नीलोखेड़ी/ करनाल, 25 जुलाई। हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि कारगिल विजय दिवस 26 जुलाई के अवसर पर प्रदेश के सभी कारगिल शहीदों के स्मारकों एवं प्रतिमाओं पर संबंधित ग्राम पंचायतों द्वारा श्रद्धांजलि एवं पुष्पांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। शहीदों और भारतीय सैन्य बलों के प्रति सम्मान का भाव रखने वाले सभी नागरिक, विशेषकर युवा शक्ति, ऐसे आयोजनों में बढ़-चढ़कर भाग लें और राष्ट्र के अमर वीरों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करें।
डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि 1999 के कारगिल संघर्ष में देश के 527 वीर सैनिकों ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था। इनमें हरियाणा के भी 58 रणबांकुरे शामिल थे, जिन्होंने दुर्गम पर्वतीय मोर्चों पर शत्रु से लोहा लेते हुए वीरगति प्राप्त की। इनमें से अधिकांश जवान अपने जीवन के स्वर्णिम यौवनकाल में ही राष्ट्र रक्षा की बलिवेदी पर अमर हो गए। डॉ. चौहान ने कहा कि 1999 में पाकिस्तान की सेना ने छलपूर्वक सर्दियों के दौरान भारतीय सेना द्वारा मौसम की विषम परिस्थितियों के कारण अस्थायी रूप से खाली की गई कारगिल क्षेत्र की ऊँची चौकियों पर गुप्त रूप से कब्ज़ा कर लिया था। इसके बाद भारतीय सेना ने अदम्य साहस, अद्वितीय शौर्य और सर्वोच्च बलिदान का परिचय देते हुए ऑपरेशन विजय चलाया तथा दुश्मन को परास्त कर भारत की प्रत्येक इंच भूमि को पुनः अपने नियंत्रण में लिया। 26 जुलाई 1999 को मिली यह ऐतिहासिक विजय आज पूरे देश में कारगिल विजय दिवस के रूप में गर्व और कृतज्ञता के साथ मनाई जाती है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा के 58 कारगिल शहीद केवल अपने परिवारों या अपने-अपने गाँवों के नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश और राष्ट्र की अमूल्य धरोहर हैं। प्रदेश के अनेक जिलों के इन वीर सपूतों ने बर्फ से ढकी दुर्गम चोटियों पर अद्वितीय साहस और पराक्रम का परिचय देते हुए तिरंगे की आन, बान और शान के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा। डॉ. चौहान ने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य विजय का स्मरण नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान की अमर गाथा का पर्व है। प्रत्येक ग्राम पंचायत, विद्यालय, महाविद्यालय और सामाजिक संस्था को अपने क्षेत्र के शहीदों की स्मृतियों को जीवंत रखने का अभियान चलाना चाहिए। शहीद स्मारकों की नियमित देखभाल, स्वच्छता, वृक्षारोपण तथा विद्यार्थियों के लिए शहीदों के जीवन पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि नई पीढ़ी राष्ट्र सेवा और देशभक्ति के मूल्यों से प्रेरित हो सके।
डॉ. चौहान ने कहा कि कारगिल विजय दिवस पर केवल पुष्प अर्पित करना ही पर्याप्त नहीं है। सच्ची श्रद्धांजलि तब होगी जब प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करे, राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखे तथा देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के प्रति सदैव सजग रहने का संकल्प ले। यही कारगिल के अमर बलिदानियों के प्रति हमारी वास्तविक श्रद्धांजलि होगी।उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि 26 जुलाई को अपने निकटतम शहीद स्मारक पर पहुँचकर पुष्पांजलि अर्पित करें, वीर शहीदों के परिजनों का सम्मान करें तथा युवा पीढ़ी को कारगिल के अमर बलिदानियों की प्रेरक गाथाओं से परिचित कराएँ। राष्ट्र उन वीर सपूतों का सदैव ऋणी रहेगा, जिनके त्याग और बलिदान के कारण भारत की सीमाएँ सुरक्षित हैं और तिरंगा आज भी उसी गौरव के साथ लहरा रहा है।
