अम्बाला —  गत दिवस रविवार 10 मई को हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण में अम्बाला नगर निगम सहित प्रदेश के  करीब एक दर्जन शहरी निकायों के आम चुनाव और उपचुनाव हेतु कराये गये मतदान  के  दौरान ई.वी.एम. (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) के साथ वी.वी.पैट. वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल) व्यवस्था लागू न होने पर एक बार फिर बड़ा सवाल  खड़ा हो  गया ।

 

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एक एडवोकेट हेमंत कुमार, जो  अम्बाला नगर निगम के निवासी एवं निगम क्षेत्र के  वार्ड नंबर 12  के एक रजिस्टर्ड मतदाता भी हैं, ने  वी.वी.पैट.  के बगैर ई.वी.एम.  द्वारा कराये जा रहे मतदान को  लोकतंत्र और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की खुली अवहेलना बताते हुए विवश होकर एवं भारी मन से  अपने मताधिकार का बहिष्कार किया.

 

हालांकि रविवार सुबह  हेमंत ने हरियाणा राज्य निर्वाचन आयुक्त देवेन्द्र सिंह कल्याण, जिला उपायुक्त (डी.सी.) कम जिला  निर्वाचन अधिकारी अजय सिंह तोमर, जिले  के अतिरिक्त उपायुक्त (ए.डी.सी.) और अम्बाला नगर निगम चुनाव के लिए पदांकित  रिटर्निंग ऑफिसर (आर.ओ.) विराट, चारों सहायक रिटर्निंग ऑफिसर (ए.आर.ओ.) सहित प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ( सी.ई.ओ.) ए.श्रीनिवास और साथ साथ देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार  एवं दोनों निर्वंचन आयुक्तों- डॉ. सुखबीर सिंह संधू एवं डॉ. विवेक जोशी  को एक  विस्तृत लोक अभ्यावेदन भेजकर  मुखर तौर पर स्पष्ट किया  कि अक्टूबर, 2013 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा (डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी बनाम भारतीय चुनाव आयोग ) में  दिए गए ऐतिहासिक फैसले के बावजूद हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग आज तक प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनावों में ई.वी.एम.  के साथ वी.वी.पैट. तकनीक लागू करने में विफल रहा है।

उन्होंने लिखा  कि देशभर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों में वी.वी.पैट. युक्त आधुनिक एम-3 मॉडल ईवीएम का उपयोग हो रहा है, लेकिन हरियाणा के शहरी निकाय चुनाव अब भी दशकों पुरानी एम-2 मॉडल मशीनों से कराए जा रहे हैं, जिनमें वी.वी.पैट. की सुविधा संभव ही नहीं है।

 

 

 

बिना वीवीपैट वोटिंग लोकतंत्र पर सवाल

एडवोकेट हेमंत ने यह भी  लिखा  कि जब मतदाता को यह देखने का अधिकार ही नहीं मिलेगा कि उसका वोट वास्तव में उसी उम्मीदवार को ही गया है जिसके नाम और चुनाव-चिन्ह के सामने का उसने   बटन दबाया   है, तब चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता दोनों संदेह के घेरे में आ जाती हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद निकाय चुनावों में वी.वी.पैट. लागू करने को लेकर “लगातार उदासीन” बना हुआ है।

मतदान का सार्वजनिक बहिष्कार

हेमंत ने रविवार को अम्बाला नगर निगम चुनाव में मतदान न करने की घोषणा करते हुए कहा कि वी.वी.पैट. के अभाव में ई.वी.एम. आधारित मतदान प्रणाली पर उनका विश्वास नहीं रह गया है। उन्होंने माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 2013 में चुनावी  मतदान दौरान ई.वी.एम्. के साथ अनिवार्य तौर पर वी.वी.पैट. का प्रयोग करने बारे निर्देश के गरिमा का सम्मान  करते हुए अपने जीवन में पहले बार  अपने मताधिकार का बहिष्कार किया.

 

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह पिछले कई वर्षों से राज्य निर्वाचन आयोग से सार्वजनिक रूप से मांग करते रहे हैं कि हरियाणा में नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिका समिति चुनावों में भी उसी प्रकार वी.वी.पैट. तकनीक लागू की जाए जैसी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में लागू है।

 

रविवार को हरियाणा में तीन नगर निगमों — अम्बाला, पंचकूला और सोनीपत — सहित कुल 13 शहरी निकायों में आम चुनाव एवं उपचुनाव के लिए मतदान कराया गया. इन चुनावों में कुल 8 लाख 73 हजार 177 योग्य मतदातों में से 4 लाख  78 हज़ार 68 अर्थात करीब 55 प्रतिशत मतदाताओं ने   ई.वी.एम. के माध्यम से अपने अपने  मताधिकार का प्रयोग किया लेकिन कोई भी वोटर अपनी वोट डालने के बाद  उसे देख नहीं सका क्योंकि  किसी भी मतदान केंद्र पर वी.वी.पैट. मशीनों का प्रयोग नहीं किया गया.

जरूरत पड़ी तो कानूनी लड़ाई

हेमंत  ने बताया कि यदि भविष्य में भी हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग निकाय चुनावों में मतदान दौरान ई.वी.एम्. के साथ  वी.वी.पैट. लागू नहीं करता, तो इस मुद्दे को अदालत  में भी उठाया जाएगा.

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल मतदान कराने से मजबूत नहीं होता, बल्कि मतदाता के विश्वास और चुनावी पारदर्शिता से मजबूत होता है।

आयोग से सीधा सवाल

अपने अभ्यावेदन में स्पष्ट  लिखा  कि जब भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243ZA के तहत राज्य निर्वाचन आयोग को व्यापक चुनावी अधिकार प्राप्त हैं, तो फिर शहरी निकाय चुनावों में वी.वी.पैट. लागू करने से आखिर परहेज क्यों किया जा रहा है? जब लोकसभा और विधानसभा चुनाव के मतदान दौरान ई.वी.एम.  के साथ वी.वी.पैट. तकनीक का प्रयोग किया जा सकता है, तो शहरी निकाय के चुनावो में क्यों नहीं ? उन्होंने सार्वजनिक अपील की  कि हरियाणा में आगामी सभी शहरी  निकाय चुनावों में वी.वी.पैट. युक्त ई.वी.एम. से ही मतदान सुनिश्चित किया जाए ताकि चुनाव प्रक्रिया पर मतदाताओं और आम जनता  का भरोसा कायम रह सके।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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