सर्वाइकल एवं ब्रेस्ट कैंसर के शुरूआती लक्ष्णों को पहचानना मुश्किल, नियमित जांच ही बचाव
रोबोटिक सर्जरी से ब्रेस्ट कैंसर मरीजों में जागी उम्मीद की नई किरण
फोर्टिस मोहाली में सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में नई क्रांति
बठिंडा, 25 अप्रैल :
महिलाएं यदि अपनी नियमित जांच करवाती रहें, तो वह गंभीर से गंभीर स्त्री रोग से अपना बचाव कर सकती हैं, परंतु अक्सर महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर, अनियमित मासिक धर्म-प्रसव, बच्चेदानी एवं सर्वाइकल कैंसर के शुरूआती लक्ष्णों को अनदेखा कर गंभीर बीमारी की ग्रस्त में आ जाती हैं, वहीं अब रोबोटिक सर्जरी कैंसर टयूमर से ग्रस्त मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है। यह बात आज बठिंडा में आयोजित प्रैसवार्ता में जानी मानी गाइनी कैंसर माहिर डा. श्वेता तहलन एवं एंडोक्राइन, ब्रेस्ट कैंसर सर्जरी के विशेषज्ञ डॉ नवल बंसल ने कही, जो कि हाथों की बजाए दा विंची रोबोटिक सर्जरी से मरीज को उपचार के दौरान मिलती राहत जैसे खून की बर्बादी, कम दर्द, कम निशान व तुरंत राहत संबंधी जागरूक करने के लिए शहर में पहुंचे थे।
फोर्टिस अस्पताल में गाइनी ऑन्को-सर्जरी कंस्लटेंट डॉ श्वेता तहलन ने कहा कि महिलाएं ज्यादातर अपने अंदरूनी शरीर से संबंधित बीमारियों के शुरूआती लक्ष्णों को पहचानने में देरी एवं उसे बताने में हिचकिचातीं हैं तथा यही लापरवाही उनको गंभीर कैंसर के रूप में घेर लेती हैं। डॉ. तहलन जो कि 60 वर्ष से अधिक उम्र की गर्भाशय कैंसर से पीडि़त कई महिला रोगियों का सफल इलाज कर चुकी हैं, ने बताया कि हाल ही में उनके द्वारा गर्भाश्य कैंसर से पीडि़त 84 वर्षीय महिला का इलाज किया गया, जो कि मोनोपौसल के बाद योनि से रक्तस्राव, असामान्य योनि स्राव और पैल्विक दर्द से चुनौतीपूर्ण जीवन व्यतीत कर रही थी। उन्होंने बताया कि जांच करने पर पता चला कि कैंसर उसके उसके गर्भाश्य तक ही सीमित था। डॉ. तहलान ने मरीज का रोबोट-सहायक सर्जरी के माध्यम से मरीज की रेडिकल कैंसर सर्जरी सफलतापूर्वक की। ऑपरेशन के बाद उनकी रिकवरी आसानी से हो गई और सर्जरी के दो दिन बाद उन्हें हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई। उन्होंने बताया कि गर्भाशय कैंसर के मरीज़ आमतौर पर बूढ़े, मोटापे से ग्रस्त होते हैं और उन्हें मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग आदि जैसी चिकित्सीय समस्याएं होती हैं।
फोर्टिस अस्पताल मोहाली के एंडोक्राइन और ब्रेस्ट कैंसर सर्जरी के विशेषज्ञ डॉ नवल बंसल ने हाल ही में 38 वर्षीय महिला का इलाज किया, जिसके बाएं स्तन में कार्सिनोमा था। प्रारंभिक जांच में महिला को शुरुआती चरण के स्तन कैंसर का पता चला। मरीज की उम्र को ध्यान में रखते हुए, डॉ. बंसल के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने एक्सिलरी नोड्स (सेंटिनल लिम्फ लोड बायोप्सी) के लिए प्रोब-गाइडेड सर्जरी के साथ ब्रेस्ट-स्पेयरिंग आप्रेशन किया। डा. बंसल ने कहा कि सेंटिनल लिम्फ नोड बायोप्सी ने स्तन कैंसर सर्जरी के उपचार में बड़ा परिवर्तन ला दिया है। उनके अनुसार यह चिकित्सा प्रक्रिया शुरुआती चरण के स्तन कैंसर वाली महिलाओं के लिए मानी जाती है और यह कम इनवेसिव उपचार पद्धति है। एक रेडियोआइसोटोप और डाई इंजेक्ट करके और फिर उन्नत गामा जांच से सेंटीनल नोड (गांठ) की तलाश की जाती है। इस लिम्फ नोड का पता चलने के बाद इसे कैंसर कोशिकाओं के बारे मालूम करने के लिए परीक्षण को भेजा जाता है। यह प्रक्रिया खामखाह लिम्फ नोड्स को हटाने और बाहों की सूजन को रोकने में मदद करती है।
ब्रेस्ट कंजर्विंग सर्जरी के दौरान निकाले गए टिश्यू के नमूनों को फोर्टिस मोहाली के इन-हाउस फ्रोजन सेक्शन में भेजा गया। बाद की चिकित्सा परीक्षण रिपोर्ट में स्तन ट्यूमर और ट्यूमर मुक्त सेंटीमल नोड्स को पूरी तरह से हटने का पता चला। सर्जरी के अगले दिन बिना किसी ड्रेन पाइप के मरीज को छुट्टी दे दी गई।
यह चर्चा करते हुए कि सेंटिनल लिम्फ नोड बायोप्सी ने स्तन कैंसर सर्जरी के उपचार को बदल दिया है, डॉ. बंसल ने कहा कि चिकित्सा प्रक्रिया को अक्सर प्रारंभिक चरण के स्तन कैंसर वाली महिलाओं के लिए माना जाता है और यह कैंसर के चरण का सटीक पता लगाने में मदद करती है। यह सबसे आम और कम आक्रामक उपचार पद्धति है। चिकित्सा प्रक्रिया एक्सिलरी लिम्फ नोड्स को अनावश्यक रूप से हटाने और बाहों की सूजन को रोकने में मदद करती है।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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