कुवि कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा ने दी बधाई
केयू का इलेक्ट्रॉनिक साइंस विभाग राष्ट्रीय सेमीकंडक्टर मिशन के तहत तैयार करेगा सेमीकंडक्टर चिप
कुवि के शिक्षक शिक्षण एवं शोध क्षेत्र में अग्रणी : प्रोफेसर सोमनाथ
कुरुक्षेत्र, 6 जून। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने भारत को अगले सेमीकंडक्टर हब में बदलने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित भारत के राष्ट्रीय सेमीकंडक्टर मिशन का हिस्सा बनकर एक और मील का पत्थर हासिल किया है। इस मिशन के तहत, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना मंत्रालय ने हेजार्ड्स गैस सेंसिंग के लिए सेमीकंडक्टर चिप विकसित करने के लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक विज्ञान विभाग के प्रोफेसर मुकेश कुमार के एक शोध प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस परियोजना के तहत एक नैनोमेटेरियल्स-आधारित गैस सेंसर और इसके सेंसिंग इलेक्ट्रॉनिक्स को सिंगल इंटीग्रेटेड सर्किट (आईसी) के रूप में एकीकृत किया जाएगा। इस अवसर पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा ने प्रो. मुकेश कुमार व इलेक्ट्रॉनिक साइंस विभाग को बधाई देते हुए कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के शिक्षक शिक्षण, शोध, अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शोध एवं अनुसंधान के क्षेत्र में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की विशिष्ट पहचान है। कुवि कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि यह गर्व की बात है कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का इलेक्ट्रॉनिक विज्ञान विभाग उन शीर्ष संस्थानों में से है, जो इस बड़ी परियोजना के चयनित संस्थानों की सूची में जगह बना सका जिनमें आईआईटी, शीर्ष एनआईटी और अन्य प्रमुख संस्थान शामिल हैं।
गौरतलब है कि प्रो. मुकेश कुमार को सेमीकंडक्टर चिप को विकसित करने की परियोजना के लिए 5 साल की अवधि के लिए 75 लाख रुपये मिले है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना मंत्रालय ने चिप्स टू स्टार्टअप कार्यक्रम के तहत पिछले वर्ष शिक्षा, अनुसंधान एवं विकास संगठनों, स्टार्ट-अप और एमएसएमई से इसके लिए आवेदन मांगे थे। चिप्स टू स्टार्टअप प्रोग्राम का उद्देश्य वीएलएसआई और एंबेडेड सिस्टम डिज़ाइन के क्षेत्र में उच्च-गुणवत्ता और योग्य इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने के साथ-साथ एप्लीकेशन स्पेसिफिक इंटीग्रेटेड सर्किट को विकसित करना है।
प्रो. मुकेश कुमार ने बताया कि इस परियोजना के तहत एक ही सेमीकंडक्टर चिप पर एक प्रदूषण फैलाने वाले गैस सेंसर और उससे जुड़े इलेक्ट्रॉनिक्स को तैयार किया जाएगा तथा इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक्स का ऐसा एकीकरण आज तक संभव नहीं था। यदि सेंसर और उसके इलेक्ट्रॉनिक्स अलग-अलग बोर्ड/चिप्स पर हैं, तो न केवल लागत अधिक हो जाती है, बल्कि पूरे सिस्टम का प्रदर्शन भी बहुत अच्छा नहीं होता है लेकिन अब नेनो तकनीक में प्रगति के साथ, और उन्नत मेटिरियल ग्राफीन के विकास के कारण, इस प्रकार की संवेदन प्रणालियों की दक्षता में वृद्धि करना संभव हो गया है। उन्होंने बताया कि हम एक ऐसी तकनीक विकसित कर रहे हैं, जो एक ही इंटिग्रेटिड सर्किट में सेंसर और उसके इलेक्ट्रॉनिक्स दोनों को बनाना संभव बना सकती है।
इस अवसर पर इलेक्ट्रॉनिक साइंस विभाग के अध्यक्ष एवं इस परियोजना के सह-अन्वेषक प्रो. अनिल वोहरा ने कहा कि इस प्रकार के अनुसंधान की सफलता न केवल देश में सेमीकंडक्टर विकास के क्षेत्र में एक क्रांति लाएगी, बल्कि युवा छात्रों को भी सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रॉनिक्स को करियर विकल्प के रूप में लेने के लिए प्रेरित करेगी क्योंकि इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के अपार अवसर हैं।
