हिन्दू-सिक्ख एकता के प्रतीक चैत्र चौदस मेले में सभी का हार्दिक स्वागत: कपिल कुमार
चेत्र चौदस मेले के शुभारंभ की सबको बधाई, सभी व्यवस्थाओं से पूर्ण मेले में नहीं आएगी किसी श्रद्धालुओं को कोई पेरशानी, सूचना प्रसारण केंद्र निभाएगा अहम भूमिका, विधिवत रूप से किया गया चैत्र चौदस मेले का उदघाटन
पिहोवा 27 मार्च मेला प्रशासक एवं उपमंडल अधिकारी नागरिक कपिल कुमार ने कहा कि उपमंडल पिहोवा में वीरवार 27 मार्च को चैत्र चौदस मेले का शुभारंभ हो चुका है, जोकि 29 मार्च 2025 तक चलेगा। एसडीएम ने चेत्र चौदस मेले के शुभारंभ पर बधाई देते हुए कहा कि चैत्र चौदस मेला हिंदु-सिक्ख एकता का प्रतीक है, जिसमें देश भर से लोग अमावस के अवसर पर स्नान करते हैं तथा अपने पित्रों की आत्मा का शांति के पिंडदान व पूजा-पाठ करवाते हैं। एसडीएम ने कहा कि चैत्र चौदस मेले के पहले दिन भारी संख्या में लोग मेले में पहुंच रहे हैं तथा आगामी दो दिनों में लगभग पांच लाख से भी अधिक लोगों की मेले में पहुंचने की संभावना हैै।
एसडीएम कपिल कुमार ने वीरवार को बाल भवन में बने सूचना प्रसारण केंद्र में चेत्र चौदस मेले का विधिवत रूप से उदघाटन किया। उन्होंने कहा कि विश्व विख्यात चैत्र चौदस मेले का धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्व है। कुरुक्षेत्र की परीधि में पडऩे वाले तीर्थों में सर्वाधिक महत्व पृथुदक तीर्थ का माना गया है। वामण पुराण के अनुसार वेन के पुत्र पृथु के नाम से इस तीर्थ का नाम पृथुदक हुआ। राजा वेन धर्म से विमुख हो गया था, जिस कारण ऋषियों ने उसे श्राप देकर मार दिया था। फिर उसके शरीर का मंथन किया गया, जिससे भगवान विष्णु के नौंवे अंश पृथु पैदा हुए। राजा पृथु ने जिस स्थान पर अपने पितरों को उदक यानि जल दिया, वह स्थान पृथु-उदक यानि पृथुदक नाम से प्रसिद्ध हुआ। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस तीर्थ में स्नान का अति महत्व माना गया है। यहां स्नान करने से सारे पाप नष्टï हो जाते है तथा व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ की फल की प्राप्ति के साथ-साथ स्वर्गलोक भी प्राप्त हो जाता है।
एसडीएम कपिल कुमार ने कहा कि चैत्र-चौदस मेला देश के सभी लोगों का मेला है। इस अवसर पर देश के कोने-कोने से लाखों की संख्या में श्रद्धालु मेले में आते हैं तथा परपंरागत तरीके से अमावस के समय स्नान करते हैं। चैत्र चौदस मेले के साथ लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के लिए मेला प्रशासन द्वारा सभी प्रकार की व्यवस्थाएं की जा चुकी हैं। मेले में आने वाले लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए डयुटी मैजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी कैमरों द्वारा हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही  है। इसके अतिरिक्त भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। चैत्र चौदस मेले के अवसर पर सूचना प्रसारण केंद्र की स्थापना की गई है, जो समय-समय पर घोषणाओं के माध्यम से सरकार की जन कल्याणकारी नीतियों व उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाते हैं। इसके अतिरिक्त गुमशुदा लोगों को अपने प्रियजनों से मिलवाने का कार्य भी सूचना प्रसारण केंद्र के माध्यम से किया जाता है।
चैत्र चौदस मेले के उदघाटन उपरांत नगरपालिका प्रधान आशीष चक्रपाणि ने कहा कि पुराणों के अनुसार पॉंडवों के बड़े भाई युधिष्ठिर ने महाभारत के युद्ध में मारे गए अपने सगे संबंधियों का यहीं पर पिंड दान करवाया था। भगवान श्री कृष्ण और शिव ने भी यहां सरस्वती तीर्थ में स्नान किया। श्री गुरु नानक देव जी और श्री गुरु गोबिंद सिंह जी भी यहां पधारे थे। महाराजा रणजीत सिंह इसी पावन तीर्थ पर अपनी माता का पिंडदान करवाने आए थे। इस पावन तीर्थ पर पूरा वर्ष श्रद्धालु पिंडदान व स्नान करने के लिए आते रहते हैं, लेकिन चैत्र चौदस को यहा स्नान करने का विशेष महत्व है। चैत्र चौदस मेले में श्रद्धालुओं का लगभग 80 प्रतिशत वर्ग सिक्ख समुदाय से आता है। इसलिए इस मेले को हिन्दू-सिक्ख एकता के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। इस मौके पर डीएसपी निर्मल सिंह, तहसीलदार विनती, नगरपालिका सचिव मोहन लाल, मार्केट कमेटी सचिव चंद्र सिंह, केडीबी सदस्य युधिष्ठिर बहल, उमाकांत शास्त्री, सभी पत्रकार एवं छायाकार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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