अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज 12वां दिन है। ईरानी सेना ने पड़ोसी देशों और आस पास मुस्लिमों से अपील की है कि अगर उनके पास अमेरिकी और इजराइली सैनिकों के ठिकानों की जानकारी हो, तो वह ईरान को बताएं।

द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान का कहना है कि इससे सही जगह पर हमला किया जा सकेगा और आम लोगों को नुकसान से बचाया जा सकेगा।

ईरान के सेना प्रवक्ता जनरल अबोलफजल शेखरची ने आरोप लगाया कि इजराइल और अमेरिका महिलाओं, बच्चों और आम लोगों को निशाना बना रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि वे सीधे ईरान की सेना का सामना नहीं कर पा रहे हैं।

इस बीच इस जंग का असर अमेरिकी सेना पर भी पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक अब तक करीब 140 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जबकि 7 सैनिकों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।

ईरान में अब तक 8 हजार घरों पर हमला

ईरान का कहना है कि उसके देश में हुए हमलों में करीब 8000 घरों को नुकसान पहुंचा है और 1300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

संयुक्त राष्ट्र (UN) में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी के मुताबिक देश में करीब 9600 सिविलियन इलाकों को निशाना बनाया गया। इनमें घरों के अलावा बाजार, अस्पताल, मेडिसिन सेंटर्स और स्कूल भी शामिल हैं।

इस बीच ईरान ने यह भी दावा किया है कि उसने इजराइल के कई शहरों पर मिसाइल हमले किए हैं। ईरान के मुताबिक हाइफा, यरुशलम और तेल अवीव को निशाना बनाया गया।

31 मिनट पहले

ईरान जंग से थाईलैंड में लिफ्ट के इस्तेमाल पर रोक

ईरान जंग का असर अब एशिया के कई देशों में दिखाई देने लगा है। तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने के कारण कम से कम 9 एशियाई देशों में ऊर्जा संकट गहराने लगा है। हालात ऐसे हैं कि अलग-अलग देशों को ईंधन बचाने और ऊर्जा संकट से निपटने के लिए सख्त कदम उठाने पड़े हैं।

थाईलैंड ने सरकारी दफ्तरों में लिफ्ट के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है और कर्मचारियों को सीढ़ियों का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कर्मचारियों को सूट-टाई जैसे औपचारिक कपड़े पहनने से भी मना किया गया है, ताकि एयर कंडीशनर के इस्तेमाल को कम किया जा सके।

दूसरी ओर पाकिस्तान में खर्च कम करने के लिए मंत्रियों की सैलरी और विदेश यात्राओं पर रोक लगा दी गई है, साथ ही सरकारी खर्च और ईंधन उपयोग में कटौती के फैसले लिए गए हैं

 

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