करनाल, 23 जुलाई। मारुति सुजुकी इंडिया लि. के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (मानव संसाधन) संजीव सिन्हा ने आज यहां बाबू मूलचंद जैन राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में उन्नत विनिर्माण प्रयोगशाला (एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग लैब) का उद्घाटन किया। कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत स्थापित की गई इस प्रयोगशाला पर ढाई करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।
उद्घाटन के बाद श्री सिन्हा ने मारुति सुजुकी इंडिया लि. के अन्य पदाधिकारियों, कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के अतिरिक्त निदेशक राजकुमार, प्राचार्य डा. कृष्ण कुमार व राकेश भाटिया के साथ लैब का मुआयना किया। बाद में आईटीआई छात्रों को संबोधित करते हुए श्री सिन्हा ने कहा कि मारुति सुजुकी लि. का सपना है कि हर हिंदुस्तानी के पास गाड़ी हो। सपना पूरा करने के लिए हुनर का होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि मारुति सुजुकी लि. और आईटीआई के सहयोग से यहां प्रयोगशाला स्थापित की गई है। यह विद्यार्थियों पर निर्भर है कि वे इसका कितना फायदा उठाते हैं। यहां के शिक्षकों को मारुति सुजुकी लि. से सेवानिवृत अधिकारी प्रशिक्षण देंगे। साथ ही वे विद्यार्थियों को भी लंबे अनुभव के आधार पर उनका मार्गदर्शन करेंगे। श्री सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी सपना है कि देश के युवाओं को तकनीकी और औद्योगिक प्रशिक्षण देकर उन्हें योग्य व आत्मनिर्भर बनाया जाए। इसके लिए स्किल इंडिया मिशन अभियान भी चलाया जा रहा है।
श्री सिन्हा ने कहा कि इस समय भारत सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के मामले में दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। जल्दी ही यह पांचवें या चौथे नंबर पर पहुंचने वाली है। मारूति सुजुगी इस समय एक साल में 24 लाख गाडिय़ां बना रही है। 2030 तक प्रति वर्ष 40 लाख गाडिय़ां बनाने का लक्ष्य है। सोनीपत जिला के खरखौदा में और गुडग़ांव में 10-10 लाख गाडिय़ां बनाई जाएंगी। गुजरात में दस लाख गाडिय़ां हर साल बनाने के लिए दूसरा प्लांट लगाया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि भारत में श्रम शक्ति की कमी नहीं है बल्कि कुशल (स्किल्ड ) व्यक्तियों की कमी है। युवाओं को तकनीकी कौशल के साथ-साथ सॉफ्ट स्किल यथा- अनुशासन, समय की प्रतिबद्घता, सक्रिय श्रवण, टीम वर्क, समस्या समाधान, नेतृत्व आदि की ओर भी ध्यान देना होगा। जीवन के पहले 20 सालों में की गई अथक मेहनत से अगले 80 साल आसानी से बीतेंगे। यदि पहले दो दशक मौज-मस्ती की तो आगामी 80 साल संघर्ष करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सीखने के लिए दृढ. इच्छाशक्ति जरूरी है। परिवार के साथ-साथ समाज व राष्ट्र के उत्थान में भी योगदान देना है। आज भारत से अनेक युवा स्किल्ड होकर विदेशों में भी रोजगार के लिए जा रहे हैं। सीओडी (क्रिएटर, ऑपरेटर एंड डिस्ट्रॉयर) पर अमल करते हुए हमें नई चीजों का सृजन और संचालन करते हुए बुरी आदतों को छोडऩा है।
इससे पहले प्राचार्य डा. कृष्ण कुमार ने बच्चों को स्थापित की गई नई प्रयोगशाला से अधिकाधिक सीखने के लिए प्रेरित किया। दूसरे प्राचार्य राकेश भाटिया ने बताया कि नई लैब में मोटर मैकेनिकल व्हीकल ट्रेड के एक साथ 50 से अधिक विद्यार्थी ट्रेनिंग प्राप्त कर सकते हैं। यहां से प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को मारुति उद्योग लि. में नौकरी के अवसर प्राप्त होंगे।
उल्लेखनीय है कि मारुति सुजुकी की ओर से करनाल आईटीआई में स्थापित यह 5वीं लैब की। प्रदेश में 11 लैब खोली जाएंगी। चार पहले खोली जा चुकी हैं।
इस मौके पर ट्रेनर यशपाल आहूजा, रूमेल राणा, मारुति सुजुकी के जीएम समद खान, डीजीएम चिन्मय, अतिरिक्त निदेशक राजकुमार का स्वागत किया गया।
