हरियाणवी भजन व रागनी के माध्यम से कलाकारों ने सामाजिक विषयों पर डाला प्रकाश
कुरुक्षेत्र, 28 अक्टूबर।
 हरियाणा दिवस के उपलक्ष्य में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के श्रीमद्भगवद् गीता सदन में शनिवार को चार दिवसीय राज्य स्तरीय रत्नावली समारोह धूमधाम व हर्षोल्लास से शुरू हुआ। हरियाणवी संस्कृति के महाकुंभ में पहली बार 71 संस्थानों के 3000 से अधिक युवा कलाकारों ने अपना पंजीकरण करवाया और आने वाले चार दिन युवा कलाकार 6 मंचों पर अपने हुनर को प्रदर्शित करेंगे। समारोह के पहले दिन रत्नावली के मंच पर रिचुअल व लूर नृत्य के माध्यम से हरियाणवी लोक संस्कृति व परंपरा को प्रस्तुत किया गया। लूर नृत्य पहली बार प्रस्तुत हुआ और जिसने दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। सोलो डांस फीमेल व पॉप सांग हरियाणवी पर दर्शक झूम उठे। युवा कलाकारों ने हरियाणवी भजन व रागनी के माध्यम से सामाजिक समस्याओं को उठाया और उनके निराकरण के भी उपाय सुझाए। हरियाणवी भाषण प्रतियोगिता में वर्तमान के प्रासंगिक विषयों पर छात्रों ने अपने विचार रखें । समारोह के पहले दिन जहां कलाकारों में जोश था वहीं दर्शकों ने भी उत्साह के साथ समारोह का आनंद उठाया।

हस्तकला प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केन्द्र

रत्नावली उत्सव में हस्तकला प्रदर्शनी सबके आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है। छात्रों द्वारा लगाए गए स्टालों पर दर्शकों की पूरा दिन भीड़ लगी रही और उनके द्वारा बनाए गए सामान की खूब खरीददारी भी हुई। सबसे ज्यादा आकर्षण का केन्द्र ललित कला विभाग द्वारा लगाए गए स्टाल रहे क्योंकि छात्रों ने बहुत आकर्षक व सुंदर पोस्टर, अन्य साजोसाज की वस्तुएं रखी हुई थी।

ऑस्ट्रेलिया मेलबर्न में जन्मी कायरा ने रत्नावली में किया हरियाणवी नृत्य…
 रत्नावली के उद्घाटन अवसर पर ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में जन्मी नौ वर्षीय कायरा ने हरियाणवी नृत्य प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया। उसने तेरी पतली कमर पै मटका भारी फूट जावगा गीत पर नृत्य कर यह संदेश दिया कि विदेश में रहकर भी एन.आर.आई हरियाणावासियों के बच्चे अपनी संस्कृति से जुड़े हुए हैं। सुनील एवं कीर्ति दहिया की बेटी कायरा का जन्म मेलबर्न में ही हुआ, वहीं की निवासी है, किंतु अपनी संस्कृति से पूरा परिवार जुड़ा हुआ है। एसोसिएशन ऑफ हरियाणवीज इन ऑस्ट्रेलिया के माध्यम से सभी एन.आर.आई अपने बच्चों को हरियाणा की संस्कृति से जोड़े रहते हैं।

