भिवानी। बिजली निगम की यह कैसी कार्यप्रणाली है। सात साल से एवरेज बिल थमाते रहे और अब अचानक 64 हजार 529 रुपये का बिजली बिल थमा दिया। अब कहा जा रहा है कि मीटर रीडिंग लेने वाले की लापरवाही है। वह एवरेज आधार पर बिल देता रहा। रीडिंग आधार पर बिल दिया गया है तो अब यह भरना होगा।

यह मामला सेक्टर 13 का है। सेक्टर में बुटिक संचालक पूनम बताती हैं कि मुस्कान बुटिक के नाम से मेरा बुटिक है। हमने यह दुकान वर्ष 2018 में किराए पर ली थी। हमने जो बिल आए सब भरे हैं। हमने अब तक कोई बिल बकाया नहीं रखा। हर बार बिल जमा कराया है।

इस बार हमारा बिल 64 हजार 529 रुपये का दिया गया है। जब हमने बिजली निगम कार्यालय में पता किया तो बताया गया कि आपके मीटर में जो रीडिंग हैं उसके आधार पर बिल दिया गया है। हम निगम से यह पूछना चाहते हैं कि जब हमारा मीटर चल रहा था, मीटर बिल्कुल ठीक था तो हमें एवरेज बिल क्यों दिया गया।

हम तो नियमित रूप से बिल जमा करते रहे हैं। रीडिंग आधार पर बिल नहीं देना तो निगम या उनके कर्मचारियों की लापरवाही है। इसका दंड उपभोक्ता पर क्यों डाला जाए। जो कर्मचारी जिम्मेदार है उससे यह बिल लिया जाए। गलती तो बिजली निगम का जो भी कर्मचारी रीडिंग लेने आता था उसकी रही है। उपभोक्ता ने तो जो बिल आया वह जमा कर दिया। पूनम ने बिजली निगम अधिकारियों से गुहार लगाई है कि उनको जो इतना भारी भरकम बिल थमाया है उसे वह नहीं भर सकते। हमारा छोटा सा बुटिक है। हमें राहत दी जाए।

‘बिल गलत आने की आ रही शिकायतें, समाधान कीजिये साहब’

बिजली निगम में एकाएक ज्यादा बिल आने की अनेक शिकायतें आ रही हैं। एडवोकेट सूरज चंद अग्रवाल ने बताया कि बिल गलत आना या अचानक से ज्यादा बिल थमा देना जैसी लापरवाही देखने को मिल रही हैं। इससे उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों से जूझना पड़ रहा है।

बिजली निगम पर इस पर ध्यान दे और खुद की गलती उपभोक्ताओं पर न थोपे। जब गलती निगम कर्मचारी या रीडिंग लेने वाले की है तो इस गलती की सजा उपभोक्ता को देने का औचित्य नहीं बनता। हम निगम अधिकारियों से मांग करते हैं कि ऐसे लापरवाह कर्मग्चारियों से वसूली की जाए और उपभोक्ता को जो मानसिक परेशानी दी गई है उसका मुआवजा भी दिया जाए।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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