गंगा दशहरा भारतीय सनातन परंपरा का एक पावन पर्व है जो आध्यात्मिक शुद्धि के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और जल के महत्व का संदेश देता है। गंगा दशहरा  का पर्व आस्था, तपस्या और भारतीय संस्कृति की अविरल धारा का प्रतीक है। गंगा दशहरा के उपलक्ष्य में मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ.श्रीप्रकाश मिश्र ने यह विचार मातृभूमि शिक्षा मंदिर द्वारा आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारंभ मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों द्वारा स्वस्तिवाचन से हुआ। इस अवसर पर मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों को पेय सामग्री भेंट की गई।
मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा
गंगा दशहरा भारतीय सनातन परंपरा का एक ऐसा महापर्व है जो न केवल हमें संचित पापों से मुक्ति दिलाता है, बल्कि गहन पर्यावरणीय चेतना और जीवन में पानी के वास्तविक मूल्य को भी समझता है। ज्येष्ठ मास की तपती दोपहरी में, जब संपूर्ण वसुधा जल की एक-एक बूंद के लिए व्याकुल होती है, तब माँ गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हमें यह संदेश देता है कि जल ही इस सृष्टि का आदि और अंत है। जल स्रोतों की पवित्रता बनाए रखना और प्रकृति का सम्मान करना ही इस पर्व का मूल दार्शनिक आधार है। गंगा दशहरा के दिन गंगा नदी में स्नान करते समय साधक केवल अपने स्थूल शरीर को स्वच्छ नहीं करता, बल्कि वह इस पवित्र जलधारा में इन दस मानसिक, वाचिक और कायिक विचारों को हमेशा के लिए विसर्जित करने का संकल्प लेता है। यही इस महापर्व का वास्तविक और गहरा आध्यात्मिक उद्देश्य है।
डॉ.श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा है गंगा दशहरा  केवल एक धार्मिक कर्मकांड का उत्सव नहीं है, यह गवाह है उस परम पावन क्षण का, जब ब्रह्मांड की सबसे पवित्र जलधारा, मोक्षदायिनी माँ गंगा का स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। यह उत्सव है राजा भगीरथ के अखंड पुरुषार्थ का, देवाधिदेव महादेव की असीम करुणा का और उस गौरवशाली संस्कृति का जिसने सहस्रों वर्षों से संपूर्ण मानवता को सभ्यता, निर्मलता, जल-संरक्षण और अध्यात्म की अविरल धारा से सींचा है। गंगा के धरातल पर अवतरित होने की पृष्ठभूमि मानवीय इतिहास की सबसे बड़ी और कठिन संकल्प गाथा है। भारत के भौगोलिक और सांस्कृतिक परिदृश्य में गंगा केवल एक नदी नहीं हैं, वे हमारी राष्ट्रीय चेतना की मुख्य संवाहक हैं।  आज के इस भौतिकवादी युग में गंगा दशहरा की सार्थकता तभी है, जब हम गंगा के आध्यात्मिक, पर्यावरण और व्यावहारिक संदेश को अपने अंतःकरण में उतारें। हम अपने विचारों को गंगा की तरह निर्मल रखें, अपने कर्मों को भगीरथ की तरह लोक कल्याण के प्रति समर्पित करें, पानी के मूल्य को समझें और अपनी इस जीवनदायिनी जीवन रेखा के संरक्षण के लिए सजग नागरिक की भूमिका निभाएं। गंगा दशहरा के इस पावन पर्व पर मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों ने जल संरक्षण का संकल्प लिया। कार्यक्रम में मातृभूमि सेवा मिशन के सदस्य,शिक्षक, विद्यार्थी आदि उपस्थित रहे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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