अबकी बार NOTA(नोटा) विकल्प को पड़े वोटों को ज़मानत राशि बचाने के लिए आवश्यक 12.50 % मतों की गणना में नहीं किया जाएगा शामिल
चंडीगढ़—
हरियाणा के तीन प्रमुख नगर निगमों — अम्बाला, पंचकूला और सोनीपत — में हुए मेयर चुनाव के बीच अब उम्मीदवारों की ज़मानत बचने-बचाने की गणित चर्चा का बड़ा विषय बन गई है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट एवं म्युनिसिपल कानून विशेषज्ञ हेमंत कुमार ने स्पष्ट किया है कि इस बार चुनाव में NOTA (None of the Above) को पड़े वोट उम्मीदवारों की ज़मानत बचाने हेतु आवश्यक न्यूनतम वोटों की गणना में शामिल नहीं किए जाएंगे।
राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध मतदान आंकड़ों के अनुसार अम्बाला नगर निगम में 54.3%, पंचकूला में 53.4% तथा सोनीपत में 48.2% मतदान दर्ज किया गया। अम्बाला में कुल 1,07,651 वोट पड़े, पंचकूला में 1,10,743 और सोनीपत में 1,42,688 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
हेमंत के अनुसार हरियाणा नगर निगम निर्वाचन नियमावली, 1994 के तहत चुनाव हारने वाले प्रत्याशियों को अपनी ज़मानत राशि बचाने के लिए कुल वैध मतों का एक-बटा-आठ (12.50%) से अधिक वोट प्राप्त करना अनिवार्य होता है।
इसी आधार पर:
- अम्बाला नगर निगम में मेयर प्रत्याशी को ज़मानत बचाने हेतु करीब 13,456 से अधिक वोट लेने होंगे।
- पंचकूला नगर निगम में यह आंकड़ा करीब 13,843 वोट रहेगा।
- जबकि सोनीपत नगर निगम में प्रत्याशी को करीब 17,836 से अधिक वोट हासिल करने होंगे।
हेमंत ने स्पष्ट किया कि यह नियम केवल चुनाव हारने वाले उम्मीदवारों पर लागू होता है, क्योंकि विजयी उम्मीदवार की ज़मानत स्वतः सुरक्षित रहती है।
VVPAT नहीं होने पर एडवोकेट ने किया वोट बहिष्कार
“जब मतदाता को यह देखने का अधिकार ही नहीं कि वोट किसे गया, तो पारदर्शिता कैसे?”
अम्बाला नगर निगम वार्ड नंबर-12 निवासी हेमंत कुमार ने दावा किया कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2013 के फैसले की गरिमा का सम्मान करते हुए जीवन में पहली बार मतदान का बहिष्कार किया, क्योंकि नगर निगम चुनाव में EVM के साथ VVPAT व्यवस्था लागू नहीं थी।
उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में जब VVPAT का प्रयोग संभव है, तो नगर निगम चुनावों में इसे लागू न करना चुनावी पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मेयर चुनाव में कांटे की टक्कर
अम्बाला नगर निगम में भाजपा की अक्षिता सैनी, कांग्रेस की कुलविंदर कौर और निर्दलीय सोनिया चौधरी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। पंचकूला में मुख्य मुकाबला भाजपा के श्याम लाल बंसल और कांग्रेस की सुधा भारद्वाज के बीच माना जा रहा है। वहीं सोनीपत में भाजपा के राजीव जैन और कांग्रेस के कमल दीवान आमने-सामने हैं।
कितनी है ज़मानत राशि?
