कुरुक्षेत्र, 30 जून।
पीएचडी, इंजीनियरिंग, एमटेक, एमएससी, नर्सिंग, लॉ कर चुकीं 450 बेटियां ने एक साथ संयम का मार्ग अपनाया है। अब यह बेटियां आध्यात्म के मार्ग पर चलते हुए शिवप्रिया बन ब्रह्माकुमारी के रूप में समाजसेवा करेंगी। यह जानकारी प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्व विद्यालय कुरुक्षेत्र सेवा केन्द्र प्रभारी राजयोगिनी सरोज दीदी ने दी। उन्होंने बताया कि ब्रह्माकुमारीज संस्थान के इतिहास में पहली बार एक साथ इतनी बहनों का अलौकिक समर्पण समारोह शुक्रवार को सम्पन्न हुआ है। इसके साक्षी देशभर से आए 15 हजार लोग बनें है। समर्पण करने वालीं बेटियां अपने माता-पिता और परिजन के साथ शांतिवन पहुंची। उन्होंने बताया कि इस 3 दिवसीय अलौकिक समर्पण समारोह का शुभारंभ बुधवार को हुआ था। पहले दिन संस्थान की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बीके मुन्नी दीदी ने एक-एक कर सभी बहनों, उनके माता-पिता और परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि वह माता-पिता बहुत भाग्यशाली हैं, जिनके घरों में ऐसी दैवी स्वरूपा बेटियां जन्म लेती हैं। जो खुद के साथ परिवार और समाज का नाम रोशन करने जा रही हैं। अपने लिए तो सभी जीवन जीते हैं, लेकिन अब ये बेटियां ब्रह्माकुमारी बन कर समाजसेवा, समाज कल्याण में अपना जीवन समर्पित करने जा रही हैं।
माता-पिता ने दादी के हाथों में सौंपा बेटियों का हाथ
राजयोगिनी सरोज दीदी ने बताया कि सभी 450 बेटियों के माता-पिता और परिजनों ने संस्थान की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी के हाथों में अपनी लाडलियों का हाथ सौंपा। इसके साथ ही समर्पण की प्रक्रिया पूरी हुई। सभी बहनों ने दुल्हन के रूप में सज-धज कर परमपिता शिव को साजन के रूप में स्वीकार कर सेवा में ही अपना जीवन समर्पण करने का संकल्प लिया।
पांच साल की ट्रेनिंग के बाद बनती हैं ब्रह्माकुमारी
राजयोगिनी सरोज दीदी ने बताया कि ब्रह्माकुमारी बनने के पहले कन्याएं 5 साल तक सेवा केंद्र पर रहती हैं। इस दौरान उनका आचरण, सोच, विचार, व्यवहार और आध्यात्म के प्रति लगन देखी जाती है। साथ ही ब्रह्माकुमारी संस्थान के नियम-मर्यादा अनुसार जो कन्याएं पूरी तरह से त्याग-तपस्या के पथ पर चलती हैं, तो उन्हें फिर समर्पित किया जाता है। इसके साथ ही अलौकिक समर्पण समारोह की प्रक्रिया पूरी की जाती है। एक ब्रह्माकुमारी की दिनचर्या में अलसुबह अमृतवेला 3.30 बजे उठ राजयोग ध्यान से लेकर सेवा, नियमित सत्संग शामिल होता है।
अब तक का सबसे बड़ा समर्पण समारोह
राजयोगिनी सरोज दीदी ने बताया कि शांतिवन सहित पूरे विश्व में ब्रह्माकुमारीज संस्थान का यह अब तक का सबसे बड़ा अलौकिक समर्पण समारोह का आयोजन है। इसके पूर्व वर्ष 2013 में एक साथ 400 बेटियों ने संयम के पथ पर चलने का संकल्प कर समर्पण किया था।
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By Dr. Rajesh Wadhwa

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