मेले में नहीं आएगी किसी श्रद्धा को कोई परेशानी, सीसीटीवी कैमरों का हर समय रहेगा पहरा, एसडीएम अमन कुमार ने किया चैत्र चौदस मेले का उद्घाटन

पिहोवा 6 अप्रैल मेला प्रशासक एवं उपमंडल अधिकारी नागरिक अमन कुमार ने कहा कि उपमंडल पिहोवा में शनिवार 6 अप्रैल को तीन दिवसीय चैत्र चौदस मेले का शुभारंभ हो चुका है। चैत्र चौदस मेला हिन्दू-सिख एकता का प्रतीक है, जिसमें देश भर से लोग अमावस के अवसर पर स्नान करते हैं तथा अपने पितरों की आत्मा का शांति के लिए पिंडदान व पूजा-पाठ करवाते हैं।
एसडीएम अमन कुमार बाल भवन में स्थापित सूचना केंद्र से चैत्र चौदस मेले का उद्घाटन करने उपरांत बातचीत कर रहे थे। एसडीएम ने कहा कि विश्व विख्यात चैत्र चौदस मेले का धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्व है। कुरुक्षेत्र की परिधि में पढ़ने वाले तीर्थों में सर्वाधिक महत्व पृथुदक तीर्थ को माना गया है। वामन पुराण के अनुसार वेन के पुत्र पृथु के नाम से इस तीर्थ का नाम पृथुदक हुआ। राजा वेन धर्म से विमुख हो गया था, जिस कारण ऋषियों ने उसे श्राप देकर मार दिया था। फिर उसके शरीर का मंथन किया गया, जिससे भगवान विष्णु के नौवें अंश पृथु पैदा हुए। राजा पृथु ने जिस स्थान पर अपने पितरों को उदक यानि जल दिया, वह स्थान पृथु-उदक यानी पृथुदक नाम से प्रसिद्ध हुआ। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस तीर्थ में स्नान का अति महत्व माना गया है। यहां स्नान करने से सारे पाप नष्ट हो जाते है तथा व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ की फल की प्राप्ति के साथ-साथ स्वर्गलोक भी प्राप्त हो जाता है।
उन्होंने कहा कि चैत्र-चौदस मेला उपमंडल पिहोवा के सभी लोगों के साथ-साथ देश के सभी लोगों का मेला है। इस अवसर पर देश के कोने-कोने से श्रद्धालु मेले में आते हैं तथा परंपरागत तरीके से अमावस के समय स्नान करते हैं। चैत्र चौदस मेले के साथ लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। श्रद्धालुओं के लिए मेला प्रशासन द्वारा सभी प्रकार की व्यवस्थाएं की जा चुकी हैं। मेले में आने वाले लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्य घाट पर बने प्रशासनिक खंड में अधिकारियों द्वारा सीसीटीवी कैमरों द्वारा रखी जा रही नजर का कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, बड़ी एलईडी स्क्रीन से हर सैक्टर पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि चैत्र चौदस मेले में देश के विभिन्न राज्यों से लोग उपमंडल पिहोवा में आएंगे। चैत्र चौदस मेले के अवसर पर सूचना प्रसारण केंद्र की स्थापना की गई है, जो समय-समय पर घोषणाओं के माध्यम से सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों व उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाते हैं।
उद्घाटन अवसर पर नपा चेयरमैन आशीष चक्रपाणि ने कहा कि पुराणों के अनुसार पांडवों के बड़े भाई युधिष्ठिर ने महाभारत के युद्ध में मारे गए अपने सगे संबंधियों का यहीं पर पिंड दान करवाया था। भगवान श्री कृष्ण और शिव ने भी यहां सरस्वती तीर्थ में स्नान किया। श्री गुरु नानक देव जी और श्री गुरु गोबिंद सिंह जी भी यहां पधारे थे। महाराजा रणजीत सिंह इसी पावन तीर्थ पर अपनी माता का पिंडदान करवाने आए थे। इस पावन तीर्थ पर पूरा वर्ष श्रद्धालु पिंडदान व स्नान करने के लिए आते रहते हैं, लेकिन चैत्र चौदस को यहां स्नान करने का विशेष महत्व है। चैत्र चौदस मेले में श्रद्धालुओं का लगभग 80 प्रतिशत वर्ग सिख समुदाय से आता है। इसलिए इस मेले को हिन्दू-सिख एकता के प्रतीक के रूप में जाना जाता है।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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