हेमंत कुमार ने बताया कि वर्तमान नियमों के अनुसार:
- मेयर पद हेतु सामान्य उम्मीदवार की ज़मानत राशि — ₹10,000
- महिला, एससी एवं बीसी वर्ग उम्मीदवार हेतु — ₹5,000
- नगर निगम सदस्य पद हेतु सामान्य उम्मीदवार — ₹3,000
- महिला/आरक्षित वर्ग उम्मीदवार — ₹1,500
चूंकि अम्बाला में मेयर पद बीसी-बी महिला के लिए आरक्षित है, इसलिए वहां सभी महिला उम्मीदवारों ने ₹5,000 की ज़मानत राशि जमा करवाई।
NOTA सबसे आगे रहा तो भी चुनाव रद्द नहीं होगा
हेमंत कुमार ने जानकारी दी कि 7 अप्रैल 2026 को राज्य निर्वाचन आयुक्त देवेंद्र सिंह कल्याण द्वारा जारी आदेश के अनुसार यदि किसी चुनाव में NOTA को सर्वाधिक वोट भी मिलते हैं, तब भी चुनाव रद्द नहीं होगा। ऐसी स्थिति में NOTA के बाद सर्वाधिक वोट पाने वाले उम्मीदवार को विजयी घोषित किया जाएगा।
अबकी बार NOTA(नोटा) विकल्प को पड़े वोटों को ज़मानत राशि बचाने के लिए आवश्यक 12.50 % मतों की गणना में नहीं किया जाएगा शामिल
चंडीगढ़—
हरियाणा के तीन प्रमुख नगर निगमों — अम्बाला, पंचकूला और सोनीपत — में हुए मेयर चुनाव के बीच अब उम्मीदवारों की ज़मानत बचने-बचाने की गणित चर्चा का बड़ा विषय बन गई है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट एवं म्युनिसिपल कानून विशेषज्ञ हेमंत कुमार ने स्पष्ट किया है कि इस बार चुनाव में NOTA (None of the Above) को पड़े वोट उम्मीदवारों की ज़मानत बचाने हेतु आवश्यक न्यूनतम वोटों की गणना में शामिल नहीं किए जाएंगे।
राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध मतदान आंकड़ों के अनुसार अम्बाला नगर निगम में 54.3%, पंचकूला में 53.4% तथा सोनीपत में 48.2% मतदान दर्ज किया गया। अम्बाला में कुल 1,07,651 वोट पड़े, पंचकूला में 1,10,743 और सोनीपत में 1,42,688 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
हेमंत के अनुसार हरियाणा नगर निगम निर्वाचन नियमावली, 1994 के तहत चुनाव हारने वाले प्रत्याशियों को अपनी ज़मानत राशि बचाने के लिए कुल वैध मतों का एक-बटा-आठ (12.50%) से अधिक वोट प्राप्त करना अनिवार्य होता है।
इसी आधार पर:
- अम्बाला नगर निगम में मेयर प्रत्याशी को ज़मानत बचाने हेतु करीब 13,456 से अधिक वोट लेने होंगे।
- पंचकूला नगर निगम में यह आंकड़ा करीब 13,843 वोट रहेगा।
- जबकि सोनीपत नगर निगम में प्रत्याशी को करीब 17,836 से अधिक वोट हासिल करने होंगे।
हेमंत ने स्पष्ट किया कि यह नियम केवल चुनाव हारने वाले उम्मीदवारों पर लागू होता है, क्योंकि विजयी उम्मीदवार की ज़मानत स्वतः सुरक्षित रहती है।
VVPAT नहीं होने पर एडवोकेट ने किया वोट बहिष्कार
“जब मतदाता को यह देखने का अधिकार ही नहीं कि वोट किसे गया, तो पारदर्शिता कैसे?”
अम्बाला नगर निगम वार्ड नंबर-12 निवासी हेमंत कुमार ने दावा किया कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2013 के फैसले की गरिमा का सम्मान करते हुए जीवन में पहली बार मतदान का बहिष्कार किया, क्योंकि नगर निगम चुनाव में EVM के साथ VVPAT व्यवस्था लागू नहीं थी।
उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में जब VVPAT का प्रयोग संभव है, तो नगर निगम चुनावों में इसे लागू न करना चुनावी पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मेयर चुनाव में कांटे की टक्कर
अम्बाला नगर निगम में भाजपा की अक्षिता सैनी, कांग्रेस की कुलविंदर कौर और निर्दलीय सोनिया चौधरी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। पंचकूला में मुख्य मुकाबला भाजपा के श्याम लाल बंसल और कांग्रेस की सुधा भारद्वाज के बीच माना जा रहा है। वहीं सोनीपत में भाजपा के राजीव जैन और कांग्रेस के कमल दीवान आमने-सामने हैं।
कितनी है ज़मानत राशि?
हेमंत कुमार ने बताया कि वर्तमान नियमों के अनुसार:
- मेयर पद हेतु सामान्य उम्मीदवार की ज़मानत राशि — ₹10,000
- महिला, एससी एवं बीसी वर्ग उम्मीदवार हेतु — ₹5,000
- नगर निगम सदस्य पद हेतु सामान्य उम्मीदवार — ₹3,000
- महिला/आरक्षित वर्ग उम्मीदवार — ₹1,500
चूंकि अम्बाला में मेयर पद बीसी-बी महिला के लिए आरक्षित है, इसलिए वहां सभी महिला उम्मीदवारों ने ₹5,000 की ज़मानत राशि जमा करवाई।
NOTA सबसे आगे रहा तो भी चुनाव रद्द नहीं होगा
हेमंत कुमार ने जानकारी दी कि 7 अप्रैल 2026 को राज्य निर्वाचन आयुक्त देवेंद्र सिंह कल्याण द्वारा जारी आदेश के अनुसार यदि किसी चुनाव में NOTA को सर्वाधिक वोट भी मिलते हैं, तब भी चुनाव रद्द नहीं होगा। ऐसी स्थिति में NOTA के बाद सर्वाधिक वोट पाने वाले उम्मीदवार को विजयी घोषित किया जाएगा।
