कुरुक्षेत्र। प्रसिद्ध दु:खभंजन मंदिर में मंगलवार को हवन यज्ञ किया गया जिसमें वीर बजरंगी के भक्तों ने सबकी सुख-शांति के लिए पूर्ण आहुति डाली। वीर बजरंगी को सिंदूर व फूलों से सजाया गया। बजरंगी सरदार कुलवंत सिंह भट्टी ने कहा कि हनुमानजी प्रभु श्रीराम के सबसे अनन्य, निस्वार्थ और परम भक्त हैं। हनुमानजी ने कभी भी अपने महान कार्यों के लिए कोई श्रेय या फल की इच्छा नहीं रखी। उनका हर कार्य केवल प्रभु श्री राम को प्रसन्न करने के लिए होता था। उनका रोम-रोम श्रीराम के नाम से स्पंदित है। एक पौराणिक प्रसंग के अनुसार, जब माता सीता ने उन्हें अपना एक मोतियों का हार दिया, तो हनुमानजी ने उसे यह देखने के लिए तोड़ दिया कि क्या उसमें श्रीराम हैं या नहीं। जब उन्होंने मोतियों में राम नहीं पाए, तो उन्होंने अपने सीने को चीर कर दिखा दिया कि उनके हृदय में सदैव श्रीराम और माता सीता विराजमान हैं। इस अवसर पर कुलवंत सिंह भट्टी, प्रदीप तिवारी, सुरेश अरोड़ा, मैनेजर एचके पाल, ज्ञान चंद पराशर, टींकू शर्मा, श्याम लाल, सुदेश धीमान, डा. सत्य नारायण शर्मा, ललित लाली, हर्षित मिगलानी आदि श्रद्धालु प्रमुख रुप से मौजूद रहे।
