पहला पुरस्कार 51 हजार, दूसरा 31 हजार, तीसरा 21 हजार, चौथा 11 हजार

कुरुक्षेत्र: लोक कला सांझी धीरे-धीरे समाप्ति की ओर अग्रसर है। लोककला सांझी को बचाने के लिए विरासत हेरिटेज विलेज व एसोसिएशन ऑफ हरियाणवीज इन ऑस्ट्रेलिया द्वारा विरासत एएचए पांचवा सांझी उत्सव प्रतियोगिता का आयोजन 21 सितंबर से किया जा रहा है। इस प्रतियोगिता में उत्तर भारत से जहां भी सांझी बनाई जाती है किसी भी राज्य की महिला भाग ले सकती है। यह जानकारी विरासत सांझी उत्सव के निदेशक अभिनव पूनिया ने दी।
उन्होंने बताया कि विरासत सांझी उत्सव-2025 प्रतियोगिता में विजेताओं के लिए 1 लाख 71 हजार आठ सौ रूपये के पुरस्कार निर्धारित किए गए हैं। विरासत एएचए सांझी उत्सव-2025 में प्रथम पुरस्कार 51 हजार, दूसरा 31 हजार, तीसरा 21 हजार, चौथा 11 हजार के चार पुरस्कार, पांचवा 51 सौ रूपये के तीन पुरस्कार, छठा पुरस्कार 31 सौ रूपये पांच पुरस्कार, सातवां 21 सौ रूपये के पांच पुरस्कार जबकि आठवां 11 सौ रूपये के पांच पुरस्कार रखे गए हैं।
विरासत सांझी उत्सव के निदेशक अभिनव पूनिया ने बताया कि पिछले वर्षों से सांझी प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए महिलाओं की भागीदारी बढ़ती जा रही है। वर्ष 2021 में सांझी प्रतियोगिता में 100 से अधिक महिलाओं ने भाग लिया था। वहीं, वर्ष 2022 में 120 महिलाओं, वर्ष 2023 में 150 महिलाओं व वर्ष 2024 में 150 से भी अधिक महिलाओं ने भाग ले कर सांझी प्रतियोगिता की शोभा बढ़ाई थी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में चौथे सांझी उत्सव प्रतियोगिता में विश्व की सबसे बड़ी सांझी भी विरासत हेरिटेज विलेज में बनाई गई थी। कार्यक्रम का आयोजन विरासत हेरिटेज विलेज मसाना में किया जा रहा है। सांझी लगाने की प्रक्रिया 21 सितंबर 2025 को अमावस्या के दिन होगीा। इस सांझी उत्सव में भाग लेने वाली सभी महिलाओं एवं कलाकारों को घर से सांझी बनाकर लानी होगी। विरासत में प्रत्येक कलाकार को स्थान उपलब्ध करवाया जायेगा, जिस पर सांझी लगाई जाएगी। इसके बाद निर्णायक मंडल के सदस्य सांझी प्रतियोगिता का मूल्यांकन करेंगे और सभी विजेताओं को पुरस्कार वितरित किये जाएंगे।
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लोककला सांझी को बचाने का प्रयास सराहनीय: सेवा सिंह

ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में रहने वाले एनआरआई सेवा सिंह ने कहा कि विरासत द्वारा हरियाणा की लोक कला व संस्कृति को सहेजने के यह प्रयास काफी सराहनीय हैं। एसोसिएशन ऑफ हरियाणवीज इन ऑस्ट्रेलिया के प्रधान सेवा सिंह ने बताया कि उनकी एसोसिएशन ऑस्ट्रेलिया में रहकर भी हरियाणा की लोककला व संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए पिछले कई वर्षों से प्रयास कर रहे हैं। हरियाणावासियों व सामाजिक संगठनों को लोक कला सांझी को बचाने के लिए आगे आ कर इसमें अपना योगदान देना चाहिए। लोककला सांझी हरियाणा की पारंपरिक धरोहर है, जो धीरे-धीरे गांवों से लुप्त होती जा रही है। उन्होंने बताया कि विरासत हेरिटेज विलेज पिछले पांच वर्षों से इस कला को बचाने और इसके संरक्षण के लिए लगातार प्रयासरत है। सांझी केवल एक कला नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपराओं का प्रतिबिंब है। सभी समाज के लोगों को आगे बढक़र इस लोककला को संरक्षित करने में योगदान देना चाहिए, ताकि इसका महत्व भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लोगों तक पहुंच सके। उन्होंने जानकारी दी कि सांझी उत्सव 2025 के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उन्होंने महिलाओं से आह्वान किया कि वे लुप्त होती इस लोककला को बचाने के लिए भागीदारी निभाएं और आने वाली पीढिय़ों के लिए इसे संजो कर रखें।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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