करनाल, 8 जून। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कृषि विज्ञान केन्द्र, उचानी द्वारा कृषि विभाग के सहयोग से 8 जून को ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत फसलों में उर्वरकों का संतुलित प्रयोग विषय पर असंध ब्लॉक के गोल्ली और मोर माजरा गांव में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक करना था। केंद्रीय सरकार हरियाणा सरकार तथा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ बलदेव राज काम्बोज, निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ नरेश कौशिक तथा कृषि विज्ञान केंद्र उचानी के संयोजक डॉ महा सिंह के विचारों को किसान भाइयों तक पहुँचाने के लिए इन किसान गोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है । इस अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र, उचानी से डॉ. विजय कुमार कौशिक, जिला विस्तार विशेषज्ञ (फार्म प्रबंधन), डॉ. नीरज, डॉ प्रियंका आदि केन्द्रीय मृदा लवणता अनुसंधान केन्द्र तथा कृषि विभाग से रजत, कृषि सुपरवाईजर और राजेश बी टी एम उपस्थित रहे।
इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. विजय कुमार कौशिक ने किसानों को फसलों में उर्वरकों के संतुलित एवं वैज्ञानिक प्रयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसान कृषि विश्वविद्यालय द्वारा अनुशंसित मात्रा में ही उर्वरकों का प्रयोग करना होगा। ज्यादा उर्वरकों के इस्तेमाल से पैदावार की गारंटी तो नहीं हैं परन्तु खेती की लागत गारंटी से बढ़ जाएगी। इसलिए सभी किसान भाई इन रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल कम करके, जैविक और प्राकृतिक तरीके से भूमि की ताकत और उर्वरा शक्ति को बढ़ाए। उन्होंने बताया कि आवश्यकता से अधिक उर्वरकों के प्रयोग से न केवल उत्पादन लागत बढ़ती है, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने किसान भाइयों को अपनी आय बढ़ाने के लिए पारंपरिक खेती को छोडक़र कृषि संबंधित अन्य रोजगार अपनाने को कहा। किसान भाई डेयरी फार्मिंग, मछली पालन, झींगा पालन, खुम्भी फार्मिंग, कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन आदि को अपनाकर अपनी आमदनी केवल ढाई गुना ही नहीं अपितु पाँच से छ: गुना तक बधाई जा सकती हैं । इसके साथ ही उन्होंने धान की सीधी बिजाई (डीएसआर) तकनीक के लाभों पर प्रकाश डालते हुए किसानों को जल संरक्षण एवं श्रम लागत में कमी के लिए इस तकनीक को अपनाने की सलाह दी।
सी एस एस आर आई से आए वैज्ञानिकों ने भी किसानों को उर्वरको के सीमित इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया।
कृषि सुपरवाईजर रजत और बी टी एम राजेश ने किसानों को विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कृषि योजनाओं एवं अनुदान संबंधी जानकारी प्रदान की तथा प्राकृतिक खेती के बारे में बताया। कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने विशेषज्ञों से विभिन्न कृषि समस्याओं पर चर्चा की तथा संतुलित उर्वरक प्रयोग एवं आधुनिक खेती तकनीकों के संबंध में अपने प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा समाधान किया गया।
