सांसारिक मोह को त्याग कर ही संत जन कल्याण के लिए साधना करते हैं
कुरुक्षेत्र, 4 मई : सांसारिक मोह माया का त्याग कर ही संत महापुरुष कठोर से कठोर तपस्या करते हैं। जग ज्योति दरबार में पंच धूनी कठोर अग्नि तपस्या कर रहे महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि संतों द्वारा तप व साधना केवल जन कल्याण के लिए ही की जाती है। सोमवार को भी अग्नि के ढेरों के बीच महंत राजेंद्र पुरी ने श्रद्धालुओं के साथ भजन संकीर्तन किया। उन्होंने कहा कि उनकी अग्नि तपस्या राष्ट्र की सुरक्षा और देश में शांति की कामना के साथ की जा रही है। अग्नि तपस्या उनकी हर वर्ष नियमित मई जून महीने में साधना है। यह साधना देश में शांति और समृद्धि लाने के लिए की जाती है और साथ ही राष्ट्र की सुरक्षा की भी कामना की जाती है। उन्होंने बताया कि लोगों के कल्याण के लिए अग्नि तपस्या शुरू की थी और उनकी तपस्या निरंतर चल रही है। अग्नि तपस्या एक ऐसी साधना है जो साधक को आत्म-नियंत्रण और एकाग्रता बताती है। यह साधना मन से नकारात्मक विचारों को दूर करती है। महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि अग्नि तपस्या दर्शनों के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं को भी शांति और प्रेम के साथ रहने के लिए प्रेरित करती है। अग्नि तपस्या एक शक्तिशाली साधना है जो देश में शांति और समृद्धि लाने में मदद करती है। यह साधना राष्ट्र की सुरक्षा की भी कामना करती है क्योंकि जब देश में शांति होती है, तो राष्ट्र सुरक्षित रहता है। इस अवसर पर रामेश्वर राठी, अजय राठी, विजय राठी, गुरिंदर गिल, अक्षय राठी, जागीर सिंह, पंकज शर्मा, सोमदत कपूर, धर्मेन्द्र शर्मा, रवि शर्मा, गुलशन, अंकित, नंदिनी, स्वर्ण सिंह, अरमान सिंह, हरप्रीत सिंह, विक्रम, आशा, जतिन, परमजीत कौर, कोमल रानी, मनीषा, परमिंदर, नरेश कुमार, शिवांश, पवन कुमार, सुरेश कुमार, पवन दास, कर्म सिंह, रामबीर, रामपाल, सुरेंद्र, मंजीत सिंह, करनैल सिंह, नरेंद्र कुमार, दीपक, टोनी, श्याम लाल, नरेश पाल, रविंदर सिंह, सुरजीत कौर, मनप्रीत सिंह इत्यादि मौजूद रहे।
