अम्बाला – अम्बाला  नगर निगम के  मेयर (महापौर) पद और निगम क्षेत्र के सभी   20 वार्डो से  एक-एक न.नि. सदस्य  के निर्वाचन के  लिए गत रविवार 10 मई  को हुए  मतदान के नतीजों में आज  भाजपा  की उम्मीदवार अक्षिता सैनी ने कांग्रेस पार्टी की प्रत्याशी  कुलविंदर कौर सैनी  को 21 हजार 358 वोटों के विशाल अंतर से  पराजित कर स्थानीय नगर निगम की तीसरी सीधी निर्वाचित और पिछड़ा वर्ग – बी.सी. (बी) समाज से पहली महिला मेयर बनने  का  गौरव हासिल किया  है.  निगम क्षेत्र  के कुल 1 लाख 98 हज़ार 224 मतदाताओं में से रविवार को कराये गये  मतदान में पड़े लाख 7 हज़ार 651 वोटों में  से भाजपाई अक्षिता को  52 हज़ार 794 वोट ( 49.04  %) मिले  जबकि कांग्रेस की कुलविंदर   को  31 हज़ार 436 वोट  ( 29.20 %) वोट प्राप्त हुए. वहीं निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ी  सोनिया चौधरी को 21 हज़ार 730 वोट मिले.  नोटा विकल्प के पक्ष में 1691 वोट पड़े. वहीं निगम के 20 वार्डों में से भाजपा ने 16 वार्डों  से जबकि कांग्रेस ने  3 वार्डों से और एक वार्ड नंबर 15 में निर्दलीय ने जीत हासिल की.

 

 

इसी बीच शहर के  सेक्टर-निवासी  हाईकोर्ट एडवोकेट और चुनावी विश्लेषक   हेमंत कुमार (9416887788ने बताया कि आज अम्बाला नगर निगम के मेयर पद के प्रत्यक्ष चुनाव  नतीजे का एक रोचक परन्तु महत्वपूर्ण पहलू यह भी है  कि अगर फाइनल नतीजों में कांग्रेस की उम्मीदवार कुलविंदर को मिले 31 हज़ार 436 वोट   और निर्दलीय सोनिया चौधरी को प्राप्त हुए 21 हज़ार 730 वोट को एक साथ जोड़ा जाए, तो उनका योग 53 हज़ार 166 बनता है जो चुनाव में विजयी रही भाजपा की अक्षिता सैनी से 372 अधिक है.

 

राजनीतिक हलकों  में इसका एक अर्थ यह भी  लगाया जा सकता  है कि क्या  अक्षिता को मिली  जीत में  परोक्ष रूप से सोनिया चौधरी का हाथ है ! अगर सोनिया  निर्दलीय के तौर पर चुनाव न लड़ती और चुनावी मुकाबला त्रिकोणीय न होता, तो अक्षिता और कुलविंदर में सीधी टक्कर  होती और उस परिस्थिति में  चुनावी परिणाम संभवत: कुछ भी हो सकता था.

 

बहरहाल, हेमंत ने बताया कि चूँकि चुनाव में कांग्रेस की कुलविंदर और निर्दलीय सोनिया दोनों को  13 हजार 245 से अधिक वोट मिले हैं  अर्थात दोनों को कुल वैध वोटों के  एक-बटा-आठ (अर्थात 12.50%) से अधिक वोट प्राप्त हुए  है, इसलिए इन दोनों ने अपनी ज़मानत राशि बचा ली है.

 

बहरहाल,  21 सदस्ययी  अम्बाला नगर निगम सदन (मेयर को जोड़कर) में भाजपा ने 16 वार्डों में जीत हासिल कर  तीन-चौथाई बहुमत हासिल कर लिया है  

जबकि विपक्ष के तौर पर केवल चार वार्डों नामत: वार्ड 8 से कांग्रेस की गुंजीत कौर, वार्ड 14 से कांग्रेस की  पूनम शर्मा, वार्ड 19 से कांग्रेस के  पुनीत कवि और वार्ड 15 से निर्दलीय मनोज शर्मा निर्वाचित हुए है.

हेमंत का कानूनी मत है कि हमारे देश भारत के संविधान की दसवीं अनुसूची में जो  दल बदल विरोधी कानून हैं, वह केवल संसद और राज्य विधान मंडलों पर लागू होता है, शहरी स्थानीय निकाय (म्युनिसिपल ) संस्थानों जैसे नगर निगमों/नगर परिषदों/नगरपालिका समितियों पर नहीं इसलिए उक्त 4 विपक्षी निर्वाचित  नगर निगम सदस्य ( जिन्हें आम तौर पर वार्ड पार्षद / कोंसलर कहा जाता है हालांकि हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 में यह शब्द भी नहीं है)   कभी भी औपचारिक या अनौपचारिक रूप से पाला बदलकर  भाजपा  में शामिल हो सकते है. इससे उक्त चारों की नगर निगम सदस्यता पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

हेमंत ने  बताया कि हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 के अंतर्गत  हर नगर निगम में अधिकतम 3 व्यक्तियों को, जो म्युनिसिपल प्रशासन में विशेष ज्ञान या अनुभव रखते हो, को राज्य सरकार   नगर निगम में नामित  (नॉमिनेटेड ) सदस्य के तौर पर मनोनीत   कर सकती है. इसी प्रकार  नगर निगम के वार्डों  से हरियाणा विधानसभा के सदस्य /  विधायक और संसद सदस्य भी नगर निगम  के पदेन ( पद के कारण ) सदस्य होते हैं. वर्तमान में राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा, लोकसभा सांसद वरुण चौधरी, अम्बाला शहर विधायक चौधरी निर्मल सिंह और अम्बाला कैंट विधायक और प्रदेश के कैबिनेट मंत्री अनिल विज अम्बाला नगर निगम के पदेन सदस्य हैं. 

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