भारत तीर्थों, ग्रंथों, अवतारों व त्योहारों की धरती : स्वामी ज्ञानानंद
डॉ. राजेश वधवा
कुरुक्षेत्र। महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज के सान्निध्य में गीता जयंती के अवसर पर गीता ज्ञान संस्थानम् में आयोजित किया जा रहे 5 दिवसीय दिव्य गीता सत्संग का आज विधिवत आगाज़ हो गया। दिव्य गीता सत्संग का शुभारंभ जय राम संस्थाओं के परमाध्यक्ष ब्रह्मचारी ब्रह्मस्वरूप महाराज, स्टॉलवार्ट फाउंडेशन के चेयरमैन एवं समाज सेवी संदीप गर्ग लाडवा, हरियाणा रेड क्रॉस की वाइस चेयरपर्सन सुषमा गुप्ता, जीओ गीता के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किशोर अग्रवाल दिल्ली, अशोक चावला अंबाला, राज गोयल निसिंग व जीओ गीता कुरुक्षेत्र के प्रधान मंगत राम जिंदल ने दीप प्रज्वलन करके किया। गगनदीप ढींगरा, सत्य नारायण गुप्ता, भाजपा करनाल के जिला अध्यक्ष जोगिंदर राणा एवं श्री कृष्ण कृपा गौशाला के प्रधान हंसराज सिंगला ने श्रीमद्भगवद्गीता के पूजन का लाभ लिया। श्री कृष्ण कृपा कर दो ऐसी, गीतामय जीवन हो जाए भजन से दिव्य गीता सत्संग की संगीतमय शुरुआत के साथ गीता ज्ञान संस्थानम्  के पंडाल में उपस्थित हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि भारत भूमि अवतारों की भूमि है। यदा यदा ही धर्मस्य का उद्घोष करने वाले और युग युग में प्रकट होने वाले भगवान ने स्वयं के प्रकट होने के लिए केवल भारत को ही चुना। उन्होंने कहा कि भारत त्योहारों की भूमि है और हमारे त्यौहार हमें हमारी दिव्यताओं के साथ-साथ हमारे गौरवशाली इतिहास से जोड़ते हैं। त्योहार अंदर की चेतनाओं को जगाने का काम करते हैं। 5160 वर्ष पूर्व कुरुक्षेत्र की धर्मधारा पर भगवान ने गीता का उपदेश दिया, जिसे गीता जयंती के रूप में हम बहुत बड़े त्यौहार के रूप में मना रहे हैं। गीता मनीषी ने कहा कि भारत तीर्थों की भी भूमि है। तीर्थ पर जाकर तन, मन और बुद्धि का शुद्धिकरण होता है। धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र हर युग से जुड़ा हुआ तीर्थ है। मानसिक उहापोह में उलझा-भटका जीव तीर्थ पर आकर स्वाभाविक शांति पाता है। स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि भारत ग्रंथों की भी धरा है। चार वेदों के बाद पांचवें वेद के रूप में महाभारत तथा तत्पश्चात वाल्मीकि रामायण सहित 18 पुराण और असंख्य ग्रंथ जिनमें मानवता की दिव्यता साफ दिखाई देती है। हमारे ग्रंथो में कहीं भी केवल भारत की बात नहीं की गई बल्कि पूरे विश्व की कामना के साथ हमारे ग्रंथ समता, समरसता और सद्भावना का संदेश देते हैं। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने दिव्य गीता सत्संग में पधारे मुख्य अतिथि स्टॉलवार्ट फाउंडेशन के चेयरमैन संदीप गर्ग लाडवा सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों एवं मुख्य यजमानों को स्मृति चिन्ह के रूप में ठाकुर श्री श्री कृपा बिहारी जी का सुंदर स्वरूप भेंट किया। मंच संचालन का कार्य डा. मोहित गुप्ता ने बखूबी निभाया। दिव्य गीता सत्संग के समापन पर श्रीमद्भगवद्गीता जी की आरती गाई गई। इस अवसर पर 48 कोस तीर्थ के कमेटी के चेयरमैन मदन मोहन छाबड़ा, विजय नरूला, प्रमोद गुप्ता, बृज गुप्ता, संजय गुप्ता, संजीव सपड़ा, तजेंद्र सिंह खैरा, पवन भारद्वाज, एम.के. मौदगिल, सुरेंद्र आहूजा, अशोक अरोड़ा, भारत छाबड़ा, राधेश्याम थन्नई, नरेंद्र गाबा, रमाकांत शर्मा, आर.डी. गोयल, विजय बवेजा, दीपक आहूजा, धर्मपाल शर्मा, खुशी राम, धीरज वालिया एवं जमनादास भारद्वाज सहित भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
बॉक्स : समर्पण की शिक्षा देती है गीता : ब्रह्मचारी ब्रह्मस्वरूप दिव्य गीता सत्संग के प्रथम दिवस पर गीता ज्ञान संस्थानम् में पधारे जय राम संस्थाओं के परमाध्यक्ष ब्रह्मचारी ब्रह्मस्वरूप महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान श्री कृष्ण की सभी लीलाएं प्रेरणादाई हैं। भगवान की बाल लीला प्रेम का संदेश तो देती ही है, साथ ही व्यक्ति को घमंड से दूर रहने की भी शिक्षा देती है। उन्होंने कहा कि भगवान ने गीता में समर्पण भाव से काम करने की बात कही। भगवान कृष्ण ने अर्जुन से कहा कि तू अपना सर्वस्व मुझे अर्पण कर दे, मैं तेरे लिए विजय सुनिश्चित कर दूंगा। ब्रह्मस्वरूप महाराज ने कहा कि गीता के अनुसार समर्थन भाव से काम करने से निश्चित ही विजय का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने कहा कि गीता सर्वमान्य ग्रंथ है और गीता से बढ़कर कोई ग्रंथ नहीं। गीता रूपी सागर में जितना गहरा उतरोगे ज्ञान के भंडार के रूप में उतने ही मोती पाओगे। गीता ज्ञान संस्थानम् के व्यवस्थापक राजेंद्र चोपड़ा एवं जीओ गीता कुरुक्षेत्र के पदाधिकारियों ने ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज का गीता ज्ञान संस्थानम् में पहुंचने पर पुष्प भेंट कर स्वागत किया।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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