-जल नेति, त्राटक क्रिया और कुंजल क्रिया का कराएंगे अभ्यास

कुरुक्षेत्र, 29 अगस्त। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के योग विभाग की ओर से 3 और 4 सितंबर को षट्कर्म अभ्यास कार्यशाला आयोजित की जाएगी। यह कार्यशाला सुबह 7 से 10 बजे तक विश्वविद्यालय के प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में होगी। दो दिवसीय कार्यशाला में अनुभवी वैद्य प्रतिभागियों को जल नेति, त्राटक क्रिया और कुंजल क्रिया का अभ्यास कराएंगे। इन योग क्रियाओं के माध्यम से शरीर की शुद्धि, मानसिक एकाग्रता और पाचन तंत्र की मजबूती को बढ़ावा मिलेगा।

योग विभाग की चेयरपर्सन प्रो. शीतल सिंगला ने कहा कि कुलपति प्रो.वैद्य करतार सिंह धीमान के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को योग की प्राचीन और प्रभावशाली क्रियाओं का अभ्यास कराया जाएगा। उन्होंने प्रतिभागियों को सलाह दी है कि कार्यशाला से एक दिन पहले हल्का भोजन करें, सुबह खाली पेट आएं और तौलिया साथ लेकर पहुंचें।

प्रो. सिंगला ने कहा कि  आज की भागदौड़ और तनावपूर्ण जीवन शैली में योग की ऐसी प्राकृतिक क्रियाओं का अभ्यास बेहद जरूरी हो गया है। नियमित अभ्यास से न केवल रोगों से बचाव होता है, बल्कि जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। जल नेति से श्वसन तंत्र शुद्ध होता है, त्राटक क्रिया से स्मरण शक्ति और दृष्टि शक्ति में वृद्धि होती है तथा कुंजल क्रिया से पाचन संबंधी रोगों में लाभ मिलता है। षट्कर्म योग की प्राचीन विधियां शरीर और मन दोनों की शुद्धि करती हैं। नियमित अभ्यास न केवल रोगों से बचाव करता है, बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाता है।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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