पानीपत। ट्रंप के पचास प्रतिशत टैरिफ का असर मंगलवार से अंबाला की साइंस इंडस्ट्री और पानीपत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर पड़ने लगा है। पानीपत से अमेरिका में 12 हजार करोड़ का निर्यात होता है। क्रिसमिस सीजन पर 1,500 करोड़ का निर्यात होता है। ऐसे में अमेरिकी ग्राहक उद्यमियों से छूट मांग रहे हैं।

लगभग 30 प्रतिशत आर्डर अटक गए हैं। उद्यमी बोले- अब बड़ा नुकसान होना तय है, नई मंडी तलाशनी होगी। वहीं, अंबाला में करीब चार मिलियन डालर का साइंस उपरकणों का एक्सपोर्ट अमेरिका के कई हिस्सों में होता है, इससे कई ऑर्डर रद हो गए हैं। 1500 करोड़ के आर्डर तैयार, आनाकानी कर रहे पानीपत के उद्यमी लगभग 1500 करोड़ के क्रिसमिस के आर्डर तैयार करके बैठे हैं।

अब अमेरिकन इनको लेने में आनाकानी कर रहे हैं। इस सीजन में अमेरिका में सबसे अधिक कुशन कवर, बाथमैट, तौलिये, सोफे कवर, परदे व दरियां जाती है। अब अमेरिका से आर्डर मिलने की संभावना न के बराबर है। अमेरिकन इन आर्डर को बांग्लादेश, पाकिस्तान व वियतनाम में शिफ्ट कर सकते हैं।

निर्यातक अब यूरोप और दक्षिण अमेरिका की ओर उम्मीद लगाए बैठे हैं। चीन अब बांग्लादेश में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। वहां कार्यालय खोल रहा है क्योंकि बांग्लादेश पर महज 19 प्रतिशत टैरिफ है। सिंगापुर पर भी अमेरिका ने टैरिफ नहीं लगाया।

वहां भी माफिया अपने दफ्तर खोलकर अमेरिका में माल भेजेंगे। टैरिफ के साथ-साथ चीन से भी प्रतिस्पर्धा अंबाला की साइंस इंडस्ट्री को अब टैरिफ के साथ-साथ चीन से भी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।

चीन के साइंस उपकरण सस्ते हैं। अंबाला में लगभग 40 निर्यातक हैं। टैरिफ बढ़ने से छोटे कारोबारियों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। निर्यातक यह तय करने में लगे हैं वे पुराने रेट पर एडजस्ट करेंगे या फिर नए बढ़े दामों को स्वीकार करेंगे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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