कुरुक्षेत्र, 25 मई। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में इंस्टीट्यूट ऑफ टीचर ट्रैनिंग एंड रिसर्च में 4 वर्षीय इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (आईटीईपी) के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। इच्छुक विद्यार्थी 21 जून 2026 तक आवेदन कर सकते हैं।
संस्थान की प्राचार्या प्रो. अनिता दुआ ने बताया कि संस्थान में बी.ए.-बी.एड., बी.एससी.-बी.एड. और बी.कॉम.-बी.एड. ड्यूल मेजर डिग्री कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। प्रत्येक कोर्स में 50 सीटें निर्धारित हैं। प्रवेश के लिए अभ्यर्थी का सीनियर सेकेंडरी या समकक्ष परीक्षा में कम से कम 50 प्रतिशत अंक होना तथा एनटीए द्वारा आयोजित नेशनल कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (एनसीईटी) उत्तीर्ण होना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत तैयार किए गए यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को आधुनिक एवं रोजगारोन्मुख शिक्षक शिक्षा प्रदान करेंगे। वर्ष 2030 तक शिक्षक बनने के लिए यह न्यूनतम डिग्री योग्यता मानी जाएगी। इस कोर्स के माध्यम से विद्यार्थियों का एक वर्ष बचेगा तथा उन्हें सीबीसीएस आधारित पाठ्यक्रम, विषय चयन की स्वतंत्रता और शिक्षण इंटर्नशिप के जरिए व्यावहारिक अनुभव मिलेगा।
लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि संस्थान में स्मार्ट क्लासरूम, आईसीटी आधारित टीचिंग लैब, वाई-फाई कैंपस, सीसीटीवी युक्त सुरक्षित वातावरण और समृद्ध पुस्तकालय जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय परिसर में हॉस्टल, खेल सुविधाएं, प्लेसमेंट सपोर्ट तथा एनसीसी, एनएसएस और वाईआरसी जैसी गतिविधियों से जुड़ने के अवसर भी मिलेंगे। इसके अलावा आईआरएडीए के साथ एमओयू के माध्यम से प्रशिक्षण एवं कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के लिए सॉफ्ट स्किल एन्हांसमेंट वर्कशॉप भी नियमित रूप से आयोजित होंगी।
संस्थान की प्राचार्या प्रो. अनिता दुआ ने बताया कि संस्थान में बी.ए.-बी.एड., बी.एससी.-बी.एड. और बी.कॉम.-बी.एड. ड्यूल मेजर डिग्री कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। प्रत्येक कोर्स में 50 सीटें निर्धारित हैं। प्रवेश के लिए अभ्यर्थी का सीनियर सेकेंडरी या समकक्ष परीक्षा में कम से कम 50 प्रतिशत अंक होना तथा एनटीए द्वारा आयोजित नेशनल कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (एनसीईटी) उत्तीर्ण होना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत तैयार किए गए यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को आधुनिक एवं रोजगारोन्मुख शिक्षक शिक्षा प्रदान करेंगे। वर्ष 2030 तक शिक्षक बनने के लिए यह न्यूनतम डिग्री योग्यता मानी जाएगी। इस कोर्स के माध्यम से विद्यार्थियों का एक वर्ष बचेगा तथा उन्हें सीबीसीएस आधारित पाठ्यक्रम, विषय चयन की स्वतंत्रता और शिक्षण इंटर्नशिप के जरिए व्यावहारिक अनुभव मिलेगा।
लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि संस्थान में स्मार्ट क्लासरूम, आईसीटी आधारित टीचिंग लैब, वाई-फाई कैंपस, सीसीटीवी युक्त सुरक्षित वातावरण और समृद्ध पुस्तकालय जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय परिसर में हॉस्टल, खेल सुविधाएं, प्लेसमेंट सपोर्ट तथा एनसीसी, एनएसएस और वाईआरसी जैसी गतिविधियों से जुड़ने के अवसर भी मिलेंगे। इसके अलावा आईआरएडीए के साथ एमओयू के माध्यम से प्रशिक्षण एवं कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के लिए सॉफ्ट स्किल एन्हांसमेंट वर्कशॉप भी नियमित रूप से आयोजित होंगी।
