कुरुक्षेत्र, 16 जुलाई। साइबर अपराधों की लगातार बदलती चुनौती और अपराधियों द्वारा अपनाए जा रहे नए-नए तरीकों से प्रभावी ढंग से निपटने के उद्देश्य से जिला पुलिस कुरुक्षेत्र द्वारा पुलिस के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए एक दिवसीय साइबर सुरक्षा सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में देश के प्रसिद्ध साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ अमित दूबे ने पुलिस अधिकारियों को साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप, डिजिटल साक्ष्यों के महत्व, आधुनिक तकनीकों तथा वैज्ञानिक अनुसंधान के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी। सेमिनार में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ शुभम त्रिपाठी ने भी आधुनिक साइबर जांच और डिजिटल विश्लेषण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण दिया, जबकि आईसीआईसीआई बैंक के स्टेट नोडल ऑफिसर ने बैंकिंग प्रणाली से जुड़े सीमित लेकिन महत्वपूर्ण पहलुओं पर जानकारी साझा की।
पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ अमित दूबे ने अपने संबोधन में कहा कि आज साइबर अपराध केवल मोबाइल फोन या बैंक खातों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि अपराधी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल इंजीनियरिंग, फर्जी वेबसाइट, नकली मोबाइल एप्लीकेशन, फिशिंग लिंक, क्यूआर कोड, रिमोट एक्सेस एप, डीपफेक तकनीक तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। ऐसे में पुलिस अधिकारियों के लिए यह आवश्यक है कि वे अपराधियों की कार्यप्रणाली को गहराई से समझें और तकनीक के साथ स्वयं को लगातार अपडेट रखें।
उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों की जांच में शुरुआती कुछ घंटे सबसे अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। यदि शिकायत प्राप्त होते ही समयबद्ध कार्रवाई की जाए, डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित किया जाए और संबंधित एजेंसियों के साथ तत्काल समन्वय स्थापित किया जाए तो अपराधियों तक पहुंचना और पीड़ितों की धनराशि वापस दिलाने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। उन्होंने अधिकारियों को डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने की प्रक्रिया, मोबाइल और कंप्यूटर फॉरेंसिक, आईपी एड्रेस विश्लेषण, ई-मेल ट्रैकिंग, सोशल मीडिया अकाउंट की जांच, डिजिटल फुटप्रिंट, ब्लॉकचेन आधारित ट्रांजेक्शन की प्रारंभिक समझ तथा ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (ओएसआईएनटी) के प्रभावी उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ अमित दूबे ने कई वास्तविक साइबर अपराधों के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि कई बार छोटी-सी डिजिटल जानकारी भी किसी बड़े अपराध का खुलासा करने में निर्णायक भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में सफल पुलिस अधिकारी वही है जो कानून के साथ-साथ तकनीक को भी समान रूप से समझता हो। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से अपील की कि प्रत्येक साइबर शिकायत को गंभीरता से लें, पीड़ित को तत्काल मार्गदर्शन दें और अनुसंधान के दौरान तकनीकी साक्ष्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
सेमिनार में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ शुभम त्रिपाठी ने भी पुलिस अधिकारियों को डिजिटल जांच की आधुनिक कार्यप्रणाली से अवगत कराया। उन्होंने साइबर अपराधों की जांच के दौरान उपलब्ध तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग, डिजिटल डेटा के विश्लेषण, ऑनलाइन गतिविधियों की ट्रैकिंग, साइबर इंटेलिजेंस तथा विभिन्न डिजिटल टूल्स के माध्यम से अपराधियों तक पहुंचने के व्यावहारिक तरीकों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तकनीकी दक्षता और सही समय पर की गई कार्रवाई ही साइबर अपराधों के सफल खुलासे की सबसे महत्वपूर्ण कुंजी है। उन्होंने अधिकारियों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों में अपनाई जाने वाली जांच प्रक्रिया पर भी विस्तार से चर्चा की।
सेमिनार के दौरान आईसीआईसीआई बैंक के स्टेट नोडल ऑफिसर अनूप दलाल ने साइबर ठगी के मामलों में बैंकों की भूमिका, संदिग्ध खातों को समय पर फ्रीज करने की प्रक्रिया तथा पुलिस और बैंक के बीच समन्वय के महत्व पर संक्षिप्त जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समय पर सूचना मिलने पर बैंकिंग स्तर पर त्वरित कार्रवाई अनुसंधान को गति देने में सहायक होती है।
साइबर अपराधों की जांच में विशेषज्ञों का अनुभव और तकनीकी प्रशिक्षण पुलिस के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण: एसपी
साइबर अपराधों से निपटने के लिए तकनीक की गहरी समझ जरूरी
पुलिस अधीक्षक चन्द्र मोहन ने कहा कि साइबर अपराधों की जांच में विशेषज्ञों का अनुभव और तकनीकी प्रशिक्षण पुलिस के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आज अपराधियों की कार्यप्रणाली तेजी से बदल रही है, इसलिए पुलिस अधिकारियों का निरंतर प्रशिक्षण समय की आवश्यकता बन गया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम पुलिस की तकनीकी क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ अनुसंधान की गुणवत्ता और कार्यकुशलता में भी उल्लेखनीय वृद्धि करते हैं।
सेमिनार के समापन पर पुलिस अधीक्षक चन्द्र मोहन ने साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ अमित दूबे का विशेष रूप से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने अपने वर्षों के अनुभव, व्यावहारिक ज्ञान और वास्तविक मामलों के उदाहरणों के माध्यम से पुलिस अधिकारियों को अत्यंत उपयोगी प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने कहा कि अमित दूबे द्वारा सांझा की गई जानकारी साइबर अपराधों की जांच को अधिक प्रभावी, वैज्ञानिक और परिणामोन्मुख बनाने में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ शुभम त्रिपाठी का भी धन्यवाद करते हुए कहा कि उनके तकनीकी सत्र ने अधिकारियों को आधुनिक डिजिटल जांच की नई समझ प्रदान की। साथ ही उन्होंने आईसीआईसीआई बैंक के स्टेट नोडल ऑफिसर का भी आभार व्यक्त करते हुए कहा कि साइबर अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पुलिस, बैंकिंग संस्थानों और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय आवश्यक है।
अंत में पुलिस अधीक्षक ने कहा कि जिला पुलिस भविष्य में भी ऐसे विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करती रहेगी, ताकि प्रत्येक पुलिस अधिकारी बदलती तकनीक के अनुरूप स्वयं को तैयार रख सके और साइबर अपराधियों के विरुद्ध और अधिक प्रभावी कार्रवाई करते हुए आमजन को त्वरित न्याय एवं सुरक्षा प्रदान कर सके। पुलिस अधीक्षक और डीएसपी शाहबाद सिद्धार्थ ने वक्ताओं को स्मृति चिन्ह देकर सम्नानित किए ।
