नवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र ने कहा कि वनवासी कल्याण आश्रम देशभर में वनवासी समाज के सामाजिक, शैक्षिक, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। संगठन का उद्देश्य वनवासी समाज को सशक्त बनाते हुए उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाना है। वे आज यहां वनवासी समाज के सर्वांगीण विकास एवं सेवा कार्यों को लेकर सेंडपाइपर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे। इस दौरान संगठन के अखिल भारतीय मार्गदर्शक सौम्या ज़ुलु व उत्तर क्षेत्र नगरीय कार्य प्रमुख जयभगवान शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि संगठन द्वारा देश के विभिन्न वनवासी क्षेत्रों में शिक्षा केंद्र, छात्रावास, स्वास्थ्य सेवाएं, संस्कार केंद्र, महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम तथा स्वरोजगार प्रशिक्षण जैसे अनेक सेवा प्रकल्प संचालित किए जा रहे हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से हजारों वनवासी परिवारों को लाभ मिल रहा है। इस अवसर पर संस्था के संरक्षक राजेश अग्रवाल, उपाध्यक्ष हवासिंह, आनन्द गीरि, नरेश गोयल, झम्मन सैनी, महिला जिला प्रमुख संगीता, सह प्रमुख मंजु सैनी, विद्यालय प्रमुख रविन्द्र, युवा प्रमुख यतिन, मनीषा, आरती, पूजा आदि उपस्थित रहे।
सौम्या ज़ुलु ने कहा कि अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम कि स्थापना 1952, जशपुर में 1952 में रमाकांत केशव देशपांडे (बालासाहेब देशपांडे) द्वारा कि गई यह जनजातीय समुदायों (वनवासियों) के उत्थान के लिए कार्यरत सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठनों में से एक है। यह शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, खेल (एकलव्य खेल प्रकल्प), महिला सशक्तिकरण और सांस्कृतिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में 90% से अधिक जनजातीय जिलों में काम करता है। इसका मुख्य उद्देश्य वनवासी समाज का सर्वांगीण विकास और उन्हें उनकी संस्कृति से जोड़कर रखना है। वनवासी कल्याण आश्रम देशभर में 200 से अधिक छात्रावासों (बालक/बालिका) का संचालन करता है, जो शिक्षा के साथ संस्कार प्रदान करते हैं। एकलव्य खेल प्रकल्प’ के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं (विशेषकर तीरंदाजी) को निखारकर राष्ट्रीय स्तर पर अवसर प्रदान करता है। संस्था 16,000 से अधिक स्थानों पर 21,000 से अधिक परियोजनाओं के माध्यम से देश भर में काम कर रही है। यह जनजातीय अधिकारों और उनकी अनूठी संस्कृति-परंपराओं के संरक्षण के लिए काम करता है। वनवासी समाज भारत की समृद्ध संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनके सांस्कृतिक मूल्यों और परंपराओं को संरक्षित रखते हुए उनके विकास के लिए समाज के सभी वर्गों को आगे आना चाहिए। जय भगवान शर्मा ने उत्तर भारत में संगठन द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि आने वाले समय में इन गतिविधियों को और अधिक विस्तार दिया जाएगा तथा युवाओं को भी सेवा कार्यों से जोड़ा जाएगा।
