चंडीगढ़। हरियाणा में ग्रुप-सी के पदों के लिए प्रस्तावित कामन एलिजिबिलिटी टेस्ट (सीईटी) में जाति प्रमाण पत्र समय पर नहीं बन पाने के कारण सामान्य श्रेणी में आवेदन करने वाले वाले अभ्यर्थियों को राहत मिल गई है। हाई कोर्ट में सरकार ने यह आश्वासन दिया कि परिणाम घोषित होने से पहले अभ्यर्थियों को प्रमाण पत्र अपलोड करने का मौका मिलेगा। सरकार ने स्पष्ट किया कि इसका लाभ केवल उन अभ्यर्थियों को ही मिलेगा, जिन्होंने आवेदन की अंतिम तिथि से पहले सरल पोर्टल पर जाति प्रमाण पत्र अप्लाई किया था।

सुनवाई के दौरान कुछ अभ्यर्थियों ने दलील दी कि रजिस्ट्रेशन के लिए निर्धारित समय बेहद सीमित था और इस दौरान अनेक तकनीकी दिक्कतें सामने आईं। उन्होंने पोर्टल पर आवेदन करना चाहा तो हर बार ओटीपी देर से आने के कारण वह प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकी। अभ्यर्थियों ने मांग की है कि जिन अभ्यर्थियों को तकनीकी बाधाओं के कारण आवेदन का मौका नहीं मिल सका, उनके लिए पोर्टल दोबारा खोला जाए ताकि वे परीक्षा में भाग लेने से वंचित न रह जाएं।
हाई कोर्ट ने ओटीपी देर से आने या न आने की मांग के आधार पर पोर्टल खोलने की मांग को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब लाखों अभ्यर्थियों के आवेदन हो सकते हैं तो उनका आवेदन क्यों नहीं हो पाया। इसके साथ ही कोर्ट ने हरियाणा सरकार व कर्मचारी चयन आयोग को पांच सितंबर के लिए नोटिस जारी कर जवाब दायर करने का आदेश दिया है।

इस मामले में याचिकाकर्ता के वकील चरणजीत कुश ने कोर्ट में दलील दी कि 2022 की सीईटी प्रक्रिया में पंजीकरण के लिए एक वर्ष से अधिक का समय दिया गया था, जबकि इस बार केवल 15 दिन का ही अवसर मिला है, जो न्यायसंगत नहीं है।

इसी तरह, एक अन्य याचिकाकर्ता ने परीक्षा में नार्मलाइजेशन प्रक्रिया को चुनौती दी है। उनका कहना है कि जब परीक्षा एक से अधिक शिफ्टों में कराई जाती है, तो सभी परीक्षार्थियों को एक जैसी कठिनाई नहीं मिलती। इसलिए, यह सुनिश्चित किया जाए कि सीईटी परीक्षा केवल एक ही शिफ्ट में कराई जाए, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर मेडिकल साइंसेज की परीक्षा के मामले में हुआ है।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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