अपनी मांगों को लेकर करनाल में गरजी भाकियू, कड़े आंदोलन की दी चेतावनी
10 अप्रैल को करनाल किसान भवन में होगी संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक
नारेबाजी कर सरकार को कोसा, राष्ट्रपति व पंजाब के राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन
करनाल 28 मार्च। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर करनाल में भारतीय किसान यूनियन ने पंजाब के किसानों के समर्थन में पुलिस दमन रोकने तथा मुक्त व्यापार समझौतों पर रोक लगाने व अन्य मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। किसानों ने सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए रोष जताया। इसके बाद किसानों ने रोष प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रपति व पंजाब के राज्यपाल के नाम करनाल के नायब तहसीलदार को सौंपा। शुक्रवार को भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले किसान भवन में एकत्रित हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाकियू जिला प्रधान सुरेन्द्र घुम्मन ने की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से पंजाब सरकार केंद्र सरकार के साथ मिलकर किसानों की जायज मांगों के लिए चल रहे संघर्ष के खिलाफ पुलिस के जरिए दमन अभियान चला रही है। यद्यपि देश के संविधान के अनुसार देश के नागरिकों को अपनी जायज मांगों के लिए संघर्ष करने का मौलिक लोकतांत्रिक अधिकार प्राप्त है। लेकिन पिछले दिनों संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा चंडीगढ़ में 5 मार्च से किए जाने वाले सात दिवसीय धरने को तारपीडो कर पूरे प्रदेश को खुली जेल में तब्दील कर दिया गया। 19 मार्च को केंद्र सरकार के मंत्रियों से बातचीत कर लौट रहे किसान नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। शंभू और खनौरी में बुलडोजर चलाकर किसानों के धरनास्थलों को जबरन उठा दिया गया। ट्रैक्टर ट्रॉलियों सहित किसानों के उपकरण तोड़ दिए गए। बड़े पैमाने पर सामान चोरी होने की खबरें आ रही हैं। राज्य में पुलिस राज्य स्थापित कर जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचला जा रहा है। कर्नल पुष्पिंदर सिंह बाठ के खिलाफ पुलिस की बर्बरता और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद लोगों के घरों को बुलडोजर से ध्वस्त करना इसके ज्वलंत उदाहरण हैं। दूसरी ओर, केंद्र सरकार अमेरिका, यूरोपीय संघ और न्यूजीलैंड के साथ मुक्त व्यापार समझौतों पर बातचीत कर रही है। ये समझौते देश के राष्ट्रीय हितों के लिए हानिकारक साबित होंगे। सरकार लंबे समय से किसानों की अनदेखी करती आ रही है। सरकार को चाहिए कि तुरंत किसानों की मांगों को पूरा करे।

यह हैं मांगें
किसानों की मांग है कि पुलिस द्वारा किया जा रहा अंधाधुंध बल प्रयोग बंद किया जाए तथा जनता के संघर्ष के लोकतांत्रिक अधिकार को बहाल किया जाए। गिरफ्तार या जेल में बंद सभी किसानों को  बिना शर्त रिहा किया जाए। किसानों के ट्रैक्टर-ट्रॉलियों सहित सभी उपकरण वापस किये जाए। क्षतिग्रस्त या चोरी हुए सामान की भरपाई पंजाब सरकार द्वारा की जानी चाहिए। अमेरिका सहित अन्य देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों के लिए चल रही बातचीत जो राष्ट्रीय हितों के विरुद्ध है, रोकी जानी चाहिए। राज्य सरकारें और विधानसभा एनपीएफएम को खारिज करे और प्रस्ताव पारित करे कि वे इसे लागू नहीं करेंगी। सभी फसलों के लिए सी-2+50 फीसदी पर एमएसपी घोषित कर खरीद की गारंटी दी जाए। किसानों और मजदूरों का संपूर्ण कर्ज मुक्त किया जाए। कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली दरों में वृद्धि और स्मार्ट मीटर लगाने की योजना वापस ली जाए तथा टयूबवैल के लिए मुफ्त बिजली और घरेलू व दुकानों के लिए 300 यूनिट निशुल्क बिजली प्रदान की जाए।

10 अप्रैल को एसकेएम हरियाणा की होगी बैठक
आने वाली 10 अप्रैल को करनाल स्थित दीनबंधु सर छोटूराम किसान भवन में संयुक्त किसान मोर्चा हरियाणा की बैठक होगी। जिसमें आगामी आंदोलन के बारे में रणनीति बनाई जाएगी। इस बैठक में प्रदेश के 16 सक्रिय किसान संगठनों के दो-दो प्रतिनिधि भाग लेंगे।

ये रहे मौजूद
इस अवसर पर किसान नेता सेवा सिंह आर्य, श्याम सिंह मान, यशपाल राणा, महताब कादियान, प्रेम मोहड़ी, राजिन्द्र, सुच्चा सिंह, सुरेंद्र सांगवान, सुरेंद्र बैनीवाल, दिलावर डबकोली, राजकुमार, साहब सिंह बाजवा, नेकी राम, नाजिम, बाबू राम, जोगिंद्र बस्तली, सतबीर, रणबीर, ईश्वर, जयपाल शर्मा व महिन्द्र सहित अन्य किसान मौजूद रहे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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