हरियाणा की लोक संस्कृति एवं परम्परा को संरक्षित करने का मंच है रत्नावली: प्रो. सोमनाथ सचदेवा
कुवि कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने किया रत्नावली समारोह के ब्रोशर का विमोचन
कुरुक्षेत्र, 13 अक्टूबर। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने मंगलवार को विश्वविद्यालय में 30 अक्टूबर से 2 नवंबर, 2026 तक आयोजित होने वाले चार दिवसीय हरियाणा दिवस राज्य स्तरीय रत्नावली समारोह के ब्रोशर का विमोचन किया। विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग द्वारा आयोजित होने वाले इस चार दिवसीय महोत्सव में हरियाणा की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं, लोक कलाओं, संगीत एवं नृत्य की विविध छटाएं देखने को मिलेंगी।
इस अवसर पर कुवि कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि रत्नावली हरियाणा की लोक संस्कृति एवं परम्परा को संरक्षित करने का मंच है। राज्यस्तरीय रत्नावली समारोह हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। यह समरोह विद्यार्थियों को अपनी लोक संस्कृति से जुड़ने तथा अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि लोकगीत, लोकनृत्य, रागनी, सांग और पारंपरिक कलाएं हरियाणा की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान हैं। ऐसे आयोजन युवा पीढ़ी में अपनी परंपराओं के प्रति सम्मान और गौरव की भावना विकसित करते हैं।
युवा एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग के निदेशक प्रो. विवेक चावला ने कहा कि रत्नावली समारोह विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रतिभा को मंच प्रदान करने के साथ-साथ हरियाणा की लोक कलाओं, सांस्कृतिक विरासत एवं परम्पराओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस वर्ष भी महोत्सव में विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं, लोक प्रस्तुतियों, कार्यशालाओं एवं प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाएगा, जिनमें विद्यार्थी उत्साहपूर्वक भाग लेंगे।
लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने कहा कि रत्नावली समारोह कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। रत्नावली का मंच हरियाणा की लोक संस्कृति, भाषा, वेशभूषा, संगीत और पारंपरिक कलाओं को व्यापक पहचान दिलाने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि रत्नावली के माध्यम से विश्वविद्यालय प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सराहनीय कार्य कर रहा है।
इस मौके पर कुवि कुलसचिव प्रो. वीरेन्द्र पाल, केयू छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. एआर चौधरी, युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक प्रो. विवेक चावला, लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया, उपनिदेशक डॉ. जिम्मी शर्मा, डॉ. सलोनी दीवान मौजूद थे।
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रत्नावली में इस बार 33 विधाओं का होगा मंचन
चार दिवसीय राज्य स्तरीय रत्नावली समारोह में हरियाणवी लोकगीत, भजन, रागनी, एकल एवं समूह नृत्य, हरियाणवी लूर, रसिया, लोक वेशभूषा, फैशन शो, नाटक, एकांकी, समूह गान, भाषण, प्रश्नोत्तरी सहित विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त लोक चित्रकला कार्यशाला, पारंपरिक हस्तकला एवं प्राचीन हरियाणवी वस्तुओं की प्रदर्शनियां भी समारोह के प्रमुख आकर्षण रहेंगी।
रत्नावली समारोह में लोक वाद्य संगीत, हरियाणवी कोरियोग्राफी, हरियाणवी चौपाल, सांगीतिक संध्या, हरियाणवी पगड़ी प्रतियोगिता, सांग प्रतियोगिता तथा प्रोफेशनल रागनी प्रतियोगिताएं आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इसके अतिरिक्त मिमिक्री एवं एकल अभिनय और हरियाणवी अथवा हरियाणा पर आधारित लघु फिल्म प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाएगा। महोत्सव के दौरान सहित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मकता, लोक कला एवं सांस्कृतिक प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।
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हरियाणा की पारंपरिक हस्तकला को मिलेगा प्रोत्साहन
हरियाणा की पारंपरिक हस्तकला एवं लोक कलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए लोक चित्रकला कार्यशाला एवं प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही बोहिया, इंड्ढी, पीढ़ा, बिंदरवाल, फुलझड़ी एवं सांझी जैसी पारंपरिक कलाओं और वस्तुओं के निर्माण, सजावट एवं प्रस्तुति से संबंधित गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। हरियाणा की प्राचीन वस्तुओं के संग्रह तथा चित्रकला की प्रदर्शनी भी महोत्सव का हिस्सा होगी। विद्यार्थियों के लिए मौके पर चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जाएगा।
