आज रविवार 10 मई 2026 को हरियाणा के एक दर्जन शहरी निकाय चुनावों के लिए कराये जा रहे मतदान के  बीच ई.वी.एम. (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) के साथ वी.वी.पैट. वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल) व्यवस्था लागू न होने पर बड़ा सवाल  खड़ा हो गया है।

 पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एक एडवोकेट हेमंत कुमार, जो  अम्बाला नगर निगम क्षेत्र के निवासी एवं निगम क्षेत्र के  वार्ड नंबर 12  के एक रजिस्टर्ड मतदाता भी हैं, ने आज वी.वी.पैट.  के बगैर ई.वी.एम.  द्वारा कराये जा रहे मतदान को  लोकतंत्र और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की खुली अवहेलना बताते हुए विवश होकर एवं भारी मन से  अपने मताधिकार का बहिष्कार किया है.

इसी बीच हेमंत ने आज हरियाणा राज्य निर्वाचन आयुक्त देवेन्द्र सिंह कल्याण, जिला उपायुक्त कम जिला  निर्वाचन अधिकारी, चुनाव के लिए पदांकित  रिटर्निंग ऑफिसर (आर.ओ.) एवं अन्य चुनाव अधिकारियों सहित प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ( सी.ई.ओ.) और साथ साथ देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार  एवं दोनों निर्वंचन आयुक्तों- डॉ. सुखबीर सिंह संधू एवं डॉ. विवेक जोशी  को भेजे विस्तृत लोक अभ्यावेदन में स्पष्ट तौर पर उल्लेख किया है  कि अक्टूबर, 2013 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा (डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी बनाम भारतीय चुनाव आयोग ) में   दिए गए ऐतिहासिक फैसले के बावजूद हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग आज तक प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनावों में ई.वी.एम.  के साथ वी.वी.पैट. तकनीक लागू करने में विफल रहा है।

उन्होंने कहा कि देशभर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों में वीवीपैट युक्त आधुनिक M-3 मॉडल ईवीएम का उपयोग हो रहा है, लेकिन हरियाणा के शहरी निकाय चुनाव अब भी दशकों पुरानी M-2 मॉडल मशीनों से कराए जा रहे हैं, जिनमें वी.वी.पैट. की सुविधा संभव ही नहीं है।

बिना वीवीपैट वोटिंग लोकतंत्र पर सवाल

एडवोकेट हेमंत ने लिखा है  कि जब मतदाता को यह देखने का अधिकार ही नहीं मिलेगा कि उसका वोट वास्तव में उसी उम्मीदवार को ही गया है जिसके नाम और चुनाव-चिन्ह के सामने का उसने   बटन दबाया   है, तब चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता दोनों संदेह के घेरे में आ जाती हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद निकाय चुनावों में वी.वी.पैट. लागू करने को लेकर “लगातार उदासीन” बना हुआ है।

मतदान का सार्वजनिक बहिष्कार

हेमंत कुमार ने रविवार को अम्बाला नगर निगम चुनाव में मतदान न करने की घोषणा करते हुए कहा कि वी.वी.पैट. के अभाव में ई.वी.एम. आधारित मतदान प्रणाली पर उनका विश्वास नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि भारी मन से और विवश होकर उन्हें अपने मताधिकार का बहिष्कार करना पड़ रहा है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह पिछले कई वर्षों से राज्य निर्वाचन आयोग से सार्वजनिक रूप से मांग करते रहे हैं कि हरियाणा में नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिका समिति चुनावों में भी उसी प्रकार वीवीपैट तकनीक लागू की जाए जैसी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में लागू है।

आज 13 निकायों में मतदान

रविवार को हरियाणा में तीन नगर निगमों — अम्बाला, पंचकूला और सोनीपत — सहित कुल 13 शहरी निकायों में आम चुनाव एवं उपचुनाव के लिए मतदान कराया जा रहा है। इन चुनावों में लाखों  मतदाता ई.वी.एम. के माध्यम से अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं, लेकिन किसी भी मतदान केंद्र पर वी.वी.पैट. मशीनों का उपयोग नहीं किया जा रहा।

जरूरत पड़ी तो कानूनी लड़ाई

हेमंत कुमार ने संकेत दिए कि यदि भविष्य में भी हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग निकाय चुनावों में वीवीपैट लागू नहीं करता, तो इस मुद्दे को न्यायालय में भी उठाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल मतदान कराने से मजबूत नहीं होता, बल्कि मतदाता के विश्वास और चुनावी पारदर्शिता से मजबूत होता है।

आयोग से सीधा सवाल

अपने अभ्यावेदन में उन्होंने राज्य निर्वाचन आयुक्त देवेन्द्र सिंह कल्याण से पूछा है कि जब संविधान के अनुच्छेद 243ZA के तहत आयोग को व्यापक चुनावी अधिकार प्राप्त हैं, तो फिर निकाय चुनावों में वी.वी.पैट. लागू करने से आखिर परहेज क्यों किया जा रहा है?

उन्होंने मांग की कि आगामी सभी नगर निकाय चुनावों में वी.वी.पैट. युक्त ईवीएम से ही मतदान सुनिश्चित किया जाए ताकि चुनाव प्रक्रिया पर जनता का भरोसा कायम रह सके।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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