अम्बाला – आगामी 25  मई  शनिवार  को हरियाणा की सभी 10  संसदीय (लोकसभा ) सीटों पर होने वाले मतदान में   अम्बाला (अनुसूचित जाति- एस.सी. आरक्षित) लो.स. सीट पर,  जहाँ इस बार मतदाताओं की कुल संख्या करीब 20 लाख है,  पर गत  9 मई की देर शाम अर्थात  इच्छुक उम्मीदवारों द्वारा चुनाव लड़ने से नाम  वापसी की समय सीमा समाप्त होने के उपरान्त 14 उम्मीदवार ही चुनावी मैदान में रह गए हैं जिनमें मुख्य तौर पर भाजपा की बंतो देवी कटारिया, कांग्रेस के वरुण चौधरी, इनेलो के गुरप्रीत सिंह, जजपा से डॉ. किरण पुनिया और बसपा से पवन कुमार शामिल है. शेष सभी उम्मीदवार गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से अथवा निर्दलीय हैं.  
इसी बीच  शहर  निवासी हाईकोर्ट  एडवोकेट एवं चुनावी मामलों के जानकार  हेमंत कुमार ( 9416887788) ने बताया की हालांकि आज  भी  अम्बाला सीट से चुनाव  लड़ रहे 14 उम्मीदवारों से कोई  भी बैठ सकता है परन्तु ई.वी.एम. पर उसका नाम और उसे  आबंटित चुनाव-चिन्ह  अवश्य होगा. बहरहाल,  मतदान के दिन अम्बाला लो.स. सीट पर  हर ईवीएम ( इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) पर 15 नाम होंगे क्योंकि वर्ष 2013 के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के  बाद नोटा ( नन आफ दि अबाव — उपरोक्त में से कोई नहीं)  का विकल्प भी हर  ईवीएम / बैलट पेपर पर आवश्यक है.
हेमंत ने भारतीय चुनाव आयोग से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर  बताया कि  पांच वर्ष पूर्व मई,2019 में जब पिछले लोकसभा आम चुनाव हुए थे, तब अम्बाला लो.स. सीट से कुल 18 प्रत्याशी (नोटा को मिलाकर 19) मैदान में थे. उस चुनाव में विजयी रहे भाजपा के रतन लाल कटारिया और दुसरे स्थान पर रही  कांग्रेस की सैलजा  को छोड़कर शेष सभी प्रत्याशियों की ज़मानत राशि जब्त हो गयी थी.  नोटा के पक्ष में तब कुल   7943 वोट पड़े थे.
उन्होंने आगे  बताया कि 10 वर्ष पूर्व  अप्रैल, 2014 में हुए लोकसभा आम  चुनावो में भी अम्बाला सीट  से  14 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था जबकि नोटा को मिलाकर संख्या 15 हो गयी थी. तब भाजपा से जीते  रतन लाल कटारिया और दूसरे नंबर पर रहे   कांग्रेस के राज कुमार बाल्मीकि  को छोड़कर शेष सभी   की जमानत जब्त राशि हो गयी थी.  नोटा को तब  7816 वोट पड़े थे.
इससे पहले वर्ष 2009  चुनाव में अम्बाला से केवल 7 उम्मीदवार मैदान में थे जिनमे विजयी रही कांग्रेस की सैलजा और दूसरे नंबर पर रहे भाजपा के रतन लाल कटारिया और तीसरे स्थान पर रहे  बसपा के चन्द्र पाल को छोड़कर  शेष 4 अपनी ज़मानत राशि गँवा बैठे थे.  तब नोटा का विकल्प नहीं होता था.
उससे  पूर्व वर्ष 2004  में  कुल 13  प्रत्याशी मैदान में थे  एवं विजयी रही  कांग्रेस की सैलजा और द्वितीय स्थान  पर रहे भाजपा के रतन लाल कटारिया को छोड़कर शेष 11 प्रत्याशी अपनी ज़मानत राशि भी नहीं बचा पाए थे.
हेमंत ने बताया कि इससे पहले  वर्ष 1999 के लोकसभा चुनावो में हालांकि ई.वी.एम. प्रयोग में नहीं लायी जाती थी एवं बैलट पेपर से मतदान होता था. उस चुनाव में कुल आठ उम्मीदवार मैदान में थे  रोचक बात यह है कि उस चुनाव में इस बार की भाजपा प्रत्याशी बंतो कटारिया के पति रतन लाल कटारिया और कांग्रेस के वर्तमान उम्मीदवार वरुण चौधरी के पिता फूल चंद मुलाना में सीधा मुकाबला हुआ था जिसमें कटारिया विजयी रहे थे जबकि मुलाना दूसरे स्थान पर थे एवं   6  अन्य की जमानत जब्त हो गयी थी.
हेमंत ने बताया कि कानूनन किसी भी उम्मीदवार को कुल पड़े वैध  मतों का एक छठा भाग अर्थात 16.66 प्रतिशत मत प्राप्त करना आवश्यक होता  है अन्यथा  उसकी जमानत राशि नहीं बच सकती.  हेमंत ने यह भी कहा की चूँकि एक ई.वी.एम. यूनिट  पर अधिकतम 16 नाम ही आ सकते है इसलिए अम्बाला लोकसभा सीट  के हर पोलिंग बूथ में ही एक-एक ही  ई.वी.एम. यूनिट होगी चूँकि इस सीट पर नोटा के विकल्प को मिलाकर कुल 15 प्रत्याशी हैं.  अगर नोटा को मिलाकर उम्मीदवारों की संख्या  16 से ऊपर हो जाती है, तो दो या दो से अधिक, जैसा भी हो,  ई.वी.एम. यूनिट को आपस में जोड़ना पड़ता है.

By Dr. Rajesh Wadhwa

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