रेवाड़ी में गुरु गोविंद सिंह जी के 360 वें प्रकाश उत्सव पर शहर भर में नगर कीर्तन का आयोजन। शहर के रेलवे रोड स्थित गुरुद्वारा श्री सिंह सभा से शुरू होकर मुख्य बाजारों से निकाली गई शोभायात्रा।
:: रेवाड़ी शहर में शनिवार शाम को गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती पर नगर कीर्तन का आयोजन किया गया। यह नगर कीर्तन रेलवे रोड स्थित गुरुद्वारा श्री सिंह सभा से शुरू होकर शहर मुख्य मुख्य मार्गों से होते हुए शहर भर में निकाला गया। इस दौरान गतका पार्टी ने करतब भी दिखाया। गतका पार्टी के करतब को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटी थी। रेवाड़ी में संगत की ओर से नगर कीर्तन किया गया जिसका जगह-जगह पर स्वागत किया गया और प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर गुरुग्रंथ साहिब की पालकी के रास्ते में श्रद्धालु सफाई करते जा रहे थे। संगत द्वारा नगर कीर्तन में गुरु की बाणी का गुणगान किया गया। गुरबाणी का गान करते हुए लोग जा रहे थे। इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल रहीं। नगर कीर्तन रेलवे रोड गुरुद्वारा सिंह सभा से होते हुए गोकल गेट, मेन बाजार, मोती चौक, कटला बाजार, आर्य समाज रोड सर्कुलर रोड होते हुए वापस गुरुद्वारे पर संपन्न हुआ।
शहर के गुरुद्वारा में आज कीर्तन दरबार व इसके बाद दोपहर गुरु का अटूट लंगर भी चलेगा। करतार सिंह ने बताया कि गुरु गोबिंद सिंह सिख धर्म के दसवें गुरु थे। गुरु गोबिंद सिंह जी ने हमेशा अधर्म, अन्याय, अत्याचार के लिए आवाज उठाई और लोगों की रक्षा की थी। 1699 ईस्वी में बैसाखी के दिन पांच प्यारे बनाए थे, जिन्होंने अधर्म के खिलाफ लड़ते हुए अपना बलिदान दिया था। रेवाड़ी में हाल ही में गुरु गोबिंद सिंह जी के 360वें प्रकाशोत्सव के अवसर पर एक भव्य नगर कीर्तन निकाला गया, जिसमें पंज प्यारों, अखाड़ों और गतका पार्टियों ने भाग लिया, और श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। यह आयोजन सिख समुदाय के लिए श्रद्धा और उत्साह का प्रतीक था, जिसमें गुरु गोबिंद सिंह जी के शौर्य और बलिदान को याद किया गया, जैसा कि उनके जीवन और शिक्षाओं से जुड़े संदेशों में मिलता है।
रेवाड़ी में गुरु गोबिंद सिंह जी के 360वें प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य में नगर कीर्तन निकाला गया। इस नगर कीर्तन में पंज प्यारों के साथ गतका पार्टियाँ और विभिन्न अखाड़े शामिल थे। श्रद्धालुओं की भागीदारी: सिख समुदाय और अन्य श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पंज प्यारों का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। यह आयोजन गुरु गोबिंद सिंह जी के त्याग, बलिदान और निडरता जैसे “सवा लाख से एक लड़ाऊं” वाली पंक्तियाँ को समर्पित था। गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती पर शुभकामना संदेश भी प्रसारित हुए। गुरु गोबिंद सिंह जी से जुड़ी कई ऐतिहासिक बातें और उनके पुत्रों के बलिदान (वीर बाल दिवस) को भी याद किया गया। संक्षेप में हम ये कह सकते हैं कि रेवाड़ी में गुरु गोबिंद सिंह जी के मुख्य रूप से उनके प्रकाशोत्सव और संबंधित धार्मिक आयोजन शहर में सिख समुदाय की सक्रियता दर्शाती हैं।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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