करनाल के आर्य समाज सेक्टर-6 में पाखंड खंडन सम्मेलन में आर्य समाज के सन्यासी, सन्यासियों, आचार्यो, हरियाणवी कलाकारों ने भाग लेकर पाखंड पर किया प्रहार, आर्य समाज से लघु सचिवालय तक आर्यो ने जनचेतना वाहन यात्रा निकाल कर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, मासूम शर्मा ने पाखंड खंडन पर प्रहार करते हुए तीसरा गीत भी किया लॉन्च
करनाल।
आर्य समाज भवन में आयोजित पाखंड खंडन एवं जन चेतना सम्मेलन में पाखंडवाद के खिलाफ आर्य जगत के सन्यासियों, आचार्यो और हरियाणवी गायक मासूम शर्मा ने पाखंडवाद पर प्रहार करते हुए कहा कि पाखंडवाद अब सहन नहीं होगा, यह वैदिक सनातन धर्म पर सीधा हमला है। हमारे देवी देवताओं, श्री कृष्ण, श्रीराम, महर्षि दयानंद सरस्वती पर रामपाल दास और उसके अनुयायी जो अापत्तिजनक बाते कर रहे है उसे सहन नहीं किया जाएगा। सरकार ऐसी पाखंडियों पर कार्रवाई करे। इस अवसर पर आर्य केंद्रीय सभा के प्रधान प्रो आनंद सिंह ने सम्मेलन की अध्यक्षता की। मंच संचालन आर्य दिलबाग लाठर ने किया।
इस अवसर पर आर्य जगत के सन्यासी एवं शुद्धि सभा के अध्यक्ष स्वामी सच्चिदानंद महाराज, सार्वदेशिक सभा से स्वामी आदित्यवेश जी, गुरूकुल कालवा के आचार्य राजेंद्र जी, स्वामी दिव्यानंद, स्वामी नित्यानंद, आर्यवीर दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य नंद किशोर, आचार्य संदीपन, आचार्य प्रदीप, वीरेंद्र आर्य, हरियाणवी गीत के लेखक हेरी लाठर और अमर, समाजसेवी धरमू, सौमन्या माथुर, सुभाष फौजी, सोम अरोडा, सुनीता नरवाल आदि ने अपने संबोधन में पाखंडवाद और पाखंडवाद फैलाने वाले को अभिशाप बताया। पाखंडवाद पर मासूम शर्मा ने अपना तीसरा गीत जाट वॉरियर आर्य समाज के मंच से लॉन्च भी किया। सभी के लिए लंगर भी आयोजित किया गया। इसके साथ मासूम शर्मा को आर्य केंद्रीय सभा की ओर से महर्षि दयानंद सरस्वती की कृति सत्यार्थ प्रकाश से सम्मानित किया गया। आर्य समाज के लोगों ने चेतना यात्रा में हिस्सा लिया और आर्य समाज से करनाल लघु सचिवालय में पहुंचे जहां उन्होंने तहसीलदार को मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। सन्यासियों ने कहा कि जब से रामपाल बाहर आया है उसने समाज के ताने बाने को खराब करने का काम किया है, इसलिए इसकी जमानत रद्द की जाए और इसे वापिस जेल भेजा जाए।
मासूम शर्मा ने कहा कि आज देश जिस बड़ी समस्या से जूझ रहा है, ऐसी ही स्थिति महर्षि दयानंद के समय भी थी। उस समय पाखंड चरम पर था और इसे खत्म करने के लिए महर्षि दयानंद ने शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि आज भी पाखंड काफी बढ़ा हुआ है और समाज को इसके खिलाफ जागरूक होने की जरूरत है। मासूम शर्मा ने कहा कि पाखंड को बढ़ावा देने में सरकारों की भी जिम्मेदारी है। उनके अनुसार, सरकारें वोट बैंक के डर से बाबाओं और ढोंगियों का साथ देती हैं। नेताओं को लगता है कि इन बाबाओं के पास बड़ी संख्या में समर्थकों की वोट हैं। उन्होंने कहा कि इसी सोच के कारण राजनीतिक लोग बाबाओं के सामने माथा टेकते हैं।
फिल्मी बाबे और तत्वदर्शी गानों का किया जिक्र
मासूम शर्मा ने बताया कि उन्होंने पाखंडवाद के खिलाफ ‘फिल्मी बाबे’ और ‘तत्वदर्शी’ नाम से गाने बनाए हैं। उन्होंने दावा किया कि ‘फिल्मी बाबे’ गाना पूरे देश में नंबर वन पर चर्चित हुआ। उनके अनुसार, इन गानों की लोकप्रियता से यह सामने आया कि पाखंड फैलाने वालों के पास जितना प्रभाव माना जाता है, उतना वास्तव में नहीं है।
उन्होंने कहा कि हो सकता है किसी विधानसभा क्षेत्र में किसी बाबा के समर्थकों की दो-चार हजार वोट हों, लेकिन सनातन की रक्षा के लिए खड़े लाखों लोग भी हैं। उनके अनुसार, जो नेता एक-दो हजार वोटों के लिए बाबाओं के दरबार में जाते हैं, उन्हें बड़ी संख्या में अन्य लोगों की नाराजगी का भी सामना करना पड़ सकता है।
सनातन संगठनों से एकजुट होने की अपील
मासूम शर्मा ने कहा कि जब राजनीतिक लोगों का बाबाओं के दरबार में जाना बंद हो जाएगा, तो इनकी दुकानें भी बंद हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि केवल आर्य समाज ही नहीं, बल्कि सभी सनातन संगठन एकजुट होकर काम करें। उन्होंने कहा कि वाद-विवाद और शास्त्रार्थ बाद में भी किए जा सकते हैं, लेकिन पहले समाज को एकजुट होकर अपनी ताकत दिखानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सनातन की रक्षा के लिए सभी संगठनों को साथ आना होगा और पाखंड के खिलाफ आवाज उठानी होगी। उनके अनुसार, समाज के जागने का भी एक समय होता है और फिलहाल समाज जाग रहा है।
धमकियां मिलने और पोस्टर फाड़ने की अपील का भी जिक्र
मासूम शर्मा ने कहा कि उन्हें काफी धमकियां मिली हैं। उन्होंने कहा कि हेरी लाठर को भी धमकियां मिली हैं और कई लोग उन्हें इंटरनेट पर निशाना बना रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पाखंडियों के समर्थक भी उन्हें निशाना बना रहे हैं।
मासूम ने बताया कि उन्होंने एक बार अपनी सोशल मीडिया कहानी में पाखंडियों के पोस्टर फाड़ने की अपील की थी। इसके बाद इसका असर भी देखने को मिला। हालांकि, उन्होंने कहा कि कुछ गरीब लोगों को पाखंडियों के समर्थकों की ओर से कानूनी नोटिस भिजवाए जाने लगे और उन्हें थाने में कार्रवाई की धमकी दी गई। उन्होंने लोगों से ऐसी धमकियों से नहीं डरने की अपील करते हुए कहा कि जब तक पाखंड के खिलाफ चल रहा अभियान अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंचता, तब तक समाज को एकजुट रहना होगा। उन्होंने कहा कि समाज के जागने का यह समय बार-बार नहीं आता और इस समय लोगों को सक्रिय होकर काम करना चाहिए।
