कुरुक्षेत्र, 2 जून : देवताओं ने भी आत्मा शुद्धि एवं शक्तियों को प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की है। मनुष्य जीवन में अगर तप एवं सेवा का मौका मिलता है तो यह परमात्मा की कृपा एवं आशीर्वाद है। मंगलवार को जग ज्योति दरबार में चल रही कठोर पंच धूणी अग्नि तपस्या के संकल्प के साथ आग के ढेरों के बीच बैठे महंत राजेंद्र पुरी के दर्शन एवं आशीर्वाद के लिए हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा के विभिन्न शहरों सहित दिल्ली व उत्तराखंड से भी दूर दूर से श्रद्धालु पहुंचे। इस मौके पर संत महापुरुषों के साथ गणमान्य लोगों ने भी अग्नि तपस्या को नमन कर आशीर्वाद लिया। महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि ज्येष्ठ महीने में तप के सौभाग्य देवता भगवान सूर्य हैं। इस महीने में सूर्य की तपिश सबसे अधिक होती है। ज्येष्ठ महीने को शरीर व आत्मा की तपस्या के लिए श्रेष्ठ एवं संयम और सेवा का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने कहा कि इस समय में तपस्या, व्रत और साधना करना शरीर और मन को कठोर बनाता है। इस महीने में सूर्य की पूजा विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है, जिससे उनकी कृपा प्राप्त होती है और जीवन में खुशहाली आती है। महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि जल दान को भी इस महीने में विशेष पुण्यकारी माना जाता है। ज्येष्ठ माह में जहां भगवान श्री राम भक्त हनुमान जी की पूजा का भी विशेष महत्व है वहीं वरुण देव की पूजा भी इस महीने में विशेष फलदायी मानी गई है। इस अवसर पर कुलदीप सिंह, भगवान दास, सरप्रीत सिंह, जसबीर कौर, रोशन लाल, अमृत पाल, गुरप्रीत कौर, अंकित शर्मा, सुमन बाला, इंद्रजीत कौर, मांगे राम, उर्मिला देवी, राम सिंह, अमन कुमार, रंजीत सिंह संधू, दर्शन लाल, सतीश कुमार, अजय कुमार, स्वर्ण सिंह, कुलदीप कौर, बलविंदर कौर, मंजीत, गुरचरण सिंह, सतपाल, गुरमेल सिंह, अजय राठी, विजय राठी, अक्षय राठी व कन्हैया लाल इत्यादि भी मौजूद रहे।
