खाली छोड देगें वे भी इंसेंटिव पाने के हकदार है।

उन्होंने बताया कि इस स्कीम का लाभ लेने के लिए किसान को सबसे पहले मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल https://fasal.haryana.gov.in पर पंजीकरण करवाना अनिवार्य रहेगा। पंजीकरण पोर्टल खरीफ फसलों के रजिस्ट्रेशन तक रहेगा। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ लेने के लिए किसान को अपने स्तर पर ही बीमा करवाना होगा। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के टोल फ्री न0 1800-180-2117 या अपने गांव के कृषि विकास अधिकारी / खण्ड कृषि अधिकारी/उप मंडल कृषि अधिकारी/उप कृषि निदेशक कार्यालय से सम्पर्क स्थापित कर सकते हैं।

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