संगीतमय हरियाणा दर्शन के माध्यम से प्रस्तुत की गई हरियाणा की सांस्कृतिक गाथा…
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग की ओर से आयोजित रत्नावली समारोह के उद्घाटन अवसर पर डॉ. महासिंह पूनिया द्वारा अवधारित की गई प्रस्तुति के माध्यम से संपूर्ण हरियाणा की सांस्कृतिक गाथा को प्रस्तुत किया गया। हर के नाम पर हरियाणा की स्थापना भगवान शिव को नमन करते हुए हरियाणा दर्शन की शुरुआत हुई। इसके बाद वेदों में वर्णित हरियाणा महाभारत, गीता का ज्ञान, कर्म का संदेश, महाराजा हर्षवर्धन की राजधानी थानेसर का ब्यौरा उसके बाद संगीतमय प्रदेश हरियाणा के लोक नृत्य जिनमें फागण नृत्य, लूर नृत्य, धमाल नृत्य, रसिया नृत्य, खोड़िया नृत्य के माध्यम से रत्नावली तक का पूरा ब्यौरा प्रस्तुत किया गया।  हरियाणा दर्शन प्रस्तुति में एक ही मंच पर छात्रों ने भव्य प्रस्तुति कर पूरे हरियाणा के दर्शन करवा दिए। खासतौर पर अभिनेता जयदीप अहलावत ने हरियाणा दर्शन की प्रस्तुति करने वाली टीम की सराहना की और कहा कि छात्रों ने लगातार 15 मिनट मंच पर प्रस्तुति कर बड़ा ही सराहनीय कार्य किया है।

गंगा स्तुति की सांस्कृतिक प्रस्तुति ने सबका मन मोह लिया…
गंगा जी तेरे खेत में गडे हैं हडोळे चार…
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग की ओर से प्रस्तुत की गई गंगा एवं शिव स्तुति की कत्थक नृत्य के साथ प्रस्तुति ने सबका मन मोह लिया। रत्नावली के मंच पर यह प्रयोग पहली बार हुआ है। पंडित लख्मीचंद द्वारा गंगा स्तुति की प्रस्तुति को नृत्य स्वरूप में ढाल कर पहली बार इस मंच पर संगीतमय तरीके से प्रस्तुत किया गया। इसमें गंगा की महिमा का गुणगान किया गया है। इसके साथ ही लोकजीवन में गंगा की सांस्कृतिक महत्ता पर भी प्रकाश डाला गया है। यह प्रस्तुति दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र रही।

रत्नावली के मंच पर पहली बार प्रस्तुत किया गया हरियाणवी बैंड पर झूम उठे दर्शक…
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग द्वारा जिस हरियाणवी बैंड की परिकल्पना की गई थी उसको आज रत्नावली के मंच पर प्रस्तुत किया गया। संगीत विभाग के छात्रों की यह प्रस्तुति इतनी सुंदर थी कि इसको सुनकर सभी दर्शक झूम उठे। हरियाणा के देसी वाद्यों, खडताल, नगाड़ा, बैंजो, ताशा के साथ-साथ आधुनिक वाद्यों सींथेसाईजर, चोंगा आदि के माध्मय से यह संगीतमय प्रस्तुति सबके लिए आकर्षण का केन्द्र रही। इसमें लोक वाद्यों के संगीत केे साथ-साथ गायकी का जो स्वरूप प्रस्तुत किया गया उसके माध्यम से हरियाणवी संस्कृति के आधुनिक स्वरूप की झलक देखने को मिली।

जिस दिन सबसे अलग करूँगा, उस दिन हवा में उड़ने लगूँगाः जयदीप अहलावत
रत्नावली मंच से विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए जब प्रोफ़ेसर महासिहं पूनिया ने पूछा की आप इतने शौहरत पाने के बाद भी इतने ज़मीन से कैसे जुड़े रहते हैं, इस बात का जवाब देते हुए बॉलीवुड अभिनेता जयदीप अहलावत ने कहा कि मैं कोई अनोखा काम नहीं कर रहा हूँ और ना ही कोई अलग काम कर रहा हूँ। जिस दिन ऐसा काम करूँगा कि जो आज तक ना तो किसी ने किया है और ना मेरे बाद कोई कर सकेगा उस दिन हव उड़ूँगा और इतना उडूँगा की किसी को दिखूँगा भी नही। इसी के साथ बोले कि हरियाणवी होने पर गर्व तो हमेशा से था परंतु आज वो गर्व रत्नावली मे आप सब के बीच आकर दोगुना हो गया है सभागार में मौजूद विद्यार्थियों को एक ही बात बोलूँगा की काच्चा काटो मौज करो पर अगर पूरी उम्र मौज करनी है तो साथ में महेनत भी करो।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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