श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में धूमधाम से मनाया गया शिक्षक दिवस

श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में गुरुवार को शिक्षक दिवस धूमधाम से मनाया गया। कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. नरेश भार्गव, प्राचार्य डॉ. देवेंद्र खुराना, डीन एकेडमिक अफेयर्स डॉ. जेके पंडा, डॉ. अनिल शर्मा, डॉ. सुरेंद्र सहरावत, डॉ. कृष्ण कुमार जाटियान, डॉ. आशीष मेहता व अन्य अध्यापक गण मौजूद रहे। इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा अन्य प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गई। छात्र-छात्राओं ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को याद कर उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया और अपने गुरुजनों का आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर कुलपति ने विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है मगर आज का दिन भारत की महान शख्सियत डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जन्म जयंती के रूप में मनाया जाता है। उनके अनुसार शिक्षा का केंद्र विद्यार्थी होते है, विद्यार्थियों में नैतिक, बौद्धिक, आध्यात्मिक, सामाजिक, व्यावसायिक आदि मूल्यों का संचरण करने का प्रयास शिक्षकों को करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में शिक्षा के दो प्रकार है, एक अक्षर ज्ञान और दूसरा जीवन जीने की कला। अगर शिक्षक दोनों गुणों से सम्पन्न है तो वह गुरुत्व को प्राप्त करता है। अच्छे गुरु के सानिध्य में निश्चित रूप से विद्यार्थी का जीवन भी सफल होता है। इसके साथ भारत का जो ध्येय वाक्य है, सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामय उस लक्ष्य को भी प्राप्त किया जा सकता है। कुलसचिव डॉ. नरेश भार्गव ने कहा कि आज गूगल पर बहुत सारी जानकारी विद्यार्थियों को बिना किसी कठिनाई के प्राप्त हो रही है, इससे विद्यार्थियों की जानकारी तो बढ़ रही है लेकिन आज ज्ञान की कमी है। एक गुरु ही है जो अपने शिष्य का उचित मार्गदर्शन करता है। जो उसको भारतीय संस्कारों और संस्कृति से अवगत कराता है, गूगल पर यह ज्ञान नहीं मिल सकता।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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