चंडीगढ़। कांग्रेस महासचिव और सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आरोप लगाया है कि प्रदेश सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले 70 प्रतिशत आबादी को गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) दिखाया था। सत्ता मिलते ही उसी सूची से 18 लाख नाम हटा दिए गए हैं। पिछले तीन महीने में ही छह लाख 36 हजार 136 गरीबों के नाम बीपीएल की लिस्ट से काट दिए गए हैं।

सुरजेवाला ने कहा कि जिन परिवारों की वार्षिक आय एक लाख 80 हजार रुपये से कम है, उन्हें भौतिक सत्यापन के नाम पर बीपीएल सूची से बाहर किया जा रहा है। यह सरकारी योजनाओं से गरीबों को बाहर निकालकर खर्च बचाने की कोशिश है।

वास्तविकता यह है कि पीपीपी डेटाबेस में हेराफेरी हुई है। 12 हजार से अधिक दंपतियों ने नकली तलाक के दस्तावेज जमा किए ताकि आइडी और आय के रिकार्ड बांटे जा सकें। झज्जर में सिटिजन रिसोर्स इंफार्मेशन डिपार्टमेंट के अधिकारी आपराधिक मामलों में घिरे हुए हैं।

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि आवश्यक वस्तुओं पर सब्सिडी घटा दी गई है। पीडीएस के तहत 40 रुपये में मिलने वाला दो लीटर सरसों तेल अब 100 रुपये कर दिया गया है। इसका सीधा बोझ गरीबों पर पड़ा है। आल राशन डिपो होल्डर वेलफेयर एसोसिएशन ने भी पीडीएस मूल्यवृद्धि को अन्यायपूर्ण बताया है। उपभोक्ता और डिपो संचालक दोनों खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की गरीब विरोधी नीति से सिर्फ भ्रष्टाचार बढ़ रहा है, जनता नहीं। भाजपा का माडल उत्थान का नहीं, शोषण का है। गरीबी को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया जाता है। सत्ता मिलते ही लाभ छीन लिए जाते हैं। सरकार गरीबों और वंचितों के साथ निर्मम विश्वासघात करना बंद करे। गरीबों को उनके अधिकार व हक सौंपे जाएं

By Dr. Rajesh Wadhwa

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