अम्बाला, 02 फरवरी
हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद् द्वारा रविवार को लघु बाल भवन अम्बाला छावनी में बंसत पंचमी  समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद् की उपाध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री हरियाणा श्री नायब सिंह सैनी की धर्मपत्नी सुमन सैनी ने बतौर मुख्यअतिथि शिरकत की व दीपशिखा प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। यहां पहुंचने पर हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद् की मानद महासचिव सुषमा गुप्ता, नगराधीश पूजा कुमारी, जिला बाल कल्याण अधिकारी विश्वास मलिक, महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष बीनू गर्ग व अन्य ने मुख्यअतिथि को पुष्पगुच्छ देकर उनका अभिनन्नदन किया। इस मौके पर उपाध्यक्ष सुमन सैनी ने बाल भवन में कम्पयूटर सैन्टर, सिलाई-कढाई व ओपन शैल्टर होम का अवलोकन करते हुए यहां पर जो गतिविधियां की जा रही है उसकी भी जानकारी हासिल की। इस मौके पर उन्होंने सिलाई-कढाई केन्द्र में आर्ट एण्ड कर्फट से बनाए गए सामान की जमकर सराहना भी की। इस अवसर पर एक बच्ची ने उपाध्यक्ष सुमन सैनी को मेहन्दी भी लगाई।
हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद् की उपाध्यक्ष सुमन सैनी ने बसंत पंचमी त्योहार की पूरे प्रदेश वासियों को बधाई देते हुए कहा कि आज हम बसंत पंचमी का त्योहार मनाने के लिए एकत्रित हुए हैं। यह दिन खासतौर पर बसंत ऋतु के आने और देवी सरस्वती की पूजा का होता है। इस दिन विद्या, ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती की पूजा का विशेष महत्व है। बसंत पंचमी का त्यौहार भारत के अलग अलग हिस्सों में अलग अलग तरीकों से मनाया जाता है। यह त्यौहार बसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है। बसंत पंचमी का त्यौहार पुराने समय से मनाया जा रहा है। यह त्यौहार बसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है, जब प्रकृति अपने सबसे सुंदर रूप में खिलती है।
बसंत पंचमी को वसंत ऋतु के आगमन के रूप में भी मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन से ठंड का मौसम खत्म होने लगता है और मौसम में बदलाव आता है। खेतों में सरसों के पीले फूल खिलते हैं, जो वसंत पंचमी के पीले रंग को दर्शाते हैं। लोग इस दिन पीले कपड़े पहनते हैं और पीले रंग के पकवान जैसे खिचड़ी और हलवा बनाते हैं।
प्राचीन भारत और नेपाल में पूरे साल को जिन छह ऋतुओं में बाँटा जाता था उनमें बसंत ऋतु लोगों का सबसे मनचाहा मौसम था, जब फूलों पर बहार आ जाती, खेतों में सरसों का फूल मानो सोना चमकने लगता है, जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने लगतीं, आमो के पेड़ों पर मांजर (बूर) आ जाता और हर तरफ रंग बिरंगी तितलियाँ मँडराने लगती, वसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पाँचवे दिन एक बड़ा उत्सव मनाया जाता था जिसमें भगवान विष्णु और कामदेव की पूजा होती हैं। यह वसंत पंचमी का त्यौहार कहलाता था। वसंत ऋतु आते ही प्रकृति का कण कण खिल उठता है। मानव तो क्या पशु पक्षी तक उल्लास से भर जाते हैं। हर दिन नयी उमंग से सूर्योदय होता है और नयी चेतना प्रदान कर अगले दिन फिर आने का आश्वासन देकर चला जाता है।
इसके साथ ही यह पर्व हमें अतीत की अनेक प्रेरक घटनाओं की भी याद दिलाता है। सर्वप्रथम तो यह हमें त्रेता युग से जोड़ती है। रावण द्वारा सीता के हरण के बाद श्रीराम उनकी खोज में दक्षिण की ओर बढ़े। इसमें जिन स्थानों पर वे गये, उनमें दण्डकारण्य भी था। यहीं शबरी नामक भीलनी रहती थी। आज ही के दिन श्रीराम जी उसकी कुटिया में पधारे, तो वह सुध-बुध खो बैठी और चख चखकर मीठे बेर राम जी को खिलाने लगी।
