कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में गुरुद्वारा साहिब पातशाही छठी में शिअद गुर्गों द्वारा खलल डालने की सख्त शब्दों में की निंदा
कुरुक्षेत्र।
शिरोमणि अकाली दल बादल के संरक्षक एवं पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को नैतिकता के आधार पर फखर-ए-कौम अवार्ड लौटा देना चाहिए। यदि वे ऐसा नहीं करते, तो श्री अकाल तख्त साहिब श्री अमृतसर के जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी हरप्रीत सिंह को चाहिए कि वे उन्हें यह अवार्ड लौटाने के लिए निर्देश दें। यह मांग शिरोमणि अकाली दल हरियाणा स्टेट के प्रवक्ता एवं सिख परिवार हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष कवलजीत सिंह अजराना ने करते हुए बादल पिता-पुत्र पर तीखे प्रहार किए। कवलजीत सिंह अजराना यहां पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने बताया कि बैठक में सभी कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में पिछले दिनों ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब पातशाही छठी कुरुक्षेत्र में शिअद के पदाधिकारियों द्वारा हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के कार्यक्रम में खलल डालने की सख्त शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि बादल ग्रुप ने सदैव ही श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की मर्यादा का हनन किया है जो अब जगजाहिर हो गया है। उन्होंने गत दिवस कोटकपूरा मामले में शिअद सुप्रीमो प्रकाश सिंह बादल और शिअद के राष्ट्रीयाध्यक्ष व पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को आरोपी बनाए जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि नाम सिमरन कर रही निहत्थी संगत पर साजिश के तहत गोली चलाना अब सामने आ चुका है इसलिए प्रकाश सिंह बादल को चाहिए कि वे नैतिकता के आधार पर फखर-ए-कौम अवार्ड लौटा दें। अजराना ने कहा कि इससे पहले भी डेरा सिरसा प्रमुख को क्लीन चिट दिलवाने के आरोप भी बादल परिवार पर लगे थे। इतना ही नहीं, श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज के 328 स्वरूप चोरी होने का दाग़ भी उनके दामन पर लगा है। इसके अलावा उनके मुख्यमंत्री काल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज के स्वरूपों की विभिन्न स्थानों पर बेअदबी की घटनाएं भी हुई हैं, जिनके छींटे भी बादल परिवार पर लगे थे। अजराना ने कहा कि इतना सब होने के बावजूद बादल परिवार ने न तो अतीत से सबक लिया और न ही गलती सुधारने का कोई प्रयास किया, अपितु कुरुक्षेत्र में अपने गुर्गे भेज कर हरियाणा का माहौल भी खराब करने का असफल प्रयास किया है। इन सभी घटनाओं से स्पष्ट है कि प्रकाश सिंह बादल और उनके पुत्र सुखबीर सिंह बादल के लिए सिख कौम का कोई महत्व नहीं है, बल्कि उनके निजी हित सर्वोपरि हैं। ऐसे में संगत की मांग है कि बादल परिवार तुरंत प्रभाव से फखर-ए-कौम अवार्ड लौटा दे। बैठक में श्री हेमकुंट साहिब सेवा सोसायटी के प्रधान तेजेन्द्र सिंह मक्कड़, नरेंद्र सिंह गिल, गुरविंदर सिंह, जगतप्रीत सिंह, अजैब सिंह, राजा सिंह भट्टी, नरेंद्र सिंह गोराया, बाबा जतिंदर सिंह, रोशन सिंह, हरनेक सिंह, गुरविंदर सिंह कालरा, अजीत सिंह, जत्थेदार बलजीत सिंह, कुलविंदर सिंह व सिमरन सिंह आदि मौजूद रहे।
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बैठक के बाद जानकारी देते कवलजीत सिंह अजराना व अन्य।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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