शहर‌ से  2-2 बार विधायक रहे विनोद शर्मा और लेखवती जैन तीसरे चुनाव में हो गए थे पराजित  — हेमंत

अम्बाला–  गत  शनिवार 5 अक्टूबर को हरियाणा प्रदेश  की सभी 90 वि.स. सीटों पर मतदान सम्पन्न होने के बाद अब सारी निगाहें  मंगलवार 8 अक्टूबर को निर्धारित मतगणना के दिन  पर टिक गई हैं.
जहाँ तक मतदान  पश्चात विभिन्न न्यूज़ चैनल्स और चुनाव सर्वे एजेंसियों आदि  द्वारा सार्वजनिक किये गये  एग्जिट पोल्स के नतीजों  का विषय है, तो लगभग सभी द्वारा  नई गठित होने वाली 15वी हरियाणा विधानसभा की   90  सीटों में से  कांग्रेस पार्टी को औसतन 50 से 60 सीटें अर्थात स्पष्ट बहुमत मिलने का अनुमान जताया जा रहा है.
इसी बीच  शहर‌‌ निवासी हाईकोर्ट एडवोकेट एवं चुनावी विश्लेषक  हेमंत कुमार ( 9416887788) ने  बताया कि  इस बार अंबाला शहर विधानसभा हलके का चुनाव इसलिए भी रोचक है क्योंकि 44 वर्ष 11 महीने  आयु के भाजपा उम्मीदवार  असीम गोयल‌ नन्यौला, जिन्होंने  शहर वि.स.सीट से लगातार पिछले दो चुनाव जीते एवं जो अबकी बार अपने राजनीतिक जीवन में जीत की हैट्रिक लगाने की रेस में तीसरा चुनाव लड़ रहे हैं, उनका सीधा मुकाबला वर्तमान मे  71 वर्ष 8 महीने आयु के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता चौधरी निर्मल सिंह मोहड़ा के साथ है  जिनका राजनीतिक जीवन का‌ हालांकि इस बार 11वां चुनाव है.
निर्मल सिंह ने अम्बाला जिले के तत्कालीन नग्गल वि.स. हलके से वर्ष 1982 से 2005 तक  चार चुनाव जीते  एवं दो हारे हालांकि गत 15 वषों  में  वह लगातार चार चुनावों में पराजित हुए है. अक्टूबर, 2009 और अक्टूबर, 2014 में अम्बाला कैंट सीट से अनिल विज ने निर्मल को दो बार हराया, मई,2019 में कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट से भाजपा के नायब  सैनी  ( वर्तमान में  हरियाणा के कार्यवाहक मुख्यमंत्री) ने निर्मल को पराजित किया जबकि अक्टूबर, 2019 में अम्बाला शहर से  असीम गोयल ने निर्मल को करीब 9 हज़ार वोटों से हराया. इसलिए इस बार निर्मल के पास असीम से अपनी पिछली हार का बदला लेने का  अवसर है.
हेमंत ने आगे बताया कि जहाँ तक अंबाला शहर विधानसभा हलके के चुनावी इतिहास की बात है, तो‌ आज तक इस सीट‌ से असीम गोयल से पूर्व 3 विधायकों — लेखवती जैन, मास्टर शिव प्रसाद और विनोद शर्मा ने लगातार शहर हलके से दो चुनाव जीतने के बाद तीसरा चुनाव लड़ा परंतु केवल भाजपा से शिव प्रसाद ही तीसरी बार विधायक निर्वाचित हो सके थे. शिवप्रसाद वर्ष 1977 में जनता पार्टी से और वर्ष 1982 और 1987 में भाजपा से जीते थे. लेखवती जैन‌ वर्ष  1968 और 1972 में कांग्रेस से दो‌‌ बार विधायक बनी परंतु वर्ष 1977 में वह  शिवप्रसाद से पराजित हो गई थी. इसी प्रकार विनोद शर्मा वर्ष 2005 और 2009 में कांग्रेस से शहर‌ सीट‌ से दो बार विधायक बने परंतु वर्ष 2014 में वह जब कांग्रेस छोड़कर अपने द्वारा बनाई गई हरियाणा जनचेतना पार्टी ( वी) से चुनाव‌ लड़े, तो‌ वह भाजपा के असीम गोयल से ‌हार गए थे.
उन्होंने आगे बताया कि  बेशक इस बार अम्बाला शहर वि.स. सीट से कुल 11 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं जबकि हर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर 12वां विकल्प नोटा (उपरोक्त में से कोई नहीं) का भी  था. इसमें कोई संदेह नहीं कि  कई वर्षो बाद अम्बाला शहर सीट पर  कांग्रेस और भाजपा में  सीधा मुकाबला है.
पिछले दो वि.स. चुनावों में सर्वप्रथम अक्टूबर, 2014 में जब असीम पहली बार भाजपा से चुनाव लड़कर  विधायक बने थे, तब कांग्रेस के उम्मीदवार   हिम्मत सिंह के अलावा तब  हरियाणा जनचेतना पार्टी (हजपा)  से   विनोद शर्मा भी चुनावी मैदान में थे. नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस पार्टी के वोटों में विभाजन हो गया जिसका सीधा फायदा भाजपा के   असीम को हुआ और वह  37.30 प्रतिशत वोट लेकर  निर्वाचित हो गये. हजपा से  विनोद को 22.90 प्रतिशत जबकि कांग्रेस से लड़े हिम्मत को 21.47 प्रतिशत वोट मिले थे.
इसी प्रकार अक्टूबर, 2019 में जब असीम दूसरी बार भाजपा से चुनाव लड़कर  विधायक बने थे, तब कांग्रेस के उम्मीदवार  जसबीर मलौर के  अलावा कांग्रेस से टिकट न मिलने कारण पार्टी से  बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे  चौधरी निर्मल सिंह  भी चुनावी मैदान में थे. नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस पार्टी के वोटों  में  फिर  विभाजन हो गया जिसका सीधा फायदा भाजपा के   असीम को हुआ और वह  42.2 प्रतिशत वोट लेकर  निर्वाचित हो गये. निर्दलीय निर्मल  को 36.38 प्रतिशत जबकि कांग्रेस से  लड़े मलौर  को 13.07 प्रतिशत वोट मिले थे.

वहीं हेमंत ने बताया कि अगर असीम गोयल  8 अक्तूबर  को एक बार फिर अंबाला शहर से निर्वाचित होकर  विधायक बनते हैं, तो इस सीट से वह मास्टर शिव  प्रसाद के बाद तीसरी बार लगातार जीतने वाले  दूसरे भाजपा नेता बन जाएंगे. हालांकि वर्ष 1977 वि.स. चुनाव में शिव प्रसाद  जनता पार्टी के टिकट पर  चुनाव लड़ते हुए  रिकॉर्ड 76 प्रतिशत वोट लेकर  शहर  सीट विधायक बने थे, वह रिकॉर्ड तोड़ना अर्थात उससे अधिक मत प्रतिशत प्राप्त कर जीतना  किसी के लिए भी  मुश्किल‌‌ ही नहीं बल्कि नामुमकिन है.

By Dr. Rajesh Wadhwa

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