नीलोखेड़ी/ करनाल, 8 जून। भारत की सभ्यता और संस्कृति को समझने के लिए हमें आचार्य चाणक्य और महाराज मनु से लेकर डॉ. भीमराव अंबेडकर, महात्मा गांधी व पंडित दीनदयाल उपाध्याय सरीखे राजनीतिक महान विचारकों विचारों का अध्ययन करना चाहिए। उनके सिद्धांत आज भी समाज, प्रशासन और व्यक्तिगत जीवन में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। यह टिप्पणी हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने की। वे आज संस्थान में चल रहे दयाल सिंह कॉलेज, करनाल के विद्यार्थियों के लिए आयोजित तीस दिवसीय इंटर्नशिप कार्यक्रम में प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय ज्ञान परंपरा को आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। कार्यक्रम के समन्वयक एवं हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के सहायक आचार्य वजीर सिंह ने डॉ. चौहान का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया तथा पहुंचने पर उनका आभार व्यक्त किया।
डॉ. चौहान ने विद्यार्थियों को नीलोखेड़ी की ऐतिहासिक यात्रा से भी परिचित कराया। उन्होंने बताया कि देश के विभाजन के समय विस्थापित लोगों के पुनर्वास के लिए सबसे पहले कुरुक्षेत्र में शिविर स्थापित किए गए थे। वर्ष 1948 में अचानक हुई भारी वर्षा के कारण इन शिविरों में रहने वाले लोगों के सामने गंभीर चुनौतियां उत्पन्न हो गईं। उस समय पुनर्वास कार्य की जिम्मेदारी बंगाल के मूल इंजीनियर एस.के. डे के पास थी। उन्होंने केंद्र सरकार से विचार-विमर्श कर एक नई नगरी बसाने की योजना बनाई और घने जंगल वाले क्षेत्र में लोगों को रोजगार से जोड़ते हुए नीलोखेड़ी नगर की स्थापना की।
उन्होंने बताया कि प्रारंभिक दौर में इस परियोजना को “मजदूर मंजिल” के नाम से जाना जाता था। समय के साथ यह देश की एक आदर्श पुनर्वास एवं सामुदायिक विकास परियोजना बन गई। इसकी सफलता से प्रभावित होकर तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू स्वयं नीलोखेड़ी आए तथा संसद में भी नीलोखेड़ी मॉडल की प्रशंसा करते हुए देशभर में ऐसे दस हजार नगर स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. चौहान ने बताया कि एस.के. डे बाद में भारत के पहले पंचायती राज मंत्री बने और ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।डॉ. चौहान ने कहा कि आगामी समय में “नीलोखेड़ी उत्सव” का आयोजन किया जाएगा, जिसमें विद्यार्थी शहर के वरिष्ठ नागरिकों और बुजुर्गों से मिलकर नीलोखेड़ी के इतिहास एवं विकास से जुड़ी स्मृतियों को संकलित करेंगे। विद्यार्थियों द्वारा लिए गए साक्षात्कारों और वीडियो पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाई जाएगी ।
निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि नीलोखेड़ी को जिस उद्देश्य और दूरदर्शी सोच के साथ बसाया गया था, वह अपने समय की एक अनूठी विकास परियोजना थी। हालांकि बाद में आई विभिन्न चुनौतियों और परिस्थितियों के कारण इस मॉडल के कई सपने अधूरे रह गए। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि हम सभी मिलकर उस अधूरे सपने को साकार करें। हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान इस दिशा में पहल करते हुए नीलोखेड़ी की ऐतिहासिक विरासत, विकास यात्रा और मूल भावना को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य करेगा, ताकि नीलोखेड़ी एक बार फिर देश के लिए प्रेरणा स्रोत बन सके।
इस अवसर पर राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान से सलाहकार गुरबिंदर सिंह, हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के सहायक आचार्य डॉ. सुशील मेहता, संदीप कुमार सहित संस्थान के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। वहीं दयाल सिंह कॉलेज, करनाल के इंटर्नशिप कर रहे विद्यार्थियों ने भी कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया और नीलोखेड़ी के इतिहास, भारतीय चिंतन तथा हिंदी भाषा के महत्व से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।
