कुरुक्षेत्र, 23 जुलाई। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) द्वारा विश्वविद्यालय प्रबंधन अध्ययन संस्थान के सहयोग से आयोजित चार-सप्ताहीय संकाय अभिमुखीकरण कार्यक्रम के अठारहवें दिन चार शैक्षणिक सत्रों का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा, उद्योग-अकादमिक सहयोग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शोध उपकरणों, शिक्षकीय नैतिकता तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप परीक्षा एवं मूल्यांकन सुधार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
प्रथम सत्र में गुरुग्राम विश्वविद्यालय की डीन अकादमिक अफेयर्स प्रो. अमरजीत कौर ने उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत बनाने के विभिन्न मॉडल, सिद्धांत तथा रणनीतियों की जानकारी दी। साथ ही प्रभावी साझेदारी, अनुसंधान सहयोग और संस्थागत विकास के लिए उपलब्ध फंडिंग स्रोतों पर भी प्रकाश डाला। द्वितीय सत्र में रिसर्च शिक्षा, नई दिल्ली के संस्थापक डॉ. अजय कुमार चौहान ने शोध कार्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने विभिन्न एआई आधारित शोध उपकरणों का परिचय देते हुए बताया कि इन तकनीकों की सहायता से साहित्य समीक्षा, शोध लेखन, चित्र एवं आरेख निर्माण तथा शोध की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जा सकता है।
तृतीय सत्र में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. ए.आर. चौधरी ने “शिक्षक के नैतिक मूल्य एवं आचार संहिता” विषय पर व्याख्यान देते हुए शिक्षण नैतिकता, कक्षा प्रबंधन, शैक्षणिक ईमानदारी तथा शोध में डेटा की सत्यनिष्ठा के महत्व को रेखांकित किया। प्रो. चौधरी ने कहा कि एक शिक्षक केवल ज्ञान का संचारक ही नहीं, बल्कि समाज के नैतिक मूल्यों का संवाहक भी होता है। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों के लिए आदर्श आचरण प्रस्तुत करने तथा शिक्षा में गुणवत्ता, पारदर्शिता और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने का आह्वान किया।” उन्होंने सूचना का अधिकार (आरटीआई) से जुड़े प्रावधानों और शिक्षकों की जिम्मेदारियों पर भी विस्तार से चर्चा की ।
चतुर्थ सत्र में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर प्रो. अनिल कुमार वशिष्ठ ने “राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप उच्च शिक्षा प्रणाली में परीक्षा एवं मूल्यांकन घटकों में अपेक्षित सुधार” विषय पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप परीक्षा एवं मूल्यांकन प्रणाली को अधिक सतत, पारदर्शी, कौशल-आधारित तथा शिक्षार्थी-केंद्रित बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने परिणाम-आधारित शिक्षा, निरंतर मूल्यांकन और बहुआयामी आकलन की उपयोगिता पर भी विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम का समापन डॉ. मधु द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। कार्यक्रम का सफल संचालन एवं समन्वय यूजीसी-एमएमटीटीसी की निदेशिका प्रो. प्रीति जैन, समन्वयक प्रो. अनिल कुमार मित्तल तथा सह-समन्वयक डॉ. भंवर सिंह के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
