-जय ओंकार अन्तर्राष्ट्रीय सेवाश्रम संघ ने सेवा दिवस के रूप में मनाया नव वर्ष, 5100 जरूरतमंद लोगों को दिए कंबल, शॉल और गर्म वस्त्र
-108 कुंडीय ओंकार यज्ञ में डाली श्रद्धालुओं ने आहुति
डॉ. राजेश वधवा
कुरूक्षेत्र। जय ओंकार अन्तर्राष्ट्रीय संघ की ओर से नव वर्ष सेवा-दिवस के रूप में मनाया गया। बुधवार को ग्राम कुरड़ी स्थित समाधि मंदिर में कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष स्वामी संदीप ओंकार ने की कार्यक्रम में 5100 जरूरतमंद व्यक्तियों को कंबल शॉल और गर्म वस्त्र दिए गए।
इससे पहले 108 कुंडीय ओंकार महायज्ञ भी हुआ। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया और ओंकार यज्ञ में आहुतियां डालकर नए साल में सबकी खुशहाली की मन्नते मांगी।
सभी ने नव वर्ष पर लोगों ने गुरू महाराज जी का आशीर्वाद लिया। वहीं ओंकार यज्ञ की पूर्णाहुति संघ के मंदिर प्रधान अधिवक्ता जयनारायण दीक्षित ने डाली।
कार्यक्रम में विशेष तौर पर शाहबाद के विधायक रामकरण काला ने भी शिरकत करके गुरुदेव का आशीर्वाद प्राप्त किया।
संघ के संस्थापक स्वामी शक्तिदेव महाराज और स्वामी संतोष ओंकार महाराज ने कहा कि हमें अपने पूर्वजों की स्मृति में नव वर्ष को सेवा-दिवस के रूप में मनाना चाहिए और सेवा निस्वार्थ भाव से करनी चाहिए। निस्वार्थ भाव से की गई सेवा से ही जीवन सार्थक बनता है। इस विशेष दिवस पर हमें जरूरतमंद और असहाय व्यक्तियों की सेवा का प्रण लेना चाहिए। जीव की सेवा ही सबसे बड़ी सेवा है।
संघ संचालक पंडित शिवनारायण दीक्षित ने बताया कि स्वामी संदीप ओंकार जी की दादी जी व दादा जी की स्मृति में वर्ष 2006 से नव वर्ष को सेवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर कुरड़ी ग्राम पंचायत के सरपंच तरसेम वर्मा, सरदार मानसिंह, वेद प्रकाश, सतनारायण दीक्षित, पंडित मांगेराम, एडवोकेट राजेश दहिया, संजय मिढ़ा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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1100 कन्याओं का पूजन व शॉल भेंट कर भंडारे का शुभारंभ किया
सेवा दिवस पर 1100 कन्याओं का पूजन किया गया। इस दौरान कन्याओं को चुनरी, शॉल, व वस्त्र भेंट किए गए। कन्या पूजन स्वामी संदीप ओंकार ने किया।
मां लक्ष्मी देवी की प्रेरणा से ही उठाया है जनसेवा का बीड़ा : स्वामी संदीप ओंकार
स्वामी संदीप ओंकार ने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि हमें अपने पूर्वजों की पुण्यतिथि को सेवा दिवस के रूप में मनाना चाहिए। क्योंकि उन्हीं के आशीर्वाद से ही आज हम इस धरती पर हैं। उन्होंने कहा जीवन के इन विशेष दिनों पर हमें ज्यादा से ज्यादा गरीब व असहाय लोगों की सेवा करनी चाहिए। देवी स्वरूपा कन्याओं के पूजन से ही इसे नेक कार्य की शुरुआत होनी चाहिए। क्योंकि जहां कन्याओं का पूजन व सम्मान होता है, वह राष्ट्र भी उन्नति की ओर अग्रसर रहता है। ऐसा वेदों में भी कहा गया है। पूजनीय दादी लक्ष्मी देवी भी सदा सेवा कार्यों में अग्रसर रहने के लिए प्रेरित करती थी। सन 2006 से लगातार समाधि मंदिर में उनकी पुण्यतिथि को इसी तरह सेवा दिवस के रूप में मनाते आ रहे हैं। उन्हीं की प्रेरणा से ही हमने समस्त जन की सेवा करने का संकल्प लिया है। सेवा दिवस कार्यक्रम में उन्होंने उपस्थित जनसमूह को भ्रूण हत्या रोकथाम व कन्या, गउ व निरिह प्राणी की सेवा करने की शपथ भी दिलाई।
