केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को 2023-24 का बजट पेश किया। मोदी 2.0 सरकार का ये पांचवां बजट ऐसे समय में पेश किया गया जब इस साल 9 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं और अगले साल मोदी सरकार खुद जनता के दरबार में वोट मांगने के लिए उतरेगी।
अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था सही रास्ते पर है और एक उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ रही है। इकोनॉमी और टैक्सपेयर्स को एक बड़े बूस्ट के तौर पर सीतारमण ने नए टैक्स सिस्टम के टैक्स स्लैब में बड़े परिवर्तन किए हैं। साथ ही रेलवे और कैपिटल एक्सपेंडिचर के मद में आवंटन भी बढ़ाया है। हालांकि, एजुकेशन सेक्टर के लिए बजट में काफी कसर बाकी रह गई है।
आइए, समझते हैं इस बजट के लिए मुख्य बिंदु और उनके टेक-अवे…
1. टैक्सपेयर्स…नए सिस्टम में सबको कुछ न कुछ देने की कोशिश
वित्त मंत्री ने नए टैक्स सिस्टम के तहत स्लैब में बदलाव किए हैं। दो बदलाव सबसे महत्वपूर्ण हैं। पहला- बेसिक छूट की लिमिट 2.5 लाख से बढ़ाकर 3 लाख कर दी गई है। दूसरा- सेक्शन 87A के तहत मिलने वाली रिबेट के लिए आय सीमा 5 लाख से बढ़ाकर 7 लाख कर दी गई है।
सिंपल भाषा में कहें तो नया टैक्स सिस्टम चुनने पर 7 लाख तक की आय टैक्स फ्री हो जाएगी। इससे ज्यादा आय वालों के लिए भी टैक्स स्लैब बदला गया है।
इसके साथ ही नए टैक्स सिस्टम में 15 लाख तक के सालाना वेतन वालों के लिए 50 हजार रुपए का स्टैंडर्ड डिडक्शन और फैमिली पेंशन से 15 हजार रुपए तक के डिडक्शन की सुविधा होगी।
सिंपल प्रोसेस और आसान कम्प्लाएंस की वजह से ये कहा जा सकता है कि बजट में मध्यम वर्गीय टैक्स पेयर्स के लिए काफी कुछ दिया गया है। नया टैक्स सिस्टम अपनाने वालों के लिए पहले से ज्यादा आकर्षक सुविधाएं दी गई हैं।
सबसे ज्यादा सरचार्ज रेट जो अब तक 37% था, उसे नए टैक्स सिस्टम में घटाकर 25% कर दिया गया है। रेजिडेंशियल हाउस पर कैपिटल गेन टैक्स में छूट की सीमा अब 10 करोड़ कर दी गई है।
