सरकार द्वारा दी जा रही है सुविधाओं का लाभ उठाएं किसान, नई तकनीकों के माध्यम से फसल का विविधीकरण देगा बेहतर लाभ

पिहोवा 23 अक्टूबर उपमंडल अधिकारी नागरिक सोनू राम ने कहा कि फसल अवशेषों में आग लगाने वाले किसानों को सेटेलाइट के साथ-साथ कृषि विभाग के अन्य अधिकारियों के माध्यम से निगरानी रखी जा रही है। इन दोनों माध्यमों के जरिए उपमंडल पिहोवा में अब तक 42 जगहों पर फसल अवशेषों में आग लगाने की सूचना मिली है, इनमें से हरसेक सेटेलाइट से 8 और अन्य माध्यम से 34 सूचनाएं प्राप्त हुई है। फसल अवशेषों में आग लगाने वाले 42 किसानों के खिलाफ कार्रवाई की गई और लगभग एक लाख रुपए तक का जुर्माना भी किया गया है।
एसडीएम सोनू राम ने कहा कि कृषि विभाग के अधिकारियों को सख्त आदेश दिए गए है कि सभी अधिकारी और कर्मचारी फसल अवशेषों में आग लगाने वालों पर अपनी पैनी निगाह रखेंगे और ऐसे लोगों के चालान कर उन पर जुर्माना लगाना भी सुनिश्चित करेंगे। इन आदेशों की अवहेलना नहीं होनी चाहिए, सभी अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में निगरानी रखेंगे ताकि कोई भी व्यक्ति फसल अवशेषों में आग ना लगा सके। अगर कोई किसान या व्यक्ति फसल अवशेषों में आग लगाता है तो तुरंत कार्रवाई अमल में लाई जाए।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की तरफ से फसल अवशेषों का प्रबंधन करने के लिए किसानों को आर्थिक रूप से लाभ दिया जा रहा है। किसानों को प्रति एकड़ एक हजार रुपए की सहायता राशि उपलब्ध करवाई जा रही है। इस योजना का अधिक से अधिक किसानों को फायदा उठाना चाहिए। सीआरएम स्कीम के तहत कृषि विभाग की तरफ से आईईसी एक्टिविटी का आयोजन लगातार किया जा रहा है। इन गतिविधियों के माध्यम से किसानों को फसल अवशेषों में आग ना लगाने के फायदों और नुक्सान के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि किसान 15 नवम्बर तक गेहूं की बिजाई अपने खेतों में कर सकते हैं। इसके लिए किसानों के पास अभी समय है तथा वे पूरे संयम के साथ गेहूं की बिजाई कर सकते हैं।
एसडीएम सोनू राम ने किसानों से फसल अवशेष प्रबंधन के लिए अपना पंजीकरण करवाने की अपील करते हुए कहा कि 30 नवंबर तक अधिक से अधिक किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए पोर्टल पर अपना पंजीकरण करवाना चाहिए। इसके लिए प्रशासन और कृषि विभाग की तरफ से गांव-गांव में जाकर किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि खेतों में ही मशीन के बिना डीकम्पोजर से फसल अवशेष प्रबंधन करने, खेत से बाहर फसल अवशेषों का बेलर बनाकर प्रबंधन करने लिए अपना पंजीकरण करवाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा फसल अवशेष के एक्स-सीटू प्रबंधन की महत्ता को ध्यान में रखते हुए फसल अवशेष प्रबंधन स्कीम 2023-24 के अंतर्गत फसल अवशेष/पराली आपूर्ति श्रृंखला स्थापित करने हेतु पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मोड में पराली खरीदकर उपयोग करने वाले प्रमुख उद्योगों से आवेदन आमंत्रित किए जा रहे है। इस स्कीम के तहत किसान के खेतों से पराली की बेल एकत्रित करके प्रमुख उद्योगों द्वारा खरीदी जाएगी। उद्योगपति तथा किसान/किसान समूह/ग्रामीण उद्यमी किसानों की सहकारी समिति/एफपीओ/पंचायत के मध्य स्कीम अनुसार एग्रीमेंट किया जाएगा।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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