अम्बाला, 26 जून: श्री गुरू ग्रंथ साहिब विद्या केंद्र सेवा समिति रजि., गांव बहबलपुर, जिला अंबाला में धन-धन संत कबीर दास जी का 628 वां प्रकाश पर्व (जन्म दिहाड़ा) श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ बच्चों द्वारा राम-नाम के सुमिरन और कीर्तन से किया गया, जिससे संगत भाव-विभोर हो गई।
इस अवसर पर कथा वाचक हरप्रीत सिंह निसाना वाली (बूढ़ा डल जत्थेदार) ने संत कबीर दास जी के जीवन, शिक्षाओं एवं समाज सुधार में उनके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संत कबीर दास जी का जन्म वर्ष 1398 ईस्वी (विक्रमी संवत 1455) में लहरतारा, काशी (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। उनके माता-पिता का नाम नीरू और नीमा, पत्नी का नाम लोई, पुत्र का नाम कमाल तथा पुत्री का नाम कमाली था। उनके गुरु स्वामी रामानंद जी थे।
उन्होंने कहा कि संत कबीर दास जी ने अपने समय में समाज में फैली धार्मिक कट्टरता, पाखंड एवं बाहरी आडंबरों का विरोध करते हुए मानवता, समानता, सत्य, प्रेम और ईश्वर भक्ति का संदेश दिया। उन्होंने सभी लोगों को जाति-पांति और ऊंच-नीच से ऊपर उठकर प्रभु का सच्चे मन से स्मरण करने तथा मानव सेवा को ही सबसे बड़ा धर्म मानने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि परमात्मा द्वारा बनाई गई मानव देह का सम्मान करना चाहिए तथा गुरु की वाणी के अनुसार जीवन व्यतीत करने से ही सच्ची शांति और मुक्ति प्राप्त होती है।
विद्यालय की सेवा एवं विकास कार्यों में चेयरमैन बाबा ठाकुर सिंह का विशेष सहयोग एवं मार्गदर्शन निरंतर प्राप्त हो रहा है। समिति के सदस्यों ने उनके योगदान की सराहना करते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना की।
इस अवसर पर मुख्य सेवादार बीबी भूपिन्दर कौर, बलजीत सिंह छड़बड़, सुखविंदर सिंह बहबलपुर, सचिव महान सिंह पटियाला, बुध सिंह मनीमाजरा, स्वरूप सिंह बडोला, सेवादार जगतार सिंह, गुरचरण सिंह मरदों साहिब, सरपंच बीबी अमरजीत कौर सहित बड़ी संख्या में सेवा संगत एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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