जीएमएन कॉलेज के अंग्रेजी, हिंदी, पंजाबी, और संस्कृत विभागों ने आई.के एस क्लब और  लैंग्वेज लैब के सहयोग से ‘साहित्य, संस्कृति और समाज’ विषय पर एक दिवसीय ऑनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। यह कार्यक्रम कॉलेज के सेमिनार हॉल में संपन्न हुआ, जिसमें प्रमुख वक्ताओं ने साहित्य के समाज और संस्कृति पर प्रभाव पर विस्तृत चर्चा की। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के तौर पर डॉ. अरोमा खारशिंग, असिस्टेंट प्रोफेसर डिपार्टमेंट ऑफ़ इंग्लिश लिटरेचर इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेज यूनिवर्सिटी ,रीजनल कैंपस शिलोंग ,एवं डॉ. जंग बहादुर पांडेय रांची विश्वविद्यालय के भाषाओं के डीन मौजूद रहे।
कॉलेज के प्राचार्य, डॉ. रोहित दत्त ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, “इस प्रकार की संगोष्ठियाँ हमारे छात्रों को हमारी संस्कृति और समाज के बारे में जानने में मदद करती हैं। साहित्य समाज का दर्पण है, और यह हमारे समाज की समझ को गहरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।”
संगोष्ठी के दौरान, वक्ताओं ने साहित्य, संस्कृति और समाज के बीच गहरे संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि साहित्य समाज का दर्पण है, जो समय-समय पर सामाजिक परिवर्तनों, सांस्कृतिक मूल्यों और मान्यताओं को प्रतिबिंबित करता है।
डॉ अरोमा ने अपने संबोधन में कहा, “साहित्य समाज की आत्मा है, जो उसकी संस्कृति और परंपराओं को संजोए रखता है।”
डॉ जंग बहादुर पांडेय ने कहा, “ज्ञान मानव समाज की सर्वोत्तम उपलब्धि है। बिना ज्ञान के मनुष्य का अस्तित्व शून्य है।” संगोष्ठी में मंच संचालन डॉ अमित कुमार एवं डॉ रितु गुप्ता ने किया ।अंग्रेजी विभाग की प्राध्यापिका कमलेश कुमारी एवं हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ रितु गुप्ता इस कार्यक्रम की संयोजिका रही तो वही संगोष्ठी के आयोजन में डॉ. अमित कुमार, डॉ ज्योति सौरोत, डॉ. अनीश, डॉ राजेंद्र देशवाल ,डॉ अंशु चौधरी, डॉ नीना, डॉ जसवीर कौर, डॉ प्रबलीन कौर,  प्रियंका बाल्दिया,महक तलवार रही।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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