चंडीगढ़। चौतरफा विरोध के बाद हरियाणा सरकार ने भाजपा के राज्यसभा सदस्य सुभाष बराला के बेटे विकास बराला को असिस्टेंट एडवोकेट जनरल पद से अलग कर दिया है। हालांकि विकास बराला ने अपनी नियुक्ति के आदेश जारी होने के बाद अभी तक कार्यभार नहीं संभाला था, जिस कारण उन्हें हटाने के आदेश अतिरिक्त रूप से जारी करने की जरूरत नहीं समझी गई है।
गृह एवं न्याय विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुमिता मिश्रा की ओर से 18 जुलाई को जारी हुई सूची में विकास बराला का नाम था। विकास की नियुक्ति का चौतरफा विरोध चल रहा था, जिसके चलते उन्होंने इस पद पर ज्वाइन नहीं किया।

उनकी नियुक्ति के विरोध के बाद हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा का बयान सामने आया था कि विकास बराला अगर नेता का बेटा है तो क्या उसे सात समंदर पार भेज दें। किसी नेता के बेटे को भी पढ़ने, लिखने और रोजगार प्राप्त करने का अधिकार है।

विकास पर कोई आरोप अभी तक साबित नहीं हुआ है। महिपाल ढांडा के इस बयान के बाद कई रिटायर्ड आइएएस अधिकारियों ने विकास बराला की नियुक्ति का विरोध किया था।  हरियाणा सरकार की तरफ से हाल ही में 97 कानून अधिकारियों की नियुक्तियां की गई थीं, जिसमें विकास बराला को हरियाणा सरकार ने दिल्ली स्थित एडवोकेट जनरल कार्यालय में सहायक महाधिवक्ता नियुक्त किया था।

विकास बराला 2017 में एक बहुचर्चित मामले में आरोपित हैं। विकास बराला पर हरियाणा के वरिष्ठ आइएएस अधिकारी की बेटी का पीछा करने और परेशान करने के आरोप में एफआइआर दर्ज की गई थी। यह मामला अभी भी चंडीगढ़ की अदालत में विचाराधीन है। विकास की नियुक्ति की सिफारिश हाई कोर्ट के दो सेवानिवृत जजों की समिति ने की थी।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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