दंडकारण्य का वह क्षेत्र में वसंत पंचमी के दिन ही रामचंद्र जी वहां आये थे। उस क्षेत्र के वनवासी आज भी एक शिला को पूजते हैं, जिसके बारे में उनकी श्रद्धा है कि श्रीराम आकर यहीं बैठे थे। वहां शबरी माता का मंदिर भी है। उन्होंने इस मौके पर कहा कि माँ सरस्वती की कृपा से हमारे जीवन में ज्ञान, कला और संस्कृति का प्रसार होगा। उन्होंने इस अवसर पर लघु बाल भवन अम्बाला छावनी व एसडी विद्या वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल अम्बाला छावनी की निदेशिका के संयुक्त प्रयासों से स्लम बस्ती व समाज की मुख्य धारा के कटे हुए बच्चों को आश्रय देते हुए समानता का अधिकारी दिलाने में व उनके उत्थान के लिए जो कार्य किए जा रहें हैं उसकी भी सराहना की। उन्होनें  यह भी कहा कि यदि किसी को भी कोई निराश्रित बच्चा मिलता है तो बाल कल्याण परिषद् या शिशु संग्रहालय में उसे भिजवाएं ताकि ऐसे बच्चों को भी आश्रय देते हुए उनका भविष्य सुरक्षित किया जा सकें। उन्होंने इस मौके पर संास्कृति कार्यक्रमों की प्रस्तुति देने वाले सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों, खो-खो खेल, फुटबाल व अन्य की प्रस्तुति देने वाले प्रतिभागियों को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित भी किया। मानद महासचिव सुषमा गुप्ता ने मुख्यअतिथि को शॉल भेंटकर व एसडी विद्या स्कूल की एक विद्यार्थी ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी व हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद् की उपाध्यक्ष सुमन सैनी का हस्त निर्मित संयुक्त चित्र भेंटकर उनका अभिन्नदन भी किया।
इस मौके पर हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद् की मानद महासचिव सुषमा गुप्ता ने मुख्यअतिथि का स्वागत करते हुए उपस्थित सभी को बसंत पंचमी त्यौहार की बधाई दी। उन्होंने इस मौके पर लघु बाल भवन अम्बाला छावनी व एसडी विद्या स्कूल के संयुक्त प्रयासों से स्लम बस्ती में रहने वाले बच्चों के लिए किए जा रहें कार्यो की सराहना की। इस अवसर पर जिला बाल कल्याण अधिकारी विश्वास मलिक व एसडी विद्या स्कूल की प्रिंसिपल नील इन्द्रजीत संधू ने भी मुख्यअतिथि का स्वागत करते हुए स्लम बस्ती में रहने वाले बच्चों व निराश्रित बच्चों के उत्थान के लिए एक नायाब कदम परियोजना के तहत जो गतिविधियां की जा रही है उसकी जानकारी दी।
बॉक्स:- बसंत पंचमी के मौके पर हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद् की उपाध्यक्ष सुमन सैनी ने कहा कि बंसत पंचमी पर पंतगबाजी का विशेष महत्व होता है, इसी परम्परा को निभाते हुए उन्होंने पंतग उड़ाकर सभी को इस पर्व की बधाई दी। इस अवसर पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए उपाध्यक्ष सुमन सैनी ने कहा कि भारत में महाकुम्भ का आयोजन होना हम सबके लिए सौभाग्य की बात हैं। उन्होनें इस महाकुम्भ में सभी को डूबकी लगाने बारे भी आहवान किया।
बॉक्स:- बसंत पंचमी पर आयोजित समारोह में उपाध्यक्ष ने स्लम बस्ती में रहने वाले बच्चों को वस्त्र देकर उन्हें भी इस पर्व की बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की और उनके साथ बीच में बैठकर चित्र भी खिचवाया। सामाजिक संस्था चैरिटी एण्ड वैलफेयर के पदाधिकारी एचएल बिन्द्रा, आर सी मनचंदा व अशोक राणा द्वारा इन बच्चों को लघु बाल भवन में लाने ले जाने के लिए उपलब्ध करवाई गई ई-रिक्शा की भी उन्होंने सराहना की व संस्था के पदाधिकारियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम के सफलपूर्वक आयोजन में समाजसेवी राकेश मक्कड़ ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस मौके पर भाजपा जिला अध्यक्ष मनदीप राणा, महामंत्री गोल्डी सैनी, भाजपा महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष बीनू गर्ग, भाजपा नेत्री नीता खेड़ा, हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद् की मानद महासचिव सुषमा गुप्ता, नगराधीश पूजा कुमारी, एसडी विद्या स्कूल की प्रिंसिपल नील इन्द्रजीत संधू, डॉ. नवीन गुलाटी, जिला बाल कल्याण अधिकारी सरोज बाला, जिला बाल कल्याण अधिकारी अम्बाला विश्वास मलिक, भाजपा नेता सद्दाम हुसैन, समाजसेवी राकेश मक्कड़, चाईल्ड वैलफेयर कमेटी की चेयर पर्सन रंजीता, प्रशांत मुंजाल, सौरभ कपूर, इंन्द्रजीत सिंह के साथ-साथ अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहें।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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