स्थायी मान्यता के लिए रिव्यू के नियम को हटवा कर ही दम लेंगे : डॉ. कुलभूषण शर्मा
डॉ. राजेश वधवा
कुरुक्षेत्र । नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलायंस (निसा) के राष्ट्रीय  अध्यक्ष और फेडरेशन ऑफ  प्राइवेट स्कूल्स वेलफेयर एसोसिएशन हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. कुलभूषण  शर्मा और फेडरेशन के कुरुक्षेत्र पदाधिकारियों ने शनिवार को कुरुक्षेत्र में एक प्रेस वार्ता में ऐलान किया कि जिले के निजी स्कूल्स संचालक स्थायी मान्यता रिव्यू का फार्म नहीं भरेंगे। इस दौरान मीडिया से बात करते हुए डॉ. कुलभूषण  शर्मा ने कहा कि स्थायी मान्यता के लिए रिव्यू के नियम को हम हमेशा के खत्म करवा कर ही दम लेंगे। उन्होंने कहा कि 10 साल पुराने स्थायी मान्यता वाले निजी स्कूलों के लिए बनाई गई समीक्षा नीति का निजी स्कूल संचालक पुरजोर विरोध करते हैं। निजी स्कूलों के लिए दमनकारी स्थायी मान्यता का रिव्यू सिस्टम हमेशा के लिए खत्म होना चाहिए।
डॉ. कुलभूषण  शर्मा ने मीडिया के समक्ष कहा कि हम शिक्षाविद हैं। हमारा उद्देश्य समाज के अंतिम छोर के बच्चों को शिक्षित करना है। शिक्षा के क्षेत्र में निजी स्कूलों का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है। हम शिक्षा के क्षेत्र में अपना योगदान देने को तत्पर है,दूसरी तरफ हरियाणा शिक्षा विभाग  ने 10 वर्ष पुराने मान्यता प्राप्त स्कूलों के रिव्यू संबंधी लेटर जारी किया है जो कि शिक्षण व्यवस्था में बाधा उत्पन्न करने वाला कदम है।
डॉ. कुलभूषण  का कहना है कि हम रिव्यू की पेचीदगी का विरोध कर रहे हैं। इससे करप्शन को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। शिक्षा विभाग  के अदूरदर्शी रवैये और नीति के विरोध में हम लामबंद हैं और तय किया है कि कुरुक्षेत्र के निजी स्कूल्स रिव्यू के लिए फार्म नहीं भरेंगे।
हमारा मानना है कि जिन स्कूलों को एक बार मान्यता प्रदान कर दी गई है उन स्कूलों की बार-बार समीक्षा कराने की आवश्यकता क्या है? सच यह है कि जिन स्कूलों को मान्यता मिली है, उन्हें नार्म्स पूरा करने के बाद ही मान्यता दी गई है। ऐसे में रिव्यू का औचित्य क्या है, यह हमारी समझ से परे है।
निजी स्कूल्स हर साल भरते हैं फार्म-6
डॉ. कुलभूषण  शर्मा ने कहा कि कुरुक्षेत्र समेत पूरे प्रदेश के निजी स्कूल्स हर साल फार्म-6 भर  कर अपने स्कूल संबंधी तमाम तकनीकी जानकारी सरकार के समक्ष रखते हैं। जब सरकार के पास स्कूलों संबंधी पूर्ण जानकारी पहले से है, ऐसे में नए नियम को लागू करने का क्या औचित्य है। सरकार चाहे तो 10 साल स्थायी मान्यता वाले स्कूलों से एक हलफनामा ले सकती है। इसके अलावा सरकार अपने स्तर पर स्कूलों की जांच करवा सकती है।
करप्शन को बढ़ावा देगा नया नियम
नए नियम के तहत रिव्यू कराने के लिए स्कूल संचालकों को सरकारी आफिसों के धक्के खाने पड़ेंगे। ऐसे हालात में करप्शन को बढ़ावा मिलेगा।
शिक्षा मंत्री ने उचित कार्रवाई का दिया है भरोसा
डॉ. कुलभूषण  शर्मा  ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि बीते बुधवार को फेडरेशन पदाधिकारियों और मेंबर्स की हरियाणा के शिक्षा मंत्री कंवर पाल से इसी मुद्दे पर वार्ता हुई है। वहां पर फेडरेशन से अपना पक्ष रखा। इसे सुन कर माननीय मंत्री जी ने निजी स्कूल संचालकों की परेशानी को खत्म करने का ठोस आश्वासन दिया है। हमारी मांग है कि वह इस नियम को जड़ से खत्म कर हमारी परेशानियों का स्थायी समाधान कर दें।
यह है पूरा मामला
नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलायंस (निसा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और फेडरेशन ऑफ  प्राइवेट स्कूल्स वेल्फेयर एसोसिएशन हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. कुलभूषण शर्मा ने बताया कि हरियाणा के शिक्षा विभाग ने एक पत्र जारी किया है जिसमें कहा गया है  कि जो निजी स्कूल्स 10 साल के हो गए हैं, उन्हें अपनी मान्यता को रिव्यू करवाना होगा। सरकार के फैसले के अनुसार कार्य करने पर निजी स्कूल संचालकों को करीब 400 पेज भरना होगा। इसके अलावा यह अत्यधिक जटिल प्रक्रिया है। यह पुन: मान्यता प्राप्त करने जैसी जटिल प्रक्रिया से गुजरना होगा। इस प्रक्रिया में प्रदेश के सभी स्कूल संचालक उलझ कर रह जाएंगे।
यह लोग रहे प्रेस वार्ता में उपस्थित
शनिवार फेडरेशन की कुरुक्षेत्र में हुई प्रेस वार्ता में डॉ. कुलभूषण  शर्मा के संग फेडरेशन के संरक्षक बीडी गाबा,जिला प्रधान कर्मसिंह बैंस,सचिव राजीव चावला,कोषाध्यक्ष ईश्वर सिंह  , शिव कुमार आर्या, ब्लॉक के पदाधिकारी बाल किशन,विनोद शर्मा, रमेश कुमार, मुकेश कुमार सहित कई अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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