कुरुक्षेत्र, 17 जुलाई। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र (केविके), कुरुक्षेत्र द्वारा जिले के गांव धनौरा जाट्टान में प्राकृतिक खेती विषय पर एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के कुलपति प्रोफेसर बीआर काम्बोज और विस्तार शिक्षा निदेशक डा. नरेश कौशिक के मार्गदर्शन व दिशा निर्देश के अनुसार कृषि विज्ञान केंद्र, कुरुक्षेत्र द्वारा राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन प्रोजेक्ट के अन्तर्गत इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कृषि विज्ञान केंद्र, कुरुक्षेत्र के वैज्ञानिक डॉक्टर अश्वनी कुमार (पौध रोग) तथा डॉक्टर सरिता रानी (सस्य विज्ञान) की टीम ने प्राकृतिक खेती को जिले में बढ़ावा देने के उद्देश्य से किसानों को प्रशिक्षित किया ताकि जिले के ज़्यादा से ज़्यादा किसानों को जागरुक किया जा सके। कृषि विज्ञान केंद्र, कुरुक्षेत्र की वैज्ञानिक डॉक्टर सरिता रानी (सस्य विज्ञान) ने किसानों को रासायनिक खाद और दवाइयों के अंधाधुंध प्रयोग से मिट्टी, पर्यावरण तथा स्वास्थ्य को होने वाले नुक़सान के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि खेती में प्रयोग होने वाले रासायनिक पदार्थों रूपी जहर के सेवन से आज हर घर में कोई ना कोई सदस्य किसी ना किसी बीमारी से परेशान है और हमे अपने, अपने परिवार तथा देशवासियों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक खेती को अपनाना होगा। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती के मुख्य घटक जीवामृत तथा घनजीवामृत बनाने की प्रक्रिया तथा प्रयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
कृषि विज्ञान केंद्र, कुरुक्षेत्र के ही वैज्ञानिक डॉक्टर अश्वनी कुमार ने फसलों में होने वाले रोगों की रोकथाम के लिए प्राकृतिक खेती में खट्टी लस्सी एवम जीवाणुओं के प्रयोग के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी देते हुए किसानों से प्राकृतिक खेती को अपनाने का आहवाहन किया। उन्होंने किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किसानों के लिए चलाए जा रहे कार्यकलापों के बारे में भी बताया। पशुपालन विभाग से आए पशु चिकित्सक डॉक्टर प्रवीण कुमार ने किसानों को बताया कि यदि प्राकृतिक खेती द्वारा चारे का उत्पादन करके पशुओं को खिलाया जाए तो इससे उनकी सेहत व दूध की गुणवत्ता में सकारात्मक सुधार किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा प्राकृतिक खेती को जिले में बढ़ावा देने के उद्देश्य से अलग-अलग गाँवों में 56 प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कुरुक्षेत्र के किसानों से अपील करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती की इस मुहिम को सफल बनाने में सभी अपना योगदान दें। प्रशिक्षण में आए हुए किसानों ने इस प्रशिक्षण में अपनी सफल भागीदारी दिखाते हुए वैज्ञानिकों की बातों को ध्यान से सुना और अपने अनुभव भी उनसे सांझा किये। वैज्ञानिकों ने गाँव के प्रगतिशील किसान श्री धर्मदेव जो प्राकृतिक खेती अपना रहे हैं, के खेतों का निरीक्षण भी किया। गाँव धनौरा के किसान जितेन्द्र सिंह गिल तथा अनिल गोयल ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के आयोजन के लिए सभी किसानों की तरफ़ से कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों का धन्यवाद किया।
गाँव के पूर्व सरपंच प्रीतपाल सिंह, ज़ोरावर सिंह, धर्मपाल, ऋषिपाल, अंतरिक्ष, अमित समेत गाँव के किसानों ने प्रशिक्षण का लाभ उठाया।
