अंबाला। आप भले ही महज 50 रुपये का टिकट खरीद सफर कर रहे हैं और ट्रेन की चेन किसी कारण खींच दी जाती है तो आप रेलवे को सीधा 10 हजार रुपये का फटका लगा रहे हैं। चेनपुलिंग के बढ़ते आंकड़ों को देखकर रेल अधिकारी चिंतित हैं, क्योंकि सिर्फ रेलवे केखजाने पर चपत नहीं लग रही बल्कि ट्रेन की स्पीड बढ़ाने में समय बर्बाद होता है।

ऐसे में अब रेलवे यात्रियों को जागरूकता के साथ कड़ा कदम उठाने जा रहा है ताकि लोगों को पता चले कि एक बार चेन खींचने से किस तरह नुकसान होता है। हालांकि चेन खींचना रेलवे एक्ट का उल्लंघन माना जाता है और उसका बाकायदा मुकदमा भी दर्ज होता है।

अधिकांश मामलों में पता ही नहीं चल पाता कि चेन किसने खींची। एक साल के आंकड़ों पर गौर करें तो 1968 लोगों के खिलाफ केस दर्ज हो चुका है। इन लोगों से जुर्माने के तौर पर वसूली भी हुई है। हालांकि यह वसूली रेलवे के नुकसान की भरपाई नहीं कर पा रहा है लेकिन सजा के तौर पर यह लिया जा रहा है।

ऐसे होता है नुकसान

130 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से ट्रेनें दौड़ रही हैं। हालांकि इनकी औसत करीब 110 किमी प्रतिघंटा ही आती है। इस बीच चलती ट्रेन की यदि कोई चेन खींच देता है तो ट्रेन रुकने और फिर चलने के बीच करीब 10 हजार रुपये का रेलवे का नुकसान होता है।

अधिकांश मामलों में आपातकालीन स्थिति नहीं पाई जाती बल्कि मामूली कारणों से भी चेन खींच दी जाती है। ट्रेन को फिर से चलाने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है, जिसमें पांच से सात मिनट का समय खराब होता है।

यही कारण है कि रेलवे किसी स्टेशन पर ठहराव करने से पहले आकलन करता है कि कितने यात्री इस स्टेशन से आवाजाही करते हैं। पिछले दिनों देश भर में हजारों ठहरावों को बंद कर दिया गया, क्योंकि इसके पीछे रेलवे की आमदनी पर भी असर पड़ रहा था।

इन सेक्शनों पर बढ़ रहे मामले

अंबाला से लुधियाना की बात करें तो पिछले छह माह में 179 मामले सामने आ चुके हैं। इसी तरह अंबाला से सहारनपुर के बीच 187, अंबाला से चंडीगढ़ में 133, राजपुरा बठिंडा में 124 मामले सामने आए हैं।

यदि एक जनवरी 2024 से 30 जून 2024 तक देखें तो अंबाला मंडल में 902 केस सामने आए हैं। इसी अवधि में एक जनवरी 2025 से 30 जून 2025 तक मामले बढ़ कर 1066 हो गए हैं। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने 1143 लोगों को गिरफ्तार भी किया है, जिनसे पांच लाख से अधिक का जुर्माना भी वसूल किया गया है।

एक घंटे में एक लाख का नुकसान

चेन पुलिंग के मामले सिर्फ अंबाला मंडल में ही नहीं बल्कि देश भर में बढ़ रहे हैं। रेलवे ने इसको लेकर नुकसान का आकलन भी किया है। एक घंटा यदि इलेक्ट्रिक ट्रेन रुकती है तो करीब एक लाख रुपये का नुकसान होता है।

यानी कि यदि किसी सेक्शन पर यह ट्रेन 15-15 मिनट के लिए भी चार बार रुकती है, तो एक लाख का नुकसान हो रहा है। इसके अलावा अन्य कारणों से मालगाड़ी के रुकने पर भी एक घंटे में करीब 73 हजार का नुकसान होता है। रेलवे इसे लेकर जागरूकता अभियान चलाने जा रहा है